कौन हैं सलमान खान जिन्होंने जीता एशियन गेम्स में मेडल, पिता की मौत और कैब ड्राईवर बनने के बाद किया देश का नाम
Published: Thursday, September 24, 2026, 12:15 [IST]
समय हर किसी का खराब हो सकता है, इसके बाद अच्छे दिन भी आते हैं। ऐसा ही दिल्ली की सड़कों पर कैब चलाने वाले सलमान खान के साथ था। परिवार की जिम्मेदारी इतनी बड़ी थी कि खेल और करियर के सपने पीछे छूट गए थे। कुछ साल बाद यही सलमान भारत की जर्सी पहनकर एशियन गेम्स के पोडियम पर खड़े थे।
24 सितंबर 2026 का दिन उनकी जिंदगी में एक और बड़ी कहानी जोड़ गया। सलमान खान और सतनाम सिंह ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में पुरुषों की डबल स्कल्स में कांस्य पदक जीत लिया। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में 6:13.25 का समय निकाला। इस स्पर्धा में यह भारत का पहला एशियन गेम्स पदक है।
18 साल की उम्र में बदली जिंदगी
सलमान उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के पूरे ढिंगई गांव से हैं। परिवार में वह चार भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके पिता मोहम्मद कासिम खान हरियाणा के ताऊरू में ट्रक-बॉडी बनाने का काम करते थे। सलमान ने भी वहीं अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की।
जब वह सिर्फ 18 साल के थे, उनके पिता की डेंगू से मौत हो गई। छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी अचानक सलमान के कंधों पर आ गई। ऐसे में भारतीय सेना में जाने का सपना कुछ समय के लिए पीछे छूट गया और परिवार चलाना उनकी प्राथमिकता बन गया। सलमान दिल्ली आ गए और यहां कैब (Uber) चलाने लगे। वह दिन-रात काम करते थे ताकि परिवार की जरूरतें पूरी कर सकें।
सेना में जाने के बाद शुरू की रोइंग
फिर एक दोस्त ने सलमान को उनकी कद-काठी और शारीरिक क्षमता को देखते हुए सेना में भर्ती होने की सलाह दी। सलमान ने कैब दूसरे ड्राइवर को सौंप दी और करीब चार महीने भर्ती की तैयारी की। उन्होंने भर्ती रैली, मेडिकल और लिखित परीक्षा पास की और 25 सितंबर 2018 को पुणे के बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप में शामिल हो गए।सेना में आने के बाद उनकी जिंदगी ने एक और मोड़ लिया। कोचों ने उनकी शारीरिक क्षमता देखकर उन्हें रोइंग की तरफ जाने के लिए प्रेरित किया।
जिस खेल को पहले छोड़ना चाहते थे, उसी में बना करियर
रोइंग की शुरुआत भी सलमान के लिए आसान नहीं थी। पहली इंटर-सेंटर रेगाटा में सिल्वर जीतने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इसके बाद 2021 में उन्होंने एर्गोमीटर बेंचमार्क पार किया और Army Rowing Node, CME Pune के लिए चुने गए। यहीं से रोइंग उनके करियर का हिस्सा बनती चली गई।
इसके बाद सलमान ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। 2022 नेशनल गेम्स में गोल्ड, 2023 सीनियर नेशनल्स में सिंगल स्कल्स का खिताब और 2024 एशियन रोइंग कप में गोल्ड उनके सफर के बड़े पड़ाव रहे। 2025 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियन रोइंग चैंपियनशिप और एशियन रोइंग चैंपियनशिप में सिल्वर भी जीता।
एशियन गेम्स से पहले बदला इवेंट
सलमान और सतनाम मूल रूप से पुरुषों की क्वाड्रपल स्कल्स टीम का हिस्सा थे। एशियन गेम्स से ठीक पहले भारतीय रोइंग टीम में बड़े बदलाव हुए और दोनों को डबल स्कल्स में भेज दिया गया। इस बदलाव को लेकर टीम में नाराजगी भी सामने आई थी।
नई जोड़ी के सामने चुनौती बड़ी थी, दोनों ने तालमेल बैठाया और फाइनल में शुरुआत से ही पदक की दौड़ में बने रहे। 500 मीटर, 1000 मीटर और 1500 मीटर तक भारतीय जोड़ी दूसरे स्थान पर थी। आखिरी 500 मीटर में वे तीसरे स्थान पर खिसके लेकिन कांस्य पदक बचा लिया।