सऊदी पर लगातार हमले कर रहे हूती विद्रोही, आखिर मक्का समझौते के बाद भी क्या नदारद हैं पाकिस्तान और तुर्किये
DG ISPR ने कहा कि पाकिस्तान की सेनाएं सऊदी अरब में कई दशकों से मौजूद हैं. उन्होंने साफ किया कि मक्का डिफेंस अलायंस अचानक बना कोई नया संबंध नहीं है.
DG ISPR ने कहा कि पाकिस्तान की सेनाएं सऊदी अरब में कई दशकों से मौजूद हैं. उन्होंने साफ किया कि मक्का डिफेंस अलायंस अचानक बना कोई नया संबंध नहीं है.
![]()
New Update
/newsnation/media/media_files/2024/10/26/pGHb6Kc8Oshf4C37xs9H.jpg)
Saudi Arabia
यमन के हूती विद्रोहियों के साथ सऊदी अरब का संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच, पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य मौजूदगी और सहयोग को लेकर बड़ा बयान दिया है. पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशन यानी DG ISPR, लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब में पहले से मौजूद हैं. वहां कई क्षेत्रों में काम कर रहे हैं.
सऊदी अरब में पहले से मौजूद हैं पाकिस्तानी सैनिक
DG ISPR ने कहा कि पाकिस्तान की सेनाएं सऊदी अरब में कई दशकों से मौजूद हैं. उन्होंने साफ किया कि मक्का डिफेंस अलायंस अचानक बना कोई नया संबंध नहीं है. वहीं, दोनों देशों के बीच लंबे वक्त से राजनयिक, राजनीतिक और सैन्य रिश्ते हैं. उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी सेना के जवान अलग-अलग क्षमताओं और क्षेत्रों में सऊदी अरब में तैनात हैं.
8,000 सैनिकों की तैनाती का क्या है मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में हुए सऊदी-पाकिस्तान समझौते के तहत पाकिस्तान ने सऊदी अरब में करीब 8,000 सैनिकों की मौजूदगी स्थापित की थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 तक करीब 8,000 पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब पहुंच चुके थे. वर्तमान मक्का डिफेंस पैक्ट के तहत कितने अतिरिक्त सैनिक भेजे जाएंगे, इसकी आधिकारिक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है.
हूतियों के हमलों के बीच सक्रिय हुआ मक्का पैक्ट
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने अगस्त 2026 में मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे. इसके तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होने को तीनों देशों पर हमला माना जाता है. 5 अक्टूबर को तीनों देशों ने इस समझौते को लागू करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने और सऊदी अरब में जरूरी सैन्य क्षमताओं की तेजी से तैनाती की घोषणा की। घटनाक्रम ऐसे वक्त में हुआ है, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोही सऊदी अरब के शहरों, एयरपोर्ट और दूसरे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. हाल के हमलों में सऊदी एयरपोर्ट पर लोगों की मौत भी हुई है.
क्या पाकिस्तानी सैनिक हूतियों से सीधे लड़ेंगे?
फिलहाल यह साफ नहीं है कि पाकिस्तान की सेना सीधे हूतियों के खिलाफ युद्ध अभियान में हिस्सा लेगी या फिर नहीं. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के अनुसार, पाकिस्तानी और तुर्किये की सेनाएं वर्तमान में सहायक भूमिका में है. वहीं, सीधी जमीनी लड़ाई में सऊदी की सेना शामिल है. पाकिस्तान के जिम्मे निगरानी सहित दूसरी सैन्य सहायता शामिल है. वहीं, तुर्किये ने उसके जिम्मे एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और तकनीकी सहायता है. वह आक्रामक सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लेगा।
सऊदी अरब में क्यों बढ़ रहा है तनाव?
यमन में हूतियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच संघर्ष फिर से तेज हो गया है. हूतियों ने हाल के दिनों में रियाद और दूसरे सऊदी शहरों पर मिसाइल हमले किए. रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है. सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन इसके जवाब में यमन में हूती ठिकानों पर हवाई हमले कर रहे हैं. ऐसे में मक्का डिफेंस पैक्ट के एक्टिव होने से पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये के बीच सहयोग और मजबूत होने की संभावना है. हालांकि, अतिरिक्त सैनिकों की संख्या, उनका मिशन और सीधे युद्ध में उनकी भूमिका के बारे में अभी जानकारी नहीं है.