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प्रत्युषा बनर्जी के Ex-बॉयफ्रेंड राहुल राज हुए रिहा! बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 साल बाद लिया ये फैसला
लगभग 10 साल बाद बालिका वधू फेम अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनके पूर्व बॉयफ्रेंड और एक्टर-प्रोड्यूसर राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से सिंह को कथित आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में ट्रायल का सामना करने से राहत मिली है। जस्टिस शिवकुमार जी डिगे ने फैसला देते हुए कपल की रिकॉर्डेड अंतिम टेलीफोन बातचीत पर काफी भरोसा जताया, जिसमें राहुल राज सिंह को प्रत्युषा को किसी भी चरम कदम से रोकने की कोशिश करते सुना गया था। बालिका वधू सीरीज में आनंदी का किरदार निभाकर पॉपुलर हुईं प्रत्युषा बनर्जी 1 अप्रैल 2016 को मुंबई के गोरेगांव स्थित अपने किराए के अपार्टमेंट में मृत पाई गई थीं। उनकी उम्र उस समय सिर्फ 24 साल थी।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल राज सिंह को किया डिस्चार्ज
बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल राज की रिवीजन याचिका को मंजूर कर लिया। इस याचिका में उन्होंने दिंडोशी सेशंस कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी गई थी। सेशंस कोर्ट ने अगस्त 2023 में उनकी अर्जी ठुकरा दी थी। पुलिस ने इस मामले में 2018 में चार्जशीट दाखिल की थी। प्रत्युषा की मां के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने के बाद सिंह पर आत्महत्या के लिए उकसाने, हमला और आपराधिक धमकी के प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया था। उन पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे। सिंह को जुलाई 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी थी। इसके बाद उन्होंने केस से डिस्चार्ज की मांग की और दलील दी कि सबूत उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
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कोर्ट ने कपल की अंतिम बातचीत पर दिया जोर
जस्टिस डिगे ने फैसला देते समय सिंह और प्रत्युषा के बीच मौत से कुछ समय पहले हुई रिकॉर्डेड बातचीत को प्रमुख आधार माना। सिंह के वकीलों—सीनियर एडवोकेट आबाद पोंडा और एडवोकेट श्रेयांश मिथारे—के अनुसार, इस बातचीत में राहुल राज, प्रत्युषा को कोई भी कठोर कदम उठाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कथित तौर पर उन्हें बताया कि वे अपनी कार घुमा चुके हैं और उनसे मिलने जा रहे हैं। वकीलों ने दलील दी कि यह बातचीत उस आरोप से मेल नहीं खाती जिसमें कहा गया था कि राहुल राज ने जानबूझकर उनकी आत्महत्या के लिए उकसाया। उन्होंने बातचीत के उन हिस्सों पर भी जोर दिया जिनमें प्रत्युषा ने अपनी परेशानी के दौरान कई लोगों, जिनमें उनके माता-पिता भी शामिल थे, का जिक्र किया था। डिफेंस ने यह भी तर्क दिया कि एफआईआर बिना किसी सुसाइड नोट के दर्ज की गई थी और सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने में जल्दबाजी दिखाई गई।
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प्रत्युषा बनर्जी के परिवार ने क्या आरोप लगाए थे?
प्रत्युषा की मां ने आरोप लगाया था कि सिंह के व्यवहार और कथित उत्पीड़न ने उनकी बेटी की मौत में योगदान दिया। अभियोजन पक्ष ने गवाहों और प्रत्युषा को जानने वाले लोगों के बयानों पर भी भरोसा जताया था। पिछली कार्यवाहियों में अभियोजन पक्ष ने सिंह के डिस्चार्ज का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि प्रत्युषा 1 अप्रैल 2016 को दोपहर करीब 4 बजे अपने मुंबई निवास पर मरीं और उनकी मां ने बाद में शिकायत दर्ज कराई कि राहुल राज के उत्पीड़न ने उनकी बेटी को चरम कदम उठाने के लिए मजबूर किया। सेशंस कोर्ट ने पहले गवाहों के बयानों के आधार पर उत्पीड़न के प्राथमिक संकेत पाए थे और राहुल राज को डिस्चार्ज करने से इनकार कर दिया था।
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राहुल राज का डिफेंस क्या था?
राहुल राज सिंह की याचिका में दावा किया गया था कि उन्होंने प्रत्युषा की हालत जानने के बाद उनकी जान बचाने की कोशिश की। उनके वकीलों ने उन गवाह बयानों का हवाला दिया जिनमें कथित तौर पर यह समर्थन मिलता है कि उन्होंने उन्हें जीवित करने की कोशिश की और अस्पताल ले गए। उनकी याचिका में इस आरोप का भी खंडन किया गया कि उन्होंने अपनी कथित शक्की प्रवृत्ति के कारण प्रत्युषा को टेलीविजन करियर जारी रखने से रोका। डिफेंस ने जुलाई से अक्टूबर 2015 के बीच एक टेलीविजन रियलिटी शो में उनकी उपस्थिति का हवाला दिया। राहुल राज के वकीलों ने आगे कहा कि कपल ने दिसंबर 2016 में शादी करने की योजना बनाई थी और परिस्थितियां तथा रिकॉर्डेड बातचीत आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप का समर्थन नहीं करतीं।
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प्रत्युषा बनर्जी का करियर
प्रत्युषा बनर्जी को बालिका वधू के जरिए देशभर में पहचान मिली, जिसमें उन्होंने आनंदी का किरदार निभाया। यह उनके टेलीविजन करियर का सबसे यादगार किरदार रहा। 24 साल की उम्र में उनकी मौत ने टेलीविजन इंडस्ट्री को झकझोर दिया और इस घटना के इर्द-गिर्द लंबी कानूनी लड़ाई छिड़ गई। इस फैसले के साथ राहुल राज सिंह को लगभग एक दशक बाद राहत मिली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सबूतों और अंतिम बातचीत के आधार पर उन्हें आरोपमुक्त कर दिया है।