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आय से अधिक संपत्ति मामले में कॉटन कॉरपोरेशन के अधिकारी और पत्नी को कोर्ट ने सुनाई कठोर कारावास की सजा

September 12, 2026

आय से अधिक संपत्ति मामले में कॉटन कॉरपोरेशन के अधिकारी और पत्नी को कोर्ट ने सुनाई कठोर कारावास की सजा

तेलंगाना की सीबीआई कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के तत्कालीन कॉटन परचेज ऑफिसर और उनकी पत्नी को दोषी ठहराते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई है.

Published bySuhel Khan

तेलंगाना की सीबीआई कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के तत्कालीन कॉटन परचेज ऑफिसर और उनकी पत्नी को दोषी ठहराते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई है.

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Photograph: (File)

हैदराबाद, तेलंगाना की सीबीआई अदालत ने आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के मामले में कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के तत्कालीन कॉटन परचेज ऑफिसर माजेटी वेंकट भवानी प्रसाद और उनकी पत्नी माजेटी प्रियंका को दोषी करार देते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने 11 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया.

अदालत ने माजेटी वेंकट भवानी प्रसाद को पांच वर्ष के कठोर कारावास (RI) और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. वहीं, उनकी पत्नी माजेटी प्रियंका को चार वर्ष के कठोर कारावास के साथ 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी गई है.

सीबीआई के मुताबिक, इस मामले में 3 नवंबर 2016 को एफआईआर दर्ज की गई थी. जांच में आरोप लगाया गया था कि कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में कॉटन परचेज ऑफिसर के पद पर कार्यरत रहते हुए माजेटी वेंकट भवानी प्रसाद ने अपनी पत्नी की मदद से आय से अधिक संपत्ति अर्जित की.

सीबीआई के अनुसार, 1 जनवरी 2010 से 21 फरवरी 2015 तक की जांच अवधि में आरोपी अधिकारी के नाम और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर करीब 94 लाख 17 हजार 371 रुपये की संपत्ति और वित्तीय संसाधन पाए गए. जांच एजेंसी का आरोप था कि यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से 291.73 प्रतिशत अधिक थी.

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि आरोपी इस संपत्ति और वित्तीय संसाधनों के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके. जांच में उनकी पत्नी की भी कथित भूमिका सामने आई, जिसके बाद उन्हें भी मामले में आरोपी बनाया गया.

मामले की जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 7 मई 2018 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई हुई. ट्रायल के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और निर्धारित सजा सुनाई.

सीबीआई के मुताबिक, यह मामला सरकारी सेवा में रहते हुए ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने से संबंधित था.