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बिनोवा के विचारों में ही समस्याओं का समाधान - Buxar News

September 12, 2026

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संत विनोबा भावे की 132वीं जयंती पर ब्रह्मपुर के गौरी शंकर आश्रम में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डॉ. धर्मेंद्र आचार्य के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों ने आचार्य विनोबा भावे के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की। विनोबा जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ब्रह्मपुर से बक्सर रेलवे स्टेशन तक प्रबोधन यात्रा भी निकाली गई।

आचार्य कुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आचार्य ने कहा कि वे महात्मा गांधी के दर्शन और विचारों के प्रमुख प्रवक्ता व व्याख्याकार थे। उन्होंने गांधीवादी विचारों पर आधारित अनेक प्रयोग किए। इनमें भूदान, ग्रामदान, श्रमदान, संपत्ति दान, शांति सेना और नयी तालीम के साथ-साथ आचार्य कुल की स्थापना शामिल है। विनोबा जी ने अपना पूरा जीवन साधु-संतों की तरह व्यतीत किया। इससे वे पूरे देश में एक संत के रूप में विख्यात हुए। आचार्य कुल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य ओम प्रकाश मिश्र ने बताया कि विनोबा भावे का जन्म 11 सितंबर 1895 को गुजरात के गागोदा में हुआ था। उनका मूल नाम विनायक नरहरि भावे था। एक कुलीन परिवार में जन्मे विनोबा ने वर्ष 1916 में हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद गृह त्याग दिया और काशी (वाराणसी) चले गए। वहां उन्होंने वैदिक पंडितों के सानिध्य में शास्त्रों का गहन अध्ययन किया। विनोबा जी वेद, वेदांत, गीता, रामायण, क़ुरआन और बाइबिल जैसे अनेक धार्मिक ग्रंथों के प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने अर्थशास्त्र, राजनीति और दर्शनशास्त्र के आधुनिक सिद्धांतों का भी गहरा अध्ययन और चिंतन किया था। कोचरब में महात्मा गांधी से हुई मुलाकात

​काशी में अध्ययन के दौरान जब उन्हें महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने और स्वतंत्रता आंदोलन का बिगुल बजाने की जानकारी मिली, तो वे उनसे मिलने अहमदाबाद के कोचरब आश्रम पहुंचे। पहली मुलाकात के समय गांधी जी सब्जी काट रहे थे। देश के इतने बड़े नेता को सहजता से सब्जी काटते देख विनोबा जी अत्यंत प्रभावित हुए और बिना किसी औपचारिक उपदेश के उन्होंने स्वावलंबन और श्रम का सच्चा पाठ सीखा। इस ऐतिहासिक मुलाकात के बाद वे आजीवन बापू के आदर्शों के लिए समर्पित हो गए।

​समारोह में उपस्थित सभी वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में विनोबा भावे के विचार बेहद प्रासंगिक हैं। वर्तमान समाज की अनेक आधुनिक समस्याओं का समाधान उनके दर्शन में निहित है।

​इस अवसर पर बक्सर जिला आचार्य कुल के अध्यक्ष आचार्य अशोक मिश्र, मंत्री डॉ. रवि कुमार, कुमारेन्द्र सिंह, नंदलाल मणि त्रिपाठी, निराला जी, वृन्दावन बिहारी जी, सस्वरूपानंद जी, बालकृष्ण, राघवेन्द्र त्रिपाठी और पीतांबर जी महाराज आदि मौजूद थे।