केंद्र सरकार 18वीं लोकसभा के आठवें सत्र में कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इस सत्र के दौरान सरकार पांच नए विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है, जबकि दो पहले से लंबित विधेयकों को भी चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। इन प्रस्तावित कानूनों का संबंध कर व्यवस्था, न्यायपालिका, नागरिक पंजीकरण, राष्ट्रीय सम्मान और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से है।
आखिर कौन-कौन से नए विधेयक ला सकती है सरकार?
सरकार जिन पांच नए विधेयकों को सदन में ला सकती है, उनमें इनकम-टैक्स (संशोधन) बिल, 2026 और सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026 प्रमुख हैं। दोनों विधेयक पहले जारी किए गए अध्यादेशों का स्थान लेने के उद्देश्य से लाए जा रहे हैं। इनकम-टैक्स संशोधन बिल के जरिए कर प्रशासन और कर संबंधी प्रावधानों में बदलाव किए जाने की संभावना है, जबकि सुप्रीम कोर्ट से जुड़े विधेयक का उद्देश्य शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने संबंधी प्रावधानों को कानूनी रूप देना माना जा रहा है।
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जन्म-मृत्यु पंजीकरण और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनों में क्या बदलाव हो सकते हैं?
इसके अलावा जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026 भी सरकार के एजेंडे में शामिल है। यह विधेयक जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) बिल, 2026 के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े कानूनों में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।
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MSME क्षेत्र को मजबूत करने के लिए क्या है सरकार की योजना?
सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026 भी पेश कर सकती है। माना जा रहा है कि इसके जरिए MSME क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने, वित्तीय सहायता की व्यवस्था को मजबूत करने और कारोबार को आसान बनाने से जुड़े प्रावधानों को और प्रभावी बनाया जाएगा।
किन लंबित विधेयकों पर भी रहेगी संसद की नजर?
नए विधेयकों के अलावा सरकार दो लंबित विधेयकों पर भी विचार कर सकती है। इनमें विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026 शामिल है, जिसे 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। यह विधेयक विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव करता है। वहीं विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025, जिसे 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था, फिलहाल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास विचाराधीन है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद इस पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
आठवें सत्र का विधायी एजेंडा क्यों माना जा रहा है अहम?
आठवें सत्र में इन विधेयकों पर होने वाली चर्चा सरकार की विधायी प्राथमिकताओं की दिशा तय करेगी। माना जा रहा है कि इन प्रस्तावित कानूनों के जरिए कर व्यवस्था, न्यायपालिका, नागरिक सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था और MSME क्षेत्र सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नीतिगत बदलावों का रास्ता साफ हो सकता है।
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विपक्ष पर होगी नजर
मानसून सत्र के दौरान लोगों की नजर देश के विपक्ष पर भी होगी। क्योंकि हाल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद कई राज्यों में सरकार और गठबंधन बदल चुके हैं। कई सांसदों के पाला बदलने के बाद अब सरकार को अपने बिलों को पास कराने में कोई खास दिक्कत नहीं होने वाली है। वहीं, विपक्ष की वो पार्टियां जो चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ थीं लेकिन चुनाव के बाद उनका गठबंधन उनसे टूट गया है उनका सीटिंग अरेंजमेंट भी बदला हुआ देखने को मिल सकता है।