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राघव चड्ढा की राज्यसभा सदस्यता पर संकट? एसआईआर ड्राफ्ट में वोट ‘शिफ्टेड’, आप पर लगाए गंभीर आरोप | raghav-chadha-rajya-sabha-membership-punjab-sir-voter-list-aap

September 3, 2026

चंडीगढ़। पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम 13 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं था। उनका नाम एएसडीडी (Absent, Shifted, Deceased और Duplicate) श्रेणी की सूची में दर्ज किया गया और स्टेटस में उन्हें ‘पर्मानेंटली शिफ्टेड’ बताया गया है। इसके बाद चड्ढा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं, सदस्यता पर क्यों उठ रहे सवाल?

राघव चड्ढा का वोटर आईडी पहले दिल्ली के राजिंदर नगर में दर्ज था, जिसे बाद में पंजाब के मोहाली में स्थानांतरित किया गया था। 2024 के चुनाव में उन्होंने मोहाली में मतदान भी किया था। ऐसे में मौजूदा SIR ड्राफ्ट में उनका नाम नहीं होने को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

हालांकि, यह अंतिम मतदाता सूची नहीं है। SIR के तहत 13 अगस्त से 12 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं। इसके बाद संशोधन की प्रक्रिया पूरी होगी और अक्टूबर में अंतिम मतदाता सूची जारी होने की उम्मीद है।

राघव चड्ढा ने लगाया राजनीतिक बदले का आरोप

चड्ढा ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि उन्हें जानबूझकर मतदाता सूची में ‘शिफ्टेड’ बताया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में शामिल विभिन्न स्तरों पर तैनात अधिकारी पंजाब सरकार के प्रशासनिक ढांचे से जुड़े हैं और उन पर राजनीतिक दबाव हो सकता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद से पार्टी नेतृत्व उनसे नाराज है और उनके खिलाफ सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। चड्ढा ने कहा कि यह महज प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध का मामला प्रतीत होता है।

आप ने आरोपों से किया किनारा

आम आदमी पार्टी का कहना है कि SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और इसमें राज्य सरकार की कोई सीधी भूमिका नहीं है। पार्टी ने चड्ढा के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया है।

चड्ढा ने एसआईआर के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा राज्यसभा सांसद होने के नाते उनका नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है।

फाइनल लिस्ट आने तक तस्वीर साफ नहीं

चड्ढा का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होने से उनकी राज्यसभा सदस्यता को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं, लेकिन फिलहाल इसे अंतिम स्थिति नहीं माना जा सकता। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल होता है या नहीं।

इस पूरे विवाद के बीच पंजाब में SIR प्रक्रिया राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है। खासतौर पर चड्ढा के आरोपों के बाद चुनाव आयोग की प्रक्रिया और राज्य सरकार की भूमिका को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।