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पितर प्रसन्न कैसे हों?: गयाजी में पिंडदान से जुड़े हर सवाल का जवाब एक जगह पढ़ें; श्राद्ध की मान्यताओं को समझें

September 24, 2026

मोक्षभूमि गयाजी में पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना  को लेकर लगने वाला विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 2026 अब शुरू होने जा रहा है। 25 सितंबर से शुरू होने वाले इस धार्मिक महापर्व में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए गयाजी पहुंचेंगे। बिहार की राजधानी पटना के पुनपुन से पितृकर्म की शुरुआत मानी जाती है, लेकिन गयाजी में पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व है। लोग पितरों को संतुष्ट और प्रसन्न करने के लिए गयाजी जरूर आते हैं। इस बार मेला में परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक का भी संगम देखने को मिलेगा। गयाजी आने से पहले जानिए पितृपक्ष से जुड़े हर जरूरी सवाल का जवाब।



सवाल- पितृपक्ष मेला में गयाजी में कर्मकांड कब से शुरू होगा?


जवाब- गयाजी में पितृपक्ष मेला के दौरान पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा (इस बार, शुक्रवार 25 सितंबर) से होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन फल्गु नदी में स्नान, खीर के पिंड का श्राद्ध और तर्पण के साथ पितृकर्म का शुभारंभ होता है। इसके बाद आश्विन कृष्ण पक्ष की विभिन्न तिथियों पर श्रद्धालु अपने पितरों की मृत्यु तिथि या निर्धारित श्राद्ध तिथि के अनुसार गयाजी की अलग-अलग वेदियों पर विधि-विधान से पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु की पावन नगरी गयाजी में किया गया पिंडदान पितरों को तृप्ति और मोक्ष प्रदान करता है।

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सवाल- कौन दे सकता है पितरों को जल (तर्पण)?


जवाब- सनातन परंपरा के अनुसार पितरों को जल अर्पित करने का पहला अधिकार पुत्र को माना गया है। पुत्र के अभाव में पौत्र, प्रपौत्र या परिवार का अन्य योग्य सदस्य तर्पण कर सकता है। विशेष परिस्थितियों में योग्य महिला या निकट संबंधी भी आचार्य के मार्गदर्शन में तर्पण कर सकते हैं। श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया तर्पण पितरों की तृप्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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सवाल- पितर की तिथि का निर्धारण कैसे होता है?


जवाब- पितर की तिथि का निर्धारण आम तौर पर पिता के देहावसान की हिंदी तिथि के हिसाब से होता है। यानी, हिंदी मास का भले दोनों में से कोई भी पक्ष हो, लेकिन उसकी तिथि गणना को देखा जाता है। इसमें उदय तिथि को ही माना जाता है। यानी, अगर किसी के पिता का देहावसान किसी हिंदी मास के किसी पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ हो तो उसके लिए पितर के तर्पण की तिथि वही होगी अमूमन। तृतीया तिथि का सूर्योदय हो चुका है तो अगले सूर्योदय तक, जब तक तिथि परिवर्तन न हो- देहावसान की तिथि तृतीया ही मानी जाएगी।



सवाल- पितृपक्ष मेला में क्या करें, क्या नहीं?


जवाब- धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष श्रद्धा, संयम और पितरों के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। इस दौरान श्रद्धालुओं को सात्विक जीवन अपनाते हुए विधि-विधान से पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करना चाहिए। दान-पुण्य, जरूरतमंदों की सेवा और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना शुभ माना जाता है। वहीं नशा, तामसिक भोजन, विवाद, क्रोध और किसी का अपमान करने से बचने की सलाह दी जाती है।



सवाल- क्या इस बार पितृपक्ष मेला में फल्गु नदी में पानी मिलेगा?
जवाब- 
हां, इस बार श्रद्धालुओं को फल्गु नदी में तर्पण के लिए जल उपलब्ध है। फल्गु नदी पर बना डैम पानी से भरा हुआ है, जिससे नदी में जल की व्यवस्था की गई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार फल्गु तट पर पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को तृप्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।



सवाल- गयाजी में पिंडदान करने के लिए कितने दिनों का श्राद्ध करने का नियम है?


जवाब- धार्मिक मान्यता के अनुसार गयाजी में पिंडदान एक दिन से लेकर 17 दिनों तक अलग-अलग विधियों से किया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा, परंपरा और समय के अनुसार कर्मकांड करते हैं। गयाजी में किया गया पिंडदान पितरों की शांति और मोक्ष के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।