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दिल्ली में प्रदूषण रोकने की नई रणनीति, महंगी पार्किंग से कम होगी कारों की रफ्तार या बढ़ेगी जेब की मार?

October 2, 2026

सर्दियों की आहट के साथ दिल्ली में पॉल्यूशन की चिंता फिर बढ़ने लगी है. इस बार सरकार ने पार्किंग को भी हथियार बनाया है. 1 नवंबर 2026 से ऑथराइज्ड पार्किंग की फीस दोगुनी कर दी जाएगी. यह व्यवस्था 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी. दिल्ली मेट्रो की पार्किंग इस नियम से बाहर है. लॉजिक सीधा है—पार्किंग महंगी होगी तो लोग निजी गाड़ी निकालने से पहले सोचेंगे. सड़क पर गाड़ियां कम होंगी तो ट्रैफिक और उनसे होने वाला प्रदूषण भी घट सकता है. लेकिन सवाल है क्या सिर्फ पार्किंग महंगी करने से लोग गाड़ी छोड़ देंगे?

पहले भी बढ़ी है पार्किंग फीस

दिल्ली में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा. 2023 और 2024 में भी पार्किंग फीस बढ़ाने के फैसले लिए गए. 2025 में खराब हवा के बीच नई दिल्ली इलाके में फीस दोगुनी की गई थी. तब नॉर्मल सरफेस पार्किंग में फोर-व्हीलर की फीस 20 से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति घंटा और टू-व्हीलर की 10 से 20 रुपये प्रति घंटा की गई थी. बसों की फीस 150 से 300 रुपये प्रति घंटा हुई थी, लेकिन फीस बढ़ने के बावजूद पार्किंग स्पेस की ऑक्यूपेंसी में खास कमी नहीं दिखी.

पर्यावरण एवं भूविज्ञान विशेषज्ञ राजेश सॉलमन पॉल का कहना है कि इससे संकेत मिलता है कि पार्किंग फीस बढ़ाने और निजी वाहन इस्तेमाल घटने के बीच सीधा संबंध मानना सही नहीं होगा.

किसके लिए गाड़ी छोड़ना मुश्किल है?

एक तरफ ऐसे लोग हैं जहां मेट्रो या बस की अच्छी कनेक्टिविटी है और घर से स्टेशन या स्टेशन से ऑफिस तक पहुंचना आसान है. उनके लिए महंगी पार्किंग पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरफ जाने का कारण बन सकती है, लेकिन हर व्यक्ति के पास यह विकल्प नहीं है. बच्चों या बुजुर्गों के साथ सफर करने वाले, सामान लेकर चलने वाले, कई जगह मीटिंग के लिए जाने वाले या ऐसे इलाकों में रहने वाले लोग जहां लास्ट-माइल कनेक्टिविटी कमजोर है, उनके लिए निजी वाहन मजबूरी भी हो सकता है.

पर्यावरण विशेषज्ञ राजेश पॉल कहते हैं कि जब-तक घर से वर्कप्लेस और वापस घर तक का सफर सीमलेस नहीं होगा, सिर्फ पार्किंग फीस बढ़ाने से निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना मुश्किल है.

असली सवाल पार्किंग नहीं, विकल्प का है

अगर किसी व्यक्ति के पास कार के अलावा आसान विकल्प ही नहीं है, तो पार्किंग 40 की जगह 80 रुपये होने पर भी वह कार चला सकता है. इसलिए पॉल कहते हैं प्रदूषण कम करने के लिए फोकस सिर्फ पार्किंग की कीमत पर नहीं होना चाहिए. बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, मजबूत लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, सुरक्षित फुटपाथ और ईवी का बढ़ता इस्तेमाल साथ-साथ जरूरी है.

अगर मेट्रो स्टेशन से घर तक सिर्फ 300 मीटर का रास्ता है, लेकिन फुटपाथ टूटा है, सड़क अंधेरी है या पैदल चलना असुरक्षित लगता है, तो लोग कार या कैब ही यूज करेंगे. लास्ट माइल जितना ईजी और सेफ होगा, प्राइवेट गाड़ियां उतनी कम होंगी.

वर्क फ्रॉम होम से कितना फर्क पड़ेगा?

इस बार पार्किंग फीस बढ़ाने के साथ सरकारी और प्राइवेट ऑफिसों में 50 फीसदी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने और ऑफिस टाइमिंग में बदलाव की भी योजना है. राजेश पॉल कहते हैं कि इसका असर सबसे पहले उन इलाकों में दिख सकता है, जहां ऑफिस और कमर्शियल गतिविधियां ज्यादा हैं. वहां सड़क पर वाहनों की संख्या घटने से लोकल पॉल्यूशन कम हो सकता है.

लेकिन पूरे शहर के एंबिएंट एयर क्वालिटी इंडेक्स पर असर तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं है. कोविड के दौरान भी देखा गया था कि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होने के साथ समय के साथ हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ था.

साइकिल और फुटपाथ भी हैं समाधान

दिल्ली में प्रदूषण कम करने की बहस अक्सर कार, बस और मेट्रो तक सीमित रह जाती है. लेकिन इनवॉयरमेंट स्पेशलिस्ट कहते हैं सुरक्षित पैदल रास्ते और साइकिलिंग कॉरिडोर भी जरूरी हैं.

अगर व्यक्ति मेट्रो से उतरकर सुरक्षित फुटपाथ से अपने ऑफिस तक पहुंच सके या छोटी दूरी साइकिल से तय कर सके तो हर छोटे सफर के लिए कार निकालने की जरूरत कम हो सकती है. दूसरे देशों में साइकिलिंग को ट्रांसपोर्ट सिस्टम का हिस्सा बनाया गया है. भारत में भी इसके लिए सुरक्षित और इंटीग्रेटेड नेटवर्क की जरूरत है.

इसीलिए जानकार मानते हैं महंगी पार्किंग से अकेले प्रदूषण का समाधान मानना मुश्किल है. और सरकार भी केवल इस पर निर्भर नहीं हैं ये उन तमाम उपायों और पहलों में से एक हैं जो सरकार हवा खराब होने से पहले ही तैयारी कर रही है.

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प्रमिला दीक्षित

प्रमिला दीक्षित

दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय... कश्मीर से केदारनाथ और काशी तक, अपराध से आतंकवाद तक, दंगों की क्रूरता से दरियादिली की कहानी तक, राजनीति से साहित्य की रवानी तक, तथ्य, तर्क और संवेदना के साथ हर विषय पर रिपोर्टिंग करती रही हैं. वीडियो, रेडियो, ब्लॉग- लेख, कविता और मॉडरेशन उनकी अभिव्यक्ति के माध्यम है.

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