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ड्यू डेट पर पेमेंट करने का सबसे बड़ा रिस्क
कई बार ऑनलाइन किसी ऐप या नेट बैंकिंग से जैसे ही पेमेंट करते हैं और पैसे कट जाते हैं, तो हमें लगता है कि काम खत्म हो गया है, लेकिन हकीकत ये है कि थर्ड-पार्टी ऐप्स या दूसरे बैंक से क्रेडिट कार्ड तक पैसा पहुंचने में 24 से 72 घंटे यानी 1 से 3 दिन का समय लग सकता है। अगर उस बीच शनिवार, रविवार या बैंक की छुट्टी पड़ गई, तो पैसा ड्यू डेट के बाद क्रेडिट होगा। ऐसे में बैंक के सिस्टम के लिए आप 'डिफॉल्टर' बन सकते हैं, भले ही आपका पैसा समय पर कटा हो।
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सिर्फ एक दिन की देरी और हजारों का झटका
क्रेडिट कार्ड की दुनिया में कोई ग्रेस पीरियड नहीं होता है, अगर पेमेंट बैंक सिस्टम में लेट दर्ज हुई। जैसे ही ड्यू डेट पार हुई, भारी लेट फीस लग सकता है। इसके लिए आपको बिल के हिसाब से 500 से 1,500 रुपए तक की पेनल्टी देनी पड़ सकती है। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड पर सालाना 40% से 45% तक का ब्याज लगता है। ये ब्याज सिर्फ बचे हुए पैसे पर नहीं, बल्कि उस बिलिंग साइकल में की गई हर एक खरीदारी पर पहले दिन से जुड़ जाता है। लेट फीस और ब्याज के ऊपर सरकार का 18% जीएसटी अलग से कटता है।
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3 दिन पहले का फॉर्मूला बचा सकता है पैसा
इस पूरे झंझट से बचने का एक तरीका है कि ड्यू डेट से ठीक 3 दिन पहले बिल भर दें। मान लीजिए आपके कार्ड की आखिरी तारीख 20 तारीख है, तो आपका पेमेंट हर हाल में 17 तारीख की शाम तक हो जाना चाहिए। इससे अगर बैंकिंग सर्वर डाउन भी हुआ या बीच में कोई छुट्टी आई, तब भी आपका पैसा 19 या 20 तारीख तक बैंक के खाते में सेटल हो जाएगा। आपका एक भी रुपया पेनल्टी में नहीं कटेगा।
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सिबिल स्कोर बर्बाद होने से बचाएं
बैंक हर महीने आपके पेमेंट का रिकॉर्ड क्रेडिट ब्यूरो (CIBIL) को भेजते हैं। अगर पेमेंट सेटलमेंट में 2 दिन की भी देरी हुई और बैंक ने 'लेट पेमेंट' मार्क कर दिया, तो आपका सिबिल स्कोर एक झटके में 30 से 50 पॉइंट नीचे गिर सकता है। इसका असर ये होगा कि भविष्य में जब आप होम लोन या कार लोन लेने जाएंगे, तो या तो लोन रिजेक्ट होगा या फिर महंगे ब्याज पर मिलेगा। 3 दिन पहले बिल भरकर आप अपना क्रेडिट स्कोर बेहतर बनाए रख सकते हैं।
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ऑटो-डेबिट का सही इस्तेमाल सीखें
अगर आपको तारीखें याद रखने में परेशानी होती है, तो अपने सेविंग्स अकाउंट से 'ऑटो-डेबिट' ऑन कर लें। लेकिन इसमें भी दो तरह की सावधानियां रखें। पहली हमेशा 'टोटल अमाउंट ड्यू' (पूरा बिल) का विकल्प चुनें। कभी भी 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' न चुनें। मिनिमम भरने पर बाकी रकम पर 40% ब्याज लगना चालू रहता है। दूसरा खाते में पर्याप्त बैलेंस रखें ताकि आखिरी दिन ईसीएस बाउंस न हो, वरना बैंक बाउंस चार्ज भी काट लेगा।
डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल सिर्फ वित्तीय साक्षरता और सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। अलग-अलग बैंकों और क्रेडिट कार्ड कंपनियों के बिलिंग साइकल, पेमेंट सेटलमेंट समय, लेट फीस और ब्याज दरें उनके नियमों और शर्तों के अनुसार अलग हो सकती हैं। अपने कार्ड से संबंधित सटीक नियम, ग्रेस पीरियड और चार्ज की जानकारी के लिए कृपया अपने संबंधित बैंक के आधिकारिक दिशा-निर्देश पढ़ें या कस्टमर केयर से संपर्क करें।
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