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'मनहूस' कहकर उड़ाया गया मजाक, तो बुरी तरह टूट गया था ये एक्टर, आंखों में आ जाते थे आंसू

July 26, 2026

Jugal Hansraj Birthday: 90 के दशक में बॉलीवुड में कई ऐसे एक्टर आए, जिन्होंने अपनी मासूम मुस्कान और शानदार पर्सनैलिटी से लाखों दिलों पर राज किया. इन्हीं सितारों में एक नाम है जुगल हंसराज का. नीली आंखें, चॉकलेटी लुक और सादगी से भरपूर अंदाज ने उन्हें उस दौर का सबसे हैंडसम एक्टर बना दिया था. हालांकि, उनकी पॉपुलेरिटी के बावजूद उनका करियर वैसी ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच पाया, जैसी लोगों ने उनसे उम्मीद की थी.

आज जुगल हंसराज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस खास मौके पर आइए जानते हैं उस संघर्ष की कहानी, जब लगातार फिल्में बंद होने की वजह से उन्हें इंडस्ट्री में मनहूस तक कहा जाने लगा था. इतना ही नहीं, हालात ऐसे हो गए थे कि फोन पर फिल्म बंद होने की खबर सुनते-सुनते उनकी आंखों में आंसू आ जाते थे.

चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर शुरू हुआ सफर

जुगल हंसराज का फिल्मी सफर बहुत छोटी उम्र में शुरू हो गया था. उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट बॉलीवुड में कदम रखा और अपनी मासूम अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया. वो 'मासूम' और 'कर्मा' जैसी फिल्मों में नजर आए, जहां उनकी एक्टिंग की खूब सराहना हुई. बचपन में मिली इस सफलता ने उन्हें इंडस्ट्री में एक मजबूत पहचान दिलाई. धीरे-धीरे उन्होंने बतौर लीड एक्टर भी काम करना शुरू किया और रोमांटिक हीरो के रूप में अपनी अलग छवि बनाई.

'पापा कहते हैं' के बाद बदल गई किस्मत

जुगल हंसराज के करियर में सबसे बड़ा मोड़ फिल्म 'पापा कहते हैं' से आया. इस फिल्म के बाद निर्माता-निर्देशकों की नजर उन पर पड़ी और उन्हें एक साथ कई फिल्मों के ऑफर मिलने लगे. एक समय ऐसा था जब उनके पास करीब 35 से 40 फिल्मों के ऑफर मौजूद थे. किसी भी नए एक्टर के लिए ये किसी सपने के सच होने जैसा था. ऐसा लग रहा था कि आने वाले सालों में जुगल बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो जाएंगे. लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था.

एक-एक करके बंद होती गईं फिल्में

जिन फिल्मों को लेकर जुगल हंसराज ने बड़े-बड़े सपने देखे थे उनमें से ज्यादातर कभी फ्लोर पर ही नहीं जा सकीं. कुछ फिल्मों की शूटिंग शुरू होने वाली थी, कुछ का मुहूर्त हो चुका था, जबकि कई फिल्मों पर शुरुआती काम भी शुरू हो गया था. लेकिन अचानक एक फोन आता और उन्हें बताया जाता कि फिल्म अब नहीं बन रही. लगातार ऐसा होने लगा. एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों प्रोजेक्ट किसी न किसी वजह से बंद होते चले गए. एक्टर के लिए ये दौर बेहद निराशाजनक था.

'मनहूस' तक कहने लगे थे लोग

एक इंटरव्यू में जुगल हंसराज ने अपने करियर के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए बताया कि उस समय लोग उनका मजाक उड़ाने लगे थे. उन्होंने कहा कि उन्हें अलग-अलग नामों से बुलाया जाता था. कई लोग उन्हें 'मनहूस' तक कहने लगे थे. फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग यहां तक कहने लगे थे कि अगर किसी फिल्म का मुहूर्त हो और उसमें जुगल पहुंच जाएं तो शायद वो फिल्म कभी पूरी ही नहीं होगी. उन्होंने बताया कि कई फिल्मी आयोजनों में लोग उनके सामने ही तंज कसते थे. उन्होंने कहा, "लोग कहते थे, अब समय आ गया है कि जुगल अपनी फिल्मों के मुहूर्त में शामिल हों. मेरे लिए ऐसे कमेंट किए जाते थे." ऐसी बातें सुनना किसी भी कलाकार के लिए आसान नहीं होता.

जब फोन कॉल बन गई सबसे बड़ी चिंता

जुगल हंसराज ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब फोन की घंटी बजने से उन्हें डर लगने लगा था. उन्हें अक्सर प्रोड्यूसर या निर्देशक का फोन आता और सामने से कहा जाता कि जिस फिल्म की तैयारी चल रही थी, वो अब नहीं बन पाएगी. उन्होंने बताया, "जब मुझे फोन आता था कि जिस फिल्म को मैंने साइन किया था वो अब नहीं हो रही है तो मैं सिर्फ 'थैंक यू' कहकर फोन रख देता था." हर बार ऐसी खबर सुनना उनके लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन होता जा रहा था.

इस दौर ने रुला दिया था 

लगातार असफलताओं और टूटते सपनों ने जुगल हंसराज को अंदर तक झकझोर दिया था. उन्होंने स्वीकार किया कि ये उनके जीवन का सबसे मुश्किल दौर था. जिन फिल्मों के जरिए वो अपने करियर को नई उड़ान देना चाहते थे, वो एक-एक करके बंद होती चली गईं. इस पूरी स्थिति ने उन्हें कई बार भावुक कर दिया और उनकी आंखों से आंसू तक निकल आए. उनका कहना था कि उस दौर ने उन्हें ये सिखा दिया कि फिल्म इंडस्ट्री में सिर्फ टैलेंट ही काफी नहीं होता. यहां कई ऐसी चीजें होती हैं जो किसी कलाकार के नियंत्रण में नहीं होतीं.

तब समझ आया फिल्म इंडस्ट्री का असली सच

जुगल हंसराज का मानना है कि बॉलीवुड की दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखाई देती है, अंदर से उतनी ही अनश्योर है. उन्होंने कहा कि अगर कोई इस इंडस्ट्री में करियर बनाने का सपना लेकर आता है तो उसे इसकी सच्चाई को स्वीकार करना सीखना होगा. कई बार फिल्में बनने से पहले ही बंद हो जाती हैं, कई बार निर्माता पीछे हट जाते हैं और कई बार परिस्थितियां पूरी तरह बदल जाती हैं. ऐसे में कलाकार के पास धैर्य बनाए रखने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता.

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