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नंदीग्राम उपचुनाव: गिरफ्तारी के बावजूद क्या कांग्रेस प्रत्याशी लड़ सकेंगे चुनाव? क्या है नियम

September 19, 2026

Election Commission rules : पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ गया है. कांग्रेस महासचिव वेणुगोपाल ने इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले को लेकर चुप बैठने वाली नहीं है और इसे देशभर में एक बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप दिया जाएगा. नामांकन वापस लेने की समय सीमा से ठीक पहले कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. हैरान करने वाली बात यह रही कि यह गिरफ्तारी ममता बनर्जी गुट द्वारा मिलन प्रधान को खुला समर्थन देने के महज कुछ ही घंटों के भीतर हुई. इस घटनाक्रम के बाद जहां विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की भावना बता रहा है, वहीं आम जनता और सियासी गलियारों में एक बड़ा कानूनी सवाल खड़ा हो गया है. क्या गिरफ्तारी के बाद भी कोई उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है?

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नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी पर भड़के केसी वेणुगोपाल

नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी के बाद सियासत गरमा गई है. केरल के अलाप्पुझा में पत्रकारों से बात करते हुए केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस गिरफ्तारी के आगे झुकने वाली नहीं है. उन्होंने कहा, “उपचुनाव में हमारे उम्मीदवार अपना नामांकन किसी भी हाल में वापस नहीं लेंगे. चाहे उम्मीदवार की हत्या भी हो जाए, नामांकन वापस नहीं लिया जाएगा. वही उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे और मजबूती से मुकाबला करेंगे.”

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Alappuzha, Keralam: On Nandigram Congress candidate arrest, Congress General Secretary KC Venugopal says, "What is happening in Bengal is completely undemocratic. Our candidate in the by-election will not withdraw the nomination. We will organise protests across the country… pic.twitter.com/RWCKhY5mbG

— ANI (@ANI) September 19, 2026

साथ ही केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए. वेणुगोपाल ने कहा, “इतनी बड़ी घटना घट जाने के बाद भी चुनाव आयोग ने इस मामले पर अब तक एक शब्द भी नहीं कहा है, जो बेहद चिंताजनक है.” भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे देश में भाजपा के खिलाफ केवल कांग्रेस ही मजबूती से लड़ रही है, सीपीआई (एम) जैसी पार्टियां नहीं. उन्होंने जोर देकर कहा, “कांग्रेस कार्यकर्ता तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक भाजपा की तानाशाही राजनीति का अंत नहीं हो जाता. हम 2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराकर रहेंगे.”

क्या कहता है भारत का चुनावी कानून?

भारतीय चुनाव कानून के मुताबिक, केवल किसी मामले में नाम दर्ज होने, एफआईआर होने या पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने से किसी भी नागरिक का चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं छिनता. जब तक अदालत किसी व्यक्ति को दोषी करार न दे दे, तब तक कानून की नजर में वह निर्दोष माना जाता है. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 के तहत चुनाव लड़ने की अयोग्यता के स्पष्ट नियम तय किए गए हैं:

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  • सिर्फ गिरफ्तारी अयोग्यता नहीं: यदि किसी उम्मीदवार पर कोई आपराधिक मामला चल रहा है या वह पुलिस हिरासत में है तो भी वह जेल के भीतर से नामांकन दाखिल कर सकता है और चुनाव लड़ सकता है.
  • दोषी साबित होने पर रोक: कानूनन अयोग्यता केवल तब लागू होती है, जब अदालत किसी प्रत्याशी को किसी अपराध में दोषी ठहरा दे और उसे कम से कम 2 साल या उससे अधिक की जेल की सजा सुना दे.
  • सजा के बाद प्रतिबंध: दोषी साबित होने और सजा सुनाए जाने की स्थिति में वह व्यक्ति तुरंत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है और अपनी सजा पूरी होने के 6 साल बाद तक चुनाव नहीं लड़ सकता.

नंदीग्राम में क्या होगा?

कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान के मामले में अभी केवल गिरफ्तारी हुई है. चूंकि उन्हें किसी अदालत द्वारा दोषी ठहराकर सजा नहीं सुनाई गई है, इसलिए वे कानूनी रूप से नंदीग्राम से चुनाव लड़ने के पूरी तरह पात्र हैं. यदि नामांकन प्रक्रिया के दौरान उनके कागजात सही पाए जाते हैं तो वे जेल में रहकर भी चुनावी मैदान में ताल ठोक सकते हैं.

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