हैदराबाद (उत्तम हिन्दू न्यूज): भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज को घरेलू क्रिकेट के आगामी सत्र के लिए एक बेहद अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन (HCA) ने आधिकारिक घोषणा करते हुए सिराज को रणजी ट्रॉफी सत्र के लिए हैदराबाद की सीनियर टीम का कप्तान नियुक्त किया है। वहीं, तेज गेंदबाज चामा मिलिंद को उप-कप्तान की भूमिका सौंपी गई है। सिराज की अगुआई में हैदराबाद की टीम आगामी 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे टूर्नामेंट के अपने पहले मुकाबले में त्रिपुरा से भिड़ेगी।
एलीट ग्रुप बी में हैदराबाद, कड़ी होगी चुनौती
आगामी रणजी सत्र के लिए हैदराबाद की टीम को एलीट ग्रुप बी में रखा गया है। इस ग्रुप में सौराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम और त्रिपुरा जैसी मजबूत टीमें मौजूद हैं। ऐसे कड़े मुकाबले वाले ग्रुप में मोहम्मद सिराज के सामने न सिर्फ एक कप्तान के तौर पर टीम को आगे ले जाने की जिम्मेदारी होगी, बल्कि एक प्रमुख स्ट्राइक बॉलर के रूप में अपनी पुरानी धार और लय को साबित करने की भी परीक्षा होगी।
श्रीलंका दौरे पर गिरी थी गेंदबाजी की रफ्तार, सिराज ने बताई वजह
हालिया श्रीलंका दौरे पर टेस्ट सीरीज के दौरान मोहम्मद सिराज की गेंदबाजी गति (स्पीड) में आई गिरावट चर्चा का विषय बनी थी। आम तौर पर 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करने वाले सिराज उस दौरे पर कई मौकों पर 130 किमी प्रति घंटे से भी नीचे की स्पीड पर बॉलिंग करते नजर आए थे। दो टेस्ट मैचों के दौरान उन्होंने कुल 44 ओवर फेंके और केवल 4 विकेट चटका पाए थे।
इस गिरावट पर खुलकर बात करते हुए सिराज ने स्वीकार किया कि करीब दो महीने के लंबे ब्रेक के बाद सीधे प्रतिस्पर्धी मुकाबले में उतरने के कारण उनकी लय पर असर पड़ा था। सिराज ने बताया कि वह एक ऐसे गेंदबाज हैं जिनकी गति सीधे तौर पर रन-अप और रिदम पर निर्भर करती है। रन-अप में थोड़ा भी तालमेल बिगड़ने से रफ्तार प्रभावित हो जाती है।
दलीप ट्रॉफी में मिली वापसी की राह, जज्बे को रखा सबसे आगे
श्रीलंका दौरे के तुरंत बाद सिराज ने दलीप ट्रॉफी फाइनल में साउथ जोन की ओर से खेलते हुए अपनी लय हासिल करने के स्पष्ट संकेत दिए। चेन्नई की उमस और गर्मी के बीच लंबी गेंदबाजी करने के दौरान उनकी रिदम वापस लौटी और स्वाभाविक रूप से गेंद की गति में भी इजाफा हुआ।
सिराज ने स्पष्ट किया कि फिटनेस और फॉर्म की चुनौतियों के बावजूद उनके लिए देश का प्रतिनिधित्व करना सबसे बड़ा जुनून है। उन्होंने दो टूक कहा कि जब आप मैदान पर उतरते हैं तो परिस्थितियों या थकान का कोई बहाना नहीं चल सकता, बल्कि खिलाड़ी को हर हाल में अपना शत-प्रतिशत योगदान देना होता है। अब रणजी ट्रॉफी में कप्तानी का यह नया रोल उनकी फॉर्म और नेतृत्व क्षमता दोनों के लिए अहम साबित होगा।
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