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विदिशा शहर के शेरपुरा, रायपुरा, मोहनगिरि, मंडी गेट, स्टेशन रोड सहित कई इलाके एचआईवी एड्स के हाई रिस्क जोन में शामिल हो गए हैं। वहीं गंजबासौदा के एसजीएस कॉलेज, लाल पठार, रविदास कॉलोनी सहित कई इलाके भी एचआईवी एड्स की चपेट में हैं। इस साल अप्रैल से अक्टूबर तक जिले में 15 नए पॉजिटिव मरीज सामने आए हैं।
जिले में इंजेक्टिंग ड्रग यूजर की संख्या 340 तक पहुंच गई है। इसके अलावा साल 2008 के बाद अब तक कुल 780 लोग एचआईवी एड्स की चपेट में आ चुके हैं। ज्यादातर मरीज नशा करने और चोरी करने के आरोप में जब पकड़े गए तो उनको जेल जाना पड़ा। वहां जब इनकी एचआईवी एड्स की जांच की गई तो इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। ^विदिशा जिले में एचआईवी एड्स पॉजिटिव मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रभावित इलाकों में टीमें बनाकर जांच करवाई जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में पहले से ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मौके पर जाकर लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल में जांच और इलाज की पूरी सुविधा उपलब्ध है। यहां मरीजों की काउंसलिंग की जाती है। सिरिंज से इंजेक्शन लगाकर प्रभावित हुए मरीजों की संख्या ज्यादा है। डॉ. अनूप वर्मा, सिविल सर्जन, विदिशा हाल ही में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जिले में 340 से अधिक इंजेक्टिंग ड्रग यूजर पंजीकृत हैं। विदिशा प्रदेश के उन सात जिलों में शामिल है, जहां इंजेक्शन के माध्यम से नशा करने वालों की संख्या में वृद्धि के कारण एचआईवी संक्रमण की संभावना चिंता का विषय बन गई है।
इस समस्या से निपटने के लिए रेडक्रॉस और एड्स कंट्रोल सोसाइटी के सहयोग से एनजीओ द्वारा जागरूकता कार्यक्रम, सुरक्षित सिरिंज वितरण, और एचआईवी जांच की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि, जिले में ओपीओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) सेंटर नहीं होने के कारण, नशे के आदी 200 लोगों को दवा के लिए रोजाना भोपाल की ओर जाना पड़ता है। जांच और इलाज के लिए जब कई मरीजों को ले जाया गया तो ट्रेन से कूदने लगे। बाद में चोरी करते हुए पकड़ाए। जब जेल गए तो वहां जांच में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। साल 2017 में आए एक्ट के मुताबिक टीबी और एड्स के मरीजों का इलाज भी सामान्य मरीजों की तरह करना है। इनके लिए अब अलग से वार्ड भी नहीं बनाए जा रहे हैं।
विदिशा और बासौदा हॉस्पिटल में एचआईवी एड्स पॉजिटिव मरीजों की जांच और काउंसिलिंग की सुविधा है, लेकिन लटेरी, सिरोंज, कुरवाई, शमशाबाद, ग्यारसपुर, नटेरन आदि तहसीलों में न तो इसकी जांच होती है और न ही काउंसिलिंग। इससे यहां एड्स पॉजिटिव मरीजों का पता ही नहीं चल पा रहा है। यदि यहां जांच कराई जाए तो बड़ी संख्या में मरीज सामने आ सकते हैं। विदिशा जिला अस्पताल में काउंसलर ज्योति दुबे का कहना है कि अशोकनगर, गुना और शिवपुरी जिलों से प्रभावित होकर मरीज विदिशा आए हैं। बासौदा के ज्यादातर मजदूर काम करने राजस्थान जाते हैं। वहां से वे एचआईवी एड्स पॉजिटिव होकर आए हैं।