इस्तीफे के बाद भी धर्मेंद्र प्रधान के खाते में हर महीने आएंगे सवा लाख रुपये! क्या है सैलरी-पेंशन का नियम?
Updated: Saturday, July 25, 2026, 16:04 [IST]
Dharmendra Pradhan Salary-Pension: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। 20 जून से चल रहे CJP प्रोटेस्ट के बाद उन्होंने आखिरकार स्टूडेंट्स की मांग पर अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को सौंप दिया है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर ने राजनीतिक हलकों के साथ-साथ स्टूडेंट्स और आम लोगों के बीच भी चर्चा बढ़ा दी है। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी दी और ओपन लेटर भी शेयर किया।
अपने लेटर में उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर पर धरने और देश में बने हालात का फायदा राष्ट्र विरोधी ताकतें न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे और किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेजा है। अब उनके इस्तीफे के बाद एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या केंद्रीय मंत्री का पद छोड़ने पर उन्हें अलग से पेंशन मिलेगी? आइए समझते हैं पूरा नियम।
मंत्री पद छोड़ने पर अलग पेंशन नहीं
संसदीय नियमों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा देने पर कोई अलग या अतिरिक्त पेंशन नहीं मिलती। मंत्री पद के लिए अलग से पेंशन की व्यवस्था नहीं है। पेंशन का लाभ पूर्व सांसद के तौर पर मिलता है। यानी किसी व्यक्ति का सांसद के रूप में रहा कार्यकाल ही उसकी पूर्व सांसद पेंशन तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
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- मौजूदा नियमों के मुताबिक, जो व्यक्ति कम से कम एक बार सांसद रह चुका है, उसे पूर्व सांसद के तौर पर हर महीने 31,000 रुपये की मूल पेंशन मिलती है।
- इसके अलावा, अगर किसी सांसद का कार्यकाल पांच साल से ज्यादा रहा है तो पांच साल के बाद हर अतिरिक्त साल के लिए 2,500 रुपये प्रति माह की अतिरिक्त राशि पेंशन में जुड़ती है। इसलिए किसी पूर्व सांसद की कुल पेंशन उसके संसद में बिताए अतिरिक्त वर्षों के आधार पर बढ़ सकती है।
धर्मेंद्र प्रधान का क्या होगा पेंशन हिसाब?
धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा विधानसभा के पूर्व सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा वह राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य भी रहे हैं। ऐसे में अगर वह भविष्य में संसद की सदस्यता से भी बाहर होते हैं, तो उन्हें पूर्व सांसद के तौर पर मिलने वाली पेंशन का लाभ मिल सकता है। ऐसी स्थिति में उन्हें कम से कम 31,000 रुपये प्रति माह की बेस पेंशन मिलेगी। इसके साथ ही पांच साल से अधिक के सांसद कार्यकाल के आधार पर हर अतिरिक्त वर्ष के लिए 2,500 रुपये प्रति माह की राशि भी जुड़ सकती है।
अगर सांसद बने रहते हैं तो?
अगर धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा देते हैं, लेकिन सांसद बने रहते हैं, तो उन्हें पूर्व सांसद की पेंशन नहीं मिलेगी। ऐसी स्थिति में वह मौजूदा सांसद के तौर पर मिलने वाली सैलरी और भत्तों के हकदार रहेंगे। इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के अनुसार, सांसद को करीब 1.24 लाख रुपये प्रति माह वेतन और इसके अलावा नियमों के तहत अलग-अलग भत्ते मिलते हैं। इसलिए मंत्री पद छोड़ने और सांसद पद छोड़ने को एक जैसा नहीं माना जाता।
पूर्व सांसदों को मिलती हैं ये सुविधाएं
पूर्व सांसदों को पेंशन के अलावा कुछ दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं। इनमें मुफ्त रेल यात्रा की सुविधा शामिल है। पूर्व सांसद खुद AC-I में और एक साथी के साथ AC-II में मुफ्त ट्रेन यात्रा कर सकते हैं। इसके अलावा, पात्र पूर्व सांसदों को CGHS योजना के तहत आजीवन चिकित्सा सुविधा भी मिलती है। यानी मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मिलने वाले लाभ का सीधा संबंध मंत्री पद से नहीं, बल्कि सांसद के रूप में उनकी पात्रता और पूर्व सांसदों के लिए लागू नियमों से होता है।
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