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भारत को मिलेगा दुनिया का सबसे खतरनाक हथियार? दिल्ली आने से पहले पुतिन का बड़ा दांव!

September 1, 2026

Putin Modi Meeting: पुतिन के दिल्ली दौरे से पहले रूस ने भारत को S-500 मिसाइल सिस्टम, 5 नए S-400 स्क्वाड्रन और Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट का बड़ा ऑफर दिया है।

India Russia Defence Deal: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही भारत के दौरे पर नई दिल्ली आ रहे हैं। इस दौरे से ठीक पहले बिश्केक में उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई। इस मुलाकात के बीच मॉस्को की तरफ से भारतीय सेना के लिए दो बेहद ताकतवर हथियारों का बड़ा ऑफर सामने आया है। पहला हथियार S-500 प्रोमेथियस (S-500 Prometheus Air Defence System) और दूसरा Su-57 फेलॉन (Su-57 Felon Stealth Fighter) है। ऐसे समय में जब भारत अपनी एयर डिफेंस को और मजबूत करने और फाइटर एयरक्राफ्ट की कमी दूर करने पर काम कर रहा है, रूस का यह प्रस्ताव काफी अहम माना जा रहा है।

पुतिन के पिटारे में क्या खास है?

S-500 प्रोमेथियस (S-500 Prometheus)

रूस इस बार भारत के सामने अपने सबसे आधुनिक और विध्वंसक हथियार रखने की तैयारी में है। S-500 प्रोमेथियस दुनिया का सबसे एडवांस एयर डिफेंस और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है, जो अंतरिक्ष की सीमा तक जाकर दुश्मन की मिसाइलों और सैटेलाइट्स को मार गिराने में सक्षम है।

Su-57 फेलॉन (Su-57 Felon)

यह 5th जनरेशन का स्टेल्थ फाइटर जेट है, जिसे रडार पर पकड़ना लगभग नामुमकिन माना जाता है। Su-57 को स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड सेंसर और आधुनिक हथियारों से लैस फाइटर के तौर पर पेश किया जाता है। स्टेल्थ (Stealth) का मतलब यह है कि एयरक्राफ्ट को दुश्मन के रडार पर आसानी से पकड़ पाना मुश्किल बनाने की कोशिश की जाती है। ऐसे एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल सिर्फ हवा में लड़ाई के लिए नहीं, बल्कि अलग-अलग तरह के कॉम्बैट मिशन (Combat Missions) में किया जा सकता है। रूस के लिए Su-57 सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं है। यह उसके सबसे बड़े डिफेंस एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स में से एक बन सकता है।

पुतिन भारत को क्यों दिखा रहे हैं ये दोनों हथियार?

पिछले साल चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सेना ने रूसी S-400 सिस्टम का जमकर इस्तेमाल किया था। इसी दौरान S-400 ने रिकॉर्ड दूरी से पाकिस्तानी अर्ली-वार्निंग एयरक्राफ्ट को ढेर किया, जिससे इस सिस्टम का भरोसा सेना में और बढ़ गया। इसी भरोसे को भुनाने के लिए रूस ने भारत को S-400 के 5 नए स्क्वाड्रन देने का भी प्रस्ताव भेजा है, जिससे भारत के पास यह सुरक्षा घेरा दोगुना हो सकता है।

भारत के लिए S-500 और Su-57 लेना कितना आसान फैसला

एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसी भी बड़े डिफेंस डील में सिर्फ यह नहीं देखा जाता कि हथियार कितना पावरफुल है। उसकी कीमत, मेंटेनेंस, स्पेयर पार्ट्स, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, लोकर प्रोडक्शन, हथियारों का एकीकरण (Weapons Integration) और लंबे समय की सप्लाई भी उतनी ही जरूरी होती है। भारत के लिए यह भी देखना होगा कि नया रशियन सिस्टम (Russian System) उसके मौजूदा और भविष्य का स्वदेशी रक्षा नेटवर्क (Future Indigenous Defence Network) के साथ कितना आसानी से जुड़ (Integrate) हो सकता है।

भारत के सामने क्या हैं विकल्प?

भारत अपनी वायुसेना और एयर डिफेंस को तुरंत मजबूत तो करना चाहता है, लेकिन वह किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता है। साथ ही, भारत खुद का स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम 'प्रोजेक्ट कुशा' (Project Kusha) भी तैयार कर रहा है, जो S-400 की तरह ही लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम होगा। ऐसे में भारत के लिए यह फैसला कूटनीतिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से काफी अहम होने वाला है।

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