Mehmood Death Anniversary: हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी बेहतरीन कॉमेडियंस का जिक्र होगा तो महमूद का नाम सबसे ऊपर लिया जाएगा. जी हां, उन्होंने अपनी शानदार एक्टिंग, बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से कई दशकों तक दर्शकों का मनोरंजन किया. महमूद सिर्फ एक कॉमेडियन ही नहीं, बल्कि एक्टर, निर्माता, निर्देशक और सिंगर भी थे. उन्होंने अपने करियर में दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और जितेंद्र जैसे कई बड़े सितारों के साथ काम किया. 23 जुलाई 2004 को अमेरिका में उनका निधन हो गया था. आज उनकी 22वीं डेथ एनिवर्सरी पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से, जिनमें राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन के साथ उनके रिश्तों की चर्चा भी शामिल है.
आठ भाई-बहनों में सातवें नंबर पर थे महमूद
महमूद का जन्म 29 सितंबर 1932 को मुंबई में हुआ था. उनके पिता मुमताज अली हिंदी फिल्मों के जाने-माने डांसर और कलाकार थे, जबकि उनकी मां लतीफुन्निसा बेगम थीं. परिवार बड़ा था और महमूद आठ भाई-बहनों में सातवें नंबर पर थे. हालांकि उनके पिता एक समय फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा नाम थे, लेकिन बाद में परिवार आर्थिक तंगी से गुजरने लगा. ऐसे हालात में महमूद ने बचपन से ही परिवार की जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दी थीं.
बचपन में किए कई छोटे-मोटे काम
फिल्मों में पहचान बनाने से पहले महमूद ने कई तरह के छोटे-मोटे काम किए. उन्होंने कभी ड्राइवर की नौकरी की, तो कभी मुर्गियां और टॉफियां बेचकर घर चलाने में मदद की. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने मशहूर निर्देशक पी.एल. संतोषी के यहां ड्राइवर के तौर पर भी काम किया था. संघर्ष के दिनों में उन्होंने हर छोटा-बड़ा काम किया, लेकिन फिल्मों में सफल अभिनेता बनने का सपना कभी नहीं छोड़ा.
9 साल की उम्र में रखा फिल्मों में पहला कदम
महमूद ने बहुत छोटी उम्र में एक्टिंग की दुनिया में कदम रख दिया था. उन्होंने साल 1943 में रिलीज हुई अशोक कुमार स्टारर फिल्म 'किस्मत' में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया था. उस समय उनकी उम्र महज 9 साल थी. इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक छोटे-छोटे रोल किए. गुरुदत्त की क्लासिक फिल्म 'प्यासा' में भी उन्हें एक छोटा किरदार निभाने का मौका मिला. धीरे-धीरे उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से इंडस्ट्री में अलग पहचान बना ली.
कॉमेडी के बेताज बादशाह बने महमूद
1960 और 1970 के दशक में महमूद की पॉपुलेरिटी इतनी ज्यादा थी कि कई फिल्मों में उनका किरदार ही सबसे ज्यादा पसंद किया जाता था. कई निर्माता-निर्देशक सिर्फ उनके नाम पर फिल्में बेचने लगे थे. उन्होंने पड़ोसन, बॉम्बे टू गोवा, गुमनाम, प्यार किए जा, भूत बंगला, कुंवारा बाप, सब से बड़ा रुपैया, लव इन टोक्यो, वारिस जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में यादगार अभिनय किया. उनकी कॉमिक टाइमिंग, डायलॉग डिलीवरी और अलग अंदाज ने उन्हें हिंदी सिनेमा का सबसे पॉपुलर कॉमेडियन बना दिया.
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निर्देशक और निर्माता के तौर पर भी छोड़ी छाप
महमूद सिर्फ एक्टर ही नहीं रहे, बल्कि उन्होंने निर्देशन और फिल्म निर्माण में भी हाथ आजमाया. उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया. फिल्म 'कुंवारा बाप' उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है, जिसमें उन्होंने सामाजिक संदेश को मनोरंजन के साथ पेश किया था. ये फिल्म उनके दिल के बेहद करीब मानी जाती है.
'जनता हवलदार' के दौरान राजेश खन्ना से हुआ विवाद
महमूद और राजेश खन्ना के बीच हुआ विवाद बॉलीवुड के चर्चित किस्सों में शामिल है. साल 1979 में रिलीज हुई फिल्म 'जनता हवलदार' का निर्माण और निर्देशन महमूद ने किया था. फिल्म में राजेश खन्ना और हेमा मालिनी मुख्य भूमिका में थे. इसकी शूटिंग का एक हिस्सा महमूद के फार्महाउस पर भी हुआ था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक दिन महमूद के बेटे फिल्म के सेट पर पहुंचे और उन्होंने राजेश खन्ना से सिर्फ हैलो-हाय करके वहां से चले गए. कहा जाता है कि ये बात राजेश खन्ना को पसंद नहीं आई. इसके बाद उनके व्यवहार में बदलाव आने लगा और वो कई बार शूटिंग पर देर से पहुंचने लगे.
रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि जब ये सिलसिला लगातार चलता रहा, तब महमूद बेहद नाराज हो गए. बताया जाता है कि उन्होंने सेट पर सबके सामने राजेश खन्ना को थप्पड़ मार दिया और कहा, "आप सुपरस्टार होंगे अपने घर के. मैंने इस फिल्म के लिए आपको पूरी फीस दी है और आपको ये फिल्म पूरी करनी ही पड़ेगी." हालांकि इस घटना को लेकर अलग-अलग तरह के दावे किए जाते रहे हैं और इसकी ऑफिसियल पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ये किस्सा बॉलीवुड के चर्चित विवादों में गिना जाता है.
अमिताभ बच्चन से भी रिश्तों में आई थी कड़वाहट
महमूद और अमिताभ बच्चन के बीच एक समय बेहद अच्छे संबंध थे. करियर के शुरुआती दौर में महमूद ने अमिताभ बच्चन का काफी समर्थन किया था. कहा जाता है कि उन्होंने अमिताभ को फिल्म 'बॉम्बे टू गोवा' में मौका दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. यही फिल्म आगे चलकर अमिताभ के करियर की बड़ी फिल्मों में शामिल हुई. लेकिन बाद के सालों में दोनों के रिश्तों में दूरी आ गई.
एक इंटरव्यू में महमूद ने खुद बताया था कि जब वो बायपास सर्जरी के लिए मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती थे, उसी दौरान अमिताभ बच्चन अपने पिता हरिवंश राय बच्चन को लेकर वहां आए थे. महमूद का कहना था कि अमिताभ उनसे मिलने या उनका हालचाल जानने नहीं पहुंचे. इस बात से उन्हें गहरा दुख पहुंचा और दोनों के रिश्तों में खटास आ गई. हालांकि अमिताभ बच्चन ने इस मामले पर कभी सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
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