
भारत में तेजी से बढ़ रहे करोड़पति
भारत में इन दिनों करोड़पतियों की संख्या रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही है. हालत यह है कि देश में जितनी तेजी से अमीर पैदा हो रहे हैं, उनका पैसा संभालने और सही जगह निवेश करवाने वाले ‘वेल्थ मैनेजरों’ (Wealth Managers) की भारी कमी हो गई है. पिछले पांच सालों में 3 करोड़ डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपये) से ज्यादा की संपत्ति वाले भारतीयों की संख्या में 63 फीसदी का बड़ा उछाल आया है. लेकिन, हैरानी की बात यह है कि देश में ऐसे रईसों का पोर्टफोलियो संभालने वाले अनुभवी रिलेशनशिप मैनेजर (RM) मात्र 1,900 के करीब हैं. पैसों की इस अचानक आई बाढ़ ने वेल्थ मैनेजमेंट कंपनियों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है कि आखिर इतने सारे नए अमीरों का पैसा कौन और कैसे मैनेज करेगा.
अमीरों की सुनामी के बीच सलाहकारों का संकट
नाइट फ्रैंक के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 में भारत में 3 करोड़ डॉलर से ज्यादा की नेटवर्थ वाले लोग 12,161 थे, जो 2026 तक बढ़कर 19,877 हो गए हैं. अनुमान है कि 2031 तक यह आंकड़ा 25 हजार को पार कर जाएगा. अकेले मुंबई में देश के 35 प्रतिशत से ज्यादा अल्ट्रा-रिच आबादी रहती है. भारत में अरबपतियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. लेकिन असली दिक्कत यह है कि इन अमीरों को सही वित्तीय सलाह देने वाले विशेषज्ञ बाजार में पर्याप्त मात्रा में मौजूद ही नहीं हैं. अगर 2028 तक रिलेशनशिप मैनेजरों की संख्या बढ़कर 2,800 तक पहुंच भी जाती है, तब भी यह दबाव कम होने वाला नहीं है.
मैनेजरों की बल्ले-बल्ले, मिल रहा 40% तक तगड़ा इंक्रीमेंट
अनुभवी सलाहकारों की इस किल्लत का सीधा फायदा मौजूदा वेल्थ मैनेजरों को मिल रहा है. मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टैलेंट की कमी के कारण बैंक और प्राइवेट वेल्थ फर्में दूसरे संस्थानों से मैनेजरों को अपने पाले में करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं. इसके लिए वे 20 से 40 प्रतिशत तक का मोटा इंक्रीमेंट और कई साल का गारंटीड बोनस दे रही हैं. दरअसल, एक नए व्यक्ति को इस काम के लिए ट्रेनिंग देकर तैयार करने में 18 से 24 महीने लग जाते हैं, इसलिए कंपनियां सीधे अनुभवी लोगों को मुंहमांगी कीमत पर हायर कर रही हैं. आने वाले समय में एक अकेले मैनेजर के ऊपर औसतन 4.8 अरब रुपये का फंड संभालने का भारी दबाव होगा.
अमेरिका के मुकाबले भारत का वेल्थ बाजार कहां खड़ा है?
भारत में भले ही पैसा बढ़ रहा है, लेकिन वेल्थ मैनेजमेंट का बाजार अभी भी शुरुआती दौर में है. अमेरिका में 75 प्रतिशत दौलत पेशेवर मैनेजर संभालते हैं, जबकि भारत में यह आंकड़ा बमुश्किल 15 प्रतिशत है. डेलॉयट के डेटा के मुताबिक, आज भी भारत के करीब 35 से 40 फीसदी अमीर परिवार अपना पैसा खुद ही मैनेज करते हैं. लेकिन अब यह ट्रेंड तेजी से बदल रहा है. अगले एक दशक में पुरानी पीढ़ी से नई पीढ़ी के हाथों में 1.5 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति ट्रांसफर होने वाली है. ऐसे में इन अमीर परिवारों को सिर्फ शेयर या म्यूचुअल फंड तक सीमित नहीं रहना, बल्कि उन्हें प्राइवेट इक्विटी और विदेशी निवेश जैसे जटिल विकल्प चाहिए. इसके लिए एक माहिर वेल्थ मैनेजर का होना अनिवार्य है.
डिजिटल तकनीक से सुलझेगी ये मुश्किल?
भारत का डिजिटल बुनियादी ढांचा बहुत मजबूत हो चुका है. देश में 19.2 करोड़ से ज्यादा डीमैट खाते हैं और हर महीने 3 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश एसआईपी (SIP) के जरिए आ रहा है. देश की बड़ी आबादी के पास पुख्ता डिजिटल पहचान है और यूपीआई (UPI) के जरिए सालाना 2.5 ट्रिलियन डॉलर का लेन-देन हो रहा है. 360 वन (360 ONE) और नुवामा (Nuvama) जैसी बड़ी वेल्थ मैनेजमेंट कंपनियां इस कमी को पाटने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रही हैं. हालांकि, तकनीक से रिसर्च और डेटा एनालिसिस का काम तो आसान हो सकता है, लेकिन अल्ट्रा-रिच ग्राहकों को आज भी इंसान (रिलेशनशिप मैनेजर) का भरोसा ही चाहिए. तकनीक किसी मैनेजर की काम करने की क्षमता जरूर बढ़ा सकती है, लेकिन वह उसकी पूरी तरह जगह नहीं ले सकती.

विभव शुक्ला
विभव शुक्ला वर्तमान में TV9 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर बिजनेस डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता में उन्हें छह वर्षों का अनुभव है. विभव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी. इसके बाद वह Inshorts और गुजरात फर्स्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे हैं.
Read More