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पुराने तरीके छोड़ नए दौर में कदम! अगली पीढ़ी के अमीर कहां लगा रहे हैं करोड़ों रुपए? जानिए बड़ा ट्रेंड

September 21, 2026

पुराने तरीके छोड़ नए दौर में कदम! अगली पीढ़ी के अमीर कहां लगा रहे हैं करोड़ों रुपए? जानिए बड़ा ट्रेंड

Image Credit source: DEV IMAGES/Moment/Getty Images

भारत में अगले एक दशक के दौरान 1.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 144 लाख करोड़ रुपए) का ऐतिहासिक वेल्थ ट्रांसफर होने जा रहा है, जहां देश के सबसे अमीर परिवारों (HNIs) की कमान अब नई पीढ़ी के हाथों में आ रही है. पारंपरिक रूप से वेल्थ बनाने वाले बुजुर्गों से यह पैसा अब टेक-सेवी और वैश्विक दृष्टिकोण रखने वाले युवा सेक्सेसर के पास ट्रांसफर हो रहा है. यह पीढ़ीगत बदलाव केवल परिवारों के भीतर संपत्ति के ट्रांसफर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय फाइनेंशियल मार्केट और वेल्थ मैनेज्मेंट के पूरे ढांचे को एक नया आकार दे रहा है.

अगली पीढ़ी के ये एचएनआई (GenNext HNIs) अपने फैमिली पोर्टफोलियो को पूरी तरह से ‘रीबिल्ड’ (पुनर्गठन) कर रहे हैं. गोल्ड, रियल एस्टेट और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे ट्रेडिशनल और सुस्त रिटर्न देने वाले एसेट्स के बजाय युवा अमीरों का झुकाव प्राइवेट इक्विटी, न्यू-एज टेक स्टार्टअप्स, इंटरनेशनल इक्विटी, ग्रीन एनर्जी और एआई (AI) से जुड़े एसेट क्लास की तरफ अधिक है. रिस्क उठाने की हाई कैपेसिटी और डिजिटल इकोनॉमी की बेहतर समझ के कारण ये युवा इंवेस्टसर अपने फैमिली ऑफिस (Family Offices) के जरिए निवेश की पुरानी रणनीतियों को नए दौर की प्राथमिकताओं के साथ तेजी से बदल रहे हैं.

मेन प्वाइंट्स से समझें पूरा मामला

  1. 1.5 ट्रिलियन डॉलर का ट्रांसफर: अगले 10 सालों में भारत में करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति पुरानी पीढ़ी से नए दौर के युवाओं के पास ट्रांसफर होगी.
  2. प्रोफेशनल मैनेजमेंट पर भरोसा: युवा HNI निवेशक अनौपचारिक फैसलों की जगह प्रोफेशनल वेल्थ मैनेजर्स, डेटा एनालिटिक्स और पारदर्शी रिपोर्टिंग सिस्टम अपना रहे हैं.
  3. अल्टरनेटिव एसेट्स की ओर झुकाव: पोर्टफोलियो का लगभग 40% से 45% हिस्सा अब केवल पारंपरिक शेयरों या रियल एस्टेट में नहीं, बल्कि प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल, एआई (AI) और डेटा सेंटर्स जैसे सेक्टर्स में लगाया जा रहा है.
  4. ग्लोबल एसेट एलोकेशन: जोखिम को कम करने और अंतरराष्ट्रीय अवसरों का फायदा उठाने के लिए युवा निवेशक 10% से 20% पोर्टफोलियो ग्लोबल एसेट्स में निवेश कर रहे हैं.
  5. फैमिली ऑफिस और सक्सेशन प्लान: परिवार में भविष्य के विवादों को रोकने और संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए संस्थागत संरचना जैसे ‘फैमिली संविधान’ और उत्तराधिकार योजनाएं बनाई जा रही हैं.

फैमिली पोर्टफोलियो में क्या-क्या बड़े बदलाव आ रहे हैं?

  • अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट्स में रिकॉर्ड बढ़ोतरी : पारंपरिक रूप से भारतीय परिवार अपनी बचत को बैंक एफडी, सोने, घरेलू शेयरों या रियल एस्टेट तक सीमित रखते थे. लेकिन नए दौर के HNIs ज्यादा रिटर्न और ग्रोथ के लिए अपने कुल पोर्टफोलियो का 40% से 45% हिस्सा अल्टरनेटिव एसेट्स में लगा रहे हैं, जिसमें प्राइवेट इक्विटी एवं वेंचर कैपिटल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री, क्लाइमेट टेक, रिन्यूएबल एनर्जी और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है.
  • इंटरनेशनल मार्केट्स में निवेश : अपनी वेल्थ को ग्लोबल झटकों से बचाने के लिए युवा HNIs भारत के बाहर भी निवेश के ऑप्शन चुन रहे हैं. वेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, वे अपने पोर्टफोलियो का लगभग 10% से 20% हिस्सा इंटरनेशनल मार्केट्स और विदेशी संपत्तियों में अलॉट कर रहे हैं.
  • फैमिली ऑफिस और गवर्नेंस : जैसे-जैसे पारिवारिक संपत्ति और व्यवसाय का दायरा बढ़ रहा है, उसे व्यवस्थित रखना बेहद जरूरी हो गया है. इसके लिए भारतीय परिवार अब ‘फैमिली ऑफिस’ का ढांचा तैयार कर रहे हैं. संपत्ति का बंटवारा अगली पीढ़ी में पारदर्शी तरीके से कैसे होगा, इसका खाका पहले से तैयार किया जा रहा है. परिवार के मेंबर्स के बीच व्यापारिक फैसले लेने और निवेश के नियमों को तय करने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जा रहे हैं.

सौरभ शर्मा

सौरभ शर्मा

2008 से शेयर मार्केट, इकोनॉमी और कमोडिटी कवर कर रहे हैं. टीवी9 के साथ जुड़ने से पहले डीएनए, ए​शियानेट, जनसत्ता, दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका जैसे कई बड़े संस्थानों के साथ भी जुड़े रहे.

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