world-news

सारण शिक्षक सीट से नहीं लड़ेंगे रामपुकार सिन्हा: विधायकों ने अपना फैसला बदला, RLM ने 6 साल के लिए पार्टी से बाहर किया था - Patna News

October 16, 2026

RLM के विधायकों ने अपना फैसला बदल लिया है। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से RLM के प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता रामपुकार सिन्हा ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है।

.

प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह ने कहा कि हम NDA के नेताओं की जीत के लिए काम करेंगे। रामपुकार सिन्हा भी NDA के प्रत्याशी पुष्कर आनंद के समर्थन में प्रचार करेंगे।

नामांकन वापस लेने के बाद रामपुकार सिन्हा ने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और एनडीए के घटक दलों के नेताओं के साथ बैठक हुई। इस बैठक में मुझे आश्वस्त किया कि भविष्य में आपके लिए कुछ बेहतर संभावना देखी जाएगी। पार्टी के आश्वासन पर भरोसा करते हुए हमने नामांकन वापस लेने का फैसला लिया है। इसके बावजूद मैं अपने शिक्षक समर्थकों के बीच रहूंगा और पार्टी के लिए समर्पित रहूंगा।

बता दें कि कुछ दिन पहले रामपुकार सिन्हा को अनुशासनहीनता के आरोप में 6 साल के लिए पार्टी से बाहर किया था। हालांकि, नामांकन वापस लेने के बाद पार्टी में शामिल हो गए हैं।

MLC चुनाव के लिए रामपुकार सिन्हा (लेफ्ट से दूसरे) ने 5 अक्टूबर को नामांकन दाखिल किए थे। इस दौरान RLM के तीन विधायक उनके साथ मौजूद थे।

MLC चुनाव के लिए रामपुकार सिन्हा (लेफ्ट से दूसरे) ने 5 अक्टूबर को नामांकन दाखिल किए थे। इस दौरान RLM के तीन विधायक उनके साथ मौजूद थे।

पार्टी लाइन से हटकर रामपुकार ने किया था नामांकन

एमएलसी चुनाव में सारण शिक्षक सीट से रामपुकार सिन्हा ने पार्टी लाइन से हटकर निर्दलीय नामांकन किया था। निर्दलीय चुनाव लड़ने पर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया।

पार्टी के इस फैसले के बाद रामपुकार ने कहा था कि मेरे बड़े भाई उपेंद्र कुशवाहा जी के चरण कमलों में सादर प्रणाम करता हूं और मैं आशा करता हूं कि सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मुझे विजयश्री का आशीर्वाद दिए थे और हमेशा देते रहेंगे। मेरी ओर से हमेशा आपके एवं पूरे परिवार के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। पुनः मेरे बड़े भाई के चरण कमलों में मेरा सादर प्रणाम है

RLM विधायक ने कहा था- पार्टी ने रामपुकार सिन्हा को समर्थन किया

रामपुकार के पार्टी लाइन से अलग जाकर नामांकन करने पर माधव आनंद ने कहा था कि विधान परिषद के चुनाव में पार्टी सिंबल नहीं देती है। पार्टी या गठबंधन कैंडिडेट को अपना समर्थन देती है। रामपुकार सिन्हा को केवल विधायक ने नहीं, RLM ने अपना समर्थन दिया है।

उन्होंने यह भी कहा था कि 4 विधायकों वाली पार्टी में 3 विधायक ने लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लिया कि पार्टी के कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान और प्रतिष्ठा के लिए लड़ाई लड़नी है। बागी वाली कोई बात ही नहीं है। यहां पार्टी ने निर्णय लिया है। पार्टी को बचाने के लिए यह फैसला लिया है। तीन विधायकों ने निर्णय लिया है तो राष्ट्रीय लोक मोर्चा का निर्णय है।

RLM के इन तीन विधायकों में से आलोक सिंह इलेक्टेड प्रदेश अध्यक्ष हैं। माधव आनंद विधायक और पार्टी के विधायक दल के नेता और पार्टी के फाउंडर हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव भी हैं। रामेश्वर महतो विधायक और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

अब नाराजगी की वजह समझिए

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में विवाद की शुरुआत एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे और उम्मीदवार के चयन से हुई। गठबंधन की ओर से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के आनंद पुष्कर को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया गया। राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी एनडीए का हिस्सा है, इसलिए पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक और गठबंधन संबंधी जिम्मेदारी थी कि वह गठबंधन के अधिकृत उम्मीदवार के समर्थन में खड़े रहें।

पार्टी के प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता रामपुकार सिन्हा की तैयारी इस फैसले के साथ टकरा गई। सिन्हा लंबे समय से सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सक्रिय थे। वह शिक्षकों और शिक्षाविदों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए 'शिक्षाविदों की आशीर्वाद यात्रा' निकाल रहे थे। उनकी गतिविधियों से स्पष्ट था कि वह इस चुनाव को लेकर गंभीर दावेदारी पेश कर रहे थे।

ऐसे में जब यह सीट जेडीयू के खाते में चली गई और आनंद पुष्कर को एनडीए का अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया गया, तो सिन्हा के सामने अपनी दावेदारी छोड़ने या गठबंधन के फैसले के खिलाफ जाने का विकल्प था। उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।

5 अक्टूबर को रामपुकार ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में दाखिल किया था नामांकन

5 अक्टूबर 2026 को रामपुकार सिन्हा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। इस कदम ने आरएलएम नेतृत्व के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी। एक तरफ एनडीए का अधिकृत उम्मीदवार था, तो दूसरी तरफ उसी गठबंधन के घटक दल का पदाधिकारी चुनाव मैदान में उतर चुका था।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह रही कि रामपुकार सिन्हा को पार्टी के भीतर से भी समर्थन मिलने लगा। आरएलएम के कुल चार विधायकों में से तीन विधायक उनके पक्ष में खड़े हो गए। इनमें प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह, माधव आनंद और रामेश्वर महतो शामिल थे। तीनों विधायकों का सिन्हा के नामांकन में शामिल होना पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश था। जिससे पार्टी के भीतर नेतृत्व के फैसले को लेकर असहमति भी खुलकर सामने आ गई थी।

इससे पहले उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव बाद आखिरी समय में अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री पद की शपथ दिला दी। दीपक किसी सदन के सदस्य नहीं थे।

उपेंद्र कुशवाहा पहले से राज्यसभा सांसद हैं। राजनीति से दूर रहने वाली पत्नी को इस बार सासाराम से विधायक बनवा दिया। यही कारण है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।

कुशवाहा का 6 साल के निलंबन का फैसला, फिर विधायकों की खुली चुनौती

रामपुकार सिन्हा के निर्दलीय चुनाव लड़ने और एनडीए के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ उतरने के बाद आरएलएम नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया। पार्टी ने 12 अक्टूबर 2026 को रामपुकार सिन्हा को छह साल के लिए निलंबित कर दिया।

पार्टी नेतृत्व की ओर से इस कार्रवाई को अनुशासन और गठबंधन के प्रति प्रतिबद्धता के संदर्भ में देखा गया। एनडीए में शामिल किसी दल के पदाधिकारी का गठबंधन के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ना नेतृत्व के लिए राजनीतिक असहजता पैदा कर सकता था। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा के सामने पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने और गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने की चुनौती थी।

लेकिन निलंबन के फैसले से विवाद खत्म होने के बजाय और गहरा गया। रामपुकार सिन्हा के समर्थन में खड़े विधायक नेतृत्व के फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। बागी विधायक रामेश्वर महतो ने उपेंद्र कुशवाहा को खुली चुनौती देते हुए सवाल उठाया कि जब रामपुकार सिन्हा को पार्टी से बाहर किया जा रहा है, तो उनके समर्थन में खड़े विधायकों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।