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Ashadh Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या पर कल इस मुहूर्त में होगा स्नान-दान, नोट कर लें सही टाइमिंग

July 13, 2026

Ashadh Amavasya 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है. इसे आषाढ़ी अमावस्या या पितृ अमावस्या भी कहा जाता है. कल यानी 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और पितरों के निमित्त तर्पण या पिंडदान करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है और पितृ दोष शांत होता है.

आषाढ़ अमावस्या 2026 स्नान-दान का शुभ मुहूर्त (Ashadh Amavasya 2026 Snan Daan Shubh Muhurat)

अमावस्या तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान और दान के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना गया है.

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अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त (सुबह): कल 14 जुलाई को सुबह 05 बजकर 32 बजे से लेकर सुबह 08 बजकर 45 बजे तक का समय स्नान और तर्पण के लिए बेहद भाग्यशाली रहेगा.

कुतुप काल: दोपहर 11 बजकर 40 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट बजे तक.

ऐसे करें पितरों का पूजन और तर्पण 

1. इस दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें. यदि ऐसा संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और हाथ में जल लेकर दिन के शुभ कार्यों का संकल्प लें.

2.  स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और लाल फूल डालकर सूर्य देव को ऊं सूर्याय नमः मंत्र के साथ अर्घ्य दें.

3. एक तांबे या कांसे के पात्र में साफ जल लें. उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, जौ, तिल और कुशा डालें. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़े हों और अंगूठे के माध्यम से उस जल को अंजलि (हाथों) से गिराते हुए अपने पितरों का स्मरण करें.

4. पितरों की शांति के लिए कल घर में सात्विक भोजन बनाएं. भोजन तैयार होने के बाद सबसे पहले पांच हिस्से निकालें जैसे गाय, कुत्ता, कौआ, देवादि और चींटियों के लिए. ऐसा करने से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं.

5. तर्पण के बाद किसी योग्य ब्राह्मण को आदरपूर्वक भोजन कराएं और अपनी क्षमता के अनुसार तिल, अन्न, वस्त्र या जल से भरे पात्र का दान करें.

पितृ दोष से मुक्ति के लिए कल शाम को जरूर करें ये काम

पीपल की पूजा 
आषाढ़ अमावस्या पर पीपल के पेड़ में देवताओं और पितरों का वास माना जाता है. कल शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें.

दक्षिण मुखी दीपक 
कल शाम को अपने घर के मुख्य द्वार पर या दक्षिण दिशा के कोने में एक दीपक (तिल या सरसों के तेल का) पितरों के नाम से जरूर जलाएं. इससे पितर खुश होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

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