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जब जिद पे आ गई पार्वती… गाना तो सुना होगा, अब जानें सप्तऋषि उन्हें समझाने क्यों पहुंचे थे
Hanuman Ansh Parvati Song: जब जिद पे आ गई पार्वती, समझाने पहुंचे सप्तऋषि...हनुमान अंश के वायरल गीत की इस पंक्ति का क्या अर्थ है? जानें पार्वती की परीक्षा और सप्तऋषियों की पौराणिक कथा.
Written By : Hirdesh Kumar Singh | Updated at : 15 Sep 2026 04:08 PM (IST)

जब जिद पे आ गई पार्वती… गाना तो सुना होगा, अब जानें सप्तऋषि उन्हें समझाने क्यों पहुंचे थे
Source : abplive
Hanuman Ansh Parvati Song: फिल्म 'हनुमान अंश' का बुंदेली भजन पार्वती इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब सुना जा रहा है. इसकी एक पंक्ति, जब जिद पे आ गई पार्वती, समझाने पहुंचे सप्तऋषि, रील और शॉर्ट वीडियो के जरिए लोगों की जुबान पर चढ़ गई है. लेकिन इस पंक्ति के पीछे केवल शिव-पार्वती का प्रेम नहीं, बल्कि माता पार्वती की कठिन परीक्षा से जुड़ी पौराणिक कथा भी छिपी है.
सवाल है कि माता पार्वती किस बात की जिद पर अड़ी थीं और उन्हें समझाने के लिए सप्तऋषियों को क्यों भेजा गया था?
शिव को ही पति बनाने का लिया था संकल्प
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता सती ने अपना शरीर त्यागने के बाद पर्वतराज हिमालय और माता मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया. देवर्षि नारद के मार्गदर्शन पर पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या शुरू की.
भगवान शिव उस समय संसार से विरक्त होकर ध्यान में लीन रहते थे. शरीर पर भस्म, गले में सर्प, जटाओं में गंगा और निवास के लिए कैलाश, उनका स्वरूप किसी राजकुमार जैसा नहीं था. इसके बावजूद पर्वतराज की पुत्री पार्वती ने तय कर लिया था कि वह विवाह करेंगी तो केवल भगवान शिव से.
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समझाने नहीं, परीक्षा लेने पहुंचे थे सप्तऋषि
शिव-पार्वती विवाह की प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव पार्वती की तपस्या और उनके प्रेम की गहराई परखना चाहते थे. इसलिए उन्होंने सप्तऋषियों को पार्वती के पास भेजा. बाहर से देखने पर ऐसा लगा कि सप्तऋषि उन्हें समझाने आए हैं, लेकिन उनका वास्तविक उद्देश्य पार्वती के संकल्प की परीक्षा लेना था.
सप्तऋषियों ने पार्वती के सामने शिव के वैरागी स्वरूप का वर्णन किया. उन्होंने कहा कि शिव शरीर पर भस्म लगाते हैं, गले में सांप पहनते हैं, उनके पास महल नहीं है और उनकी संगति भूत-प्रेतों से है. एक राजकुमारी ऐसे वर के साथ जीवन कैसे बिताएगी?
उन्होंने पार्वती को अपना निर्णय बदलने और भगवान विष्णु जैसे ऐश्वर्यवान वर के बारे में विचार करने की सलाह भी दी. माना जाता है कि यह सब जानबूझकर कहा गया था, ताकि देखा जा सके कि पार्वती शिव के प्रति अपने संकल्प पर टिकी रहती हैं या बाहरी सुख-सुविधाओं के आकर्षण में निर्णय बदल देती हैं.
पार्वती ने सप्तऋषियों को क्या उत्तर दिया?
सप्तऋषियों की बातें सुनने के बाद भी पार्वती का मन नहीं बदला. उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह मन, वचन और कर्म से भगवान शिव को अपना पति स्वीकार कर चुकी हैं. शिव उन्हें स्वीकार करें या उन्हें कई जन्मों तक प्रतीक्षा करनी पड़े, वह अपने संकल्प से पीछे नहीं हटेंगी.
पार्वती का उत्तर सुनकर सप्तऋषि समझ गए कि उनका प्रेम किसी आकर्षण या हठ का परिणाम नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण है. उन्होंने भगवान शिव के पास लौटकर पार्वती के अटल निश्चय की जानकारी दी. इसके बाद शिव ने पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया और दोनों का विवाह संपन्न हुआ.
कौन हैं सप्तऋषि?
सप्तऋषि सात महान वैदिक ऋषियों के समूह को कहा जाता है. वर्तमान मन्वंतर की प्रचलित सूची में महर्षि कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज के नाम आते हैं. हालांकि, अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और मन्वंतरों में इनके नामों की सूची बदलती भी मिलती है.
हनुमान अंश के वायरल गीत की यह पंक्ति इसलिए खास है क्योंकि इसमें पार्वती की जिद वास्तव में प्रेम से कहीं आगे,अटूट विश्वास, तपस्या और अपने निर्णय पर टिके रहने की शक्ति का प्रतीक बन जाती है.
FAQ
सप्तऋषि पार्वती को समझाने क्यों पहुंचे थे?
प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, सप्तऋषि पार्वती के शिव के प्रति प्रेम और उनके संकल्प की परीक्षा लेने पहुंचे थे.
पार्वती किस बात की जिद पर अड़ी थीं?
माता पार्वती ने संकल्प लिया था कि वह भगवान शिव को ही पति के रूप में स्वीकार करेंगी.
सप्तऋषियों के नाम क्या हैं?
वर्तमान मन्वंतर की प्रचलित सूची में कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज के नाम आते हैं. अलग-अलग ग्रंथों में सूची बदल सकती है.
'जब जिद पे आ गई पार्वती' किस फिल्म का गीत है?
यह चर्चित भजन फिल्म ‘हनुमान अंश’ से जुड़ा है और सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल हो रहे हैं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader
'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'
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वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.
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Published at : 15 Sep 2026 03:06 PM (IST)
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