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छात्रों के आगे झुकी सरकार! शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, जानिए संजय सिंह, कपिल सिब्बल से लेकर तमाम नेताओं ने क्या कहा
- Edited by: मोनू झा
- Updated Jul 25, 2026, 04:12 PM IST
Dharmendra Pradhan Resign: लगातार जारी छात्र आंदोलन और विपक्ष के भारी दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जंतर-मंतर पर 20 जून से चल रहे प्रदर्शनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद उन्होंने यह कदम उठाया।
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छात्र शक्ति के आगे झुकी सरकार (फाइल फोटो)
Photo :
PTI
Dharmendra Pradhan Resign: देशभर में परीक्षा धांधली और नीट (NEET) विवाद को लेकर उबल रहा छात्रों का गुस्सा आखिरकार रंग लाया। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में डटे छात्रों और लगातार मजबूत होते आंदोलन के आगे झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। विपक्षी दलों के कड़े रुख और सड़कों पर युवाओं के डटे रहने के बाद यह बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है।
अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ जिम्मेदार लोग छात्रों को गुमराह कर रहे थे और वे नहीं चाहते कि राष्ट्र विरोधी ताकतें इस आंदोलन का अनुचित फायदा उठाएं। छात्रों का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, इसी वजह से उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया है।
करोड़ों युवाओं के संघर्ष ने सोई हुई सरकार को जगाया-संजय सिंह
इस इस्तीफे के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में बयानों की बाढ़ आ गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इसे युवा शक्ति की ऐतिहासिक जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि करोड़ों युवाओं के संघर्ष ने सोई हुई सरकार को जगाया है और यह लड़ाई अब सिर्फ इस्तीफे तक सीमित न रहकर रोजगार और जवाबदेही तय होने तक जारी रहेगी।
कपिल सिब्बल और अभिषेक बनर्जी क्या बोले?
वरिष्ठ नेता और वकील कपिल सिब्बल ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस फैसले में बहुत देर कर दी गई। उन्होंने पूछा कि 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले झेलने वाले निर्दोष छात्रों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा? वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यह घटना साबित करती है कि जनता की ताकत किसी भी सत्ता से बड़ी होती है।
एक्टविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी ने सोशल मीडिया पर लिखा: अगर किसी ने यह दिखाया है कि भारत के लिए 'विश्वगुरु' होने का वास्तव में क्या मतलब है, तो वह हमारी जेन ज़ेड (Gen Z) है। उन्होंने सनातन धर्म का केवल प्रचार नहीं किया, बल्कि उसे जीकर दिखाया है। नफरत के बिना साहस, हिंसा के बिना ताकत, और अंधी भक्ति के बिना देशभक्ति। दुनियाभर के अपने कई साथियों के विपरीत, उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि अपने ही देश को नुकसान पहुंचाए बिना भी अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़ा हुआ जा सकता है।
शायद अब वक्त आ गया है कि हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी इन युवा भारतीयों से हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और 'विश्वगुरु' बनने के सही मायनों के बारे में कुछ बातें सीखे। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब देश को एक ऐसा शिक्षा मंत्री मिलेगा जो शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक और पारदर्शी सुधार ला सके। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी प्रदर्शनकारियों के जज्बे को सलाम किया। अधीर रंजन ने कहा कि अगर सरकार यह कदम पहले उठा लेती, तो युवाओं पर हुए लाठीचार्ज और पुलिसिया कार्रवाई को टाला जा सकता था।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि यह फैसला देर से आया, लेकिन देश के लोगों के लिए राहत की बात है। फिलहाल, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे ने यह साफ कर दिया है कि देश का युवा अपने हक और पारदर्शी भविष्य के लिए अब किसी भी समझौते के मूड में नहीं है।
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मोनू झाauthor
मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।
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