भारतीय कंपनी से की डील तो रक्षा मंत्री को देना पड़ा इस्तीफा, इस यूरोपीय देश में क्यों मचा हंगामा?
Published: Friday, September 4, 2026, 13:22 [IST]
Estonia Defence Minister Resignation: महज 13 लाख की आबादी वाले यूरोपीय देश एस्टोनिया में रक्षा मंत्री हानो पेवकुर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है। उनके इस्तीफे के पीछे यूक्रेन के लिए तोप के गोले खरीदने से जुड़ी एक विवादित डील को वजह बताया जा रहा है। खास बात यह है कि इस डील में जिस कंपनी का नाम सामने आया है, उसका मालिकाना हक एक भारतीय कंपनी के पास बताया जा रहा है।
डील में गोला-बारूद की सप्लाई में देरी और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद एस्टोनिया में राजनीतिक विवाद बढ़ गया। सरकारी जांच शुरू होने के बाद रक्षा मंत्री पर भी इस्तीफे का दबाव बढ़ता गया।
2022 से रक्षा मंत्री थे हानो पेवकुर
हानो पेवकुर साल 2022 से एस्टोनिया के रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बुधवार देर रात एक टीवी कार्यक्रम में उन्होंने अपने इस्तीफे का ऐलान किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1991 में सोवियत संघ से आजादी के बाद से पेवकुर एस्टोनिया के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले मंत्रियों में शामिल रहे। यूक्रेन युद्ध के दौरान एस्टोनिया की रक्षा नीति और सैन्य सहायता को लेकर भी वह लगातार चर्चा में रहे हैं।
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तोप के गोलों की डील में कैसे फंसा पेंच?
रिपोर्ट के मुताबिक, एस्टोनिया ने 2024 में 155 मिलीमीटर के तोप के गोले खरीदने के लिए इटली में रजिस्टर्ड कंपनी डाटासेल एसआरएल के साथ समझौता किया था। बताया गया कि इस कंपनी का मालिकाना हक भारतीय कंपनी नेको डिफेंस म्यूनिशंस के पास है। विवाद तब बढ़ा जब सवाल उठे कि संबंधित कंपनियों को पहले तोप के गोले बनाने का अनुभव नहीं था। इसके अलावा गोला-बारूद की सप्लाई में देरी और गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें सामने आईं।
EU के पैसों से यूक्रेन के लिए खरीदे जा रहे थे गोले
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया जब यूक्रेन को रूस के खिलाफ युद्ध में बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद की जरूरत थी। यूरोपीय संघ की ओर से यूक्रेन की सैन्य मदद के लिए उपलब्ध कराए गए पैसों से इन 155 मिलीमीटर के तोप के गोलों की खरीद की जा रही थी। उस वक्त यूरोप में इस तरह के गोला-बारूद की भारी कमी थी। एस्टोनिया की रक्षा खरीद एजेंसी ने सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कंपनी को बड़ी रकम एडवांस में भी दी थी।
सरकारी जांच शुरू होने के बाद बढ़ा दबाव
गोला-बारूद की खरीद को लेकर विवाद बढ़ने के बाद एस्टोनिया के सरकारी प्रोसेक्यूटर ऑफिस ने खरीद प्रक्रिया की आपराधिक जांच शुरू कर दी। जांच में डील से जुड़े कई सवालों की पड़ताल की जा रही है। खास तौर पर गोले की सप्लाई में हुई देरी और उनकी कथित गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे। जांच शुरू होने के बाद विपक्ष और अन्य राजनीतिक हलकों की ओर से रक्षा मंत्री हानो पेवकुर पर जिम्मेदारी लेने का दबाव बढ़ता गया।
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भारतीय कंपनी ने आरोपों पर क्या कहा?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जयसवाल नेको इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर रमेश जयसवाल ने डील को लेकर सामने आई खबरों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एस्टोनिया के संबंधित अधिकारियों की गुणवत्ता जांच के बाद ही तोप के गोले भेजे गए थे। उनके मुताबिक, गुणवत्ता जांच के बाद कंपनी को आगे के ठेके भी मिले, लेकिन बाद में पैसों की कमी के चलते उन्हें रोक दिया गया। ऐसे में भारतीय कंपनी ने डील में गुणवत्ता से जुड़े आरोपों पर अपना पक्ष रखा है।