
IIT दिल्ली स्टूडेंट प्रोटेस्ट
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाॅजी (IIT) दिल्ली के MSc फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार के सुसाइड मामले में दूसरे दिन मंगलवार को भी छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा. तो वहीं IIT प्रशासन ने सुसाइड परिस्थिति की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है. इस बीच TV9 भारतवर्ष से बातचीत में ऋषिकेश कुमार के साथ छात्रों ने उनकी स्टोरी बयां की है. साथ छात्रों का कहना है कि पिता की मौत के बाद से ऋषिकेश कुमार की मेंटल हेल्थ खराब थी. तो वहीं उसके साथी छात्रों के मुताबिक ऋषिकेश कुमार पहले भी सुसाइड की कोशिश कर चुका था.
आइए, पूरा मामला विस्तार से जानते हैं. जानते हैं कि ऋषिकेश कुमार के बारे में साथी छात्रों ने क्या बताया है. जानते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्राें का क्या कहना है.
पिता के निधन के बाद एक महीने तक चला इलाज
IIT दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों ने सुसाइड करने वाले ऋषिकेश कुमार की कहानी बयां की है. प्रदर्शन में शामिल उसके साथियों ने कहा कि पिता के निधन के बाद से ऋषिकेश कुमार की मानसिक सेहत काफी प्रभावित हुई थी.
साथी छात्रों के मुताबिक मार्च 2026 में होली के बाद, करीब 12-13 मार्च को ऋषिकेश कुमार को IIT दिल्ली अस्पताल में लगभग एक सप्ताह के लिए भर्ती कराया गया. इसके बाद उसे दिल्ली के VIMHANS अस्पताल में भेजा गया, जहां करीब एक महीने तक उनका इलाज चला.
इलाज का खर्च उठाना परिवार के लिए मुश्किल भरा रहा
प्रदर्शशनकारी छात्रों ने बताया कि ऋषिकेश कुमार के परिवार के लिए उसका इलाज का खर्च और लंबी अवधि आर्थिक रूप से काफी मुश्किल रही. हालांकि इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ और अस्पताल से मेडिकल फिटनेस क्लियरेंस मिलने के बाद वह IIT वापस लौटा.
सेमेस्टर छोड़ कर घर चला गया था
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि लंबे समय तक इलाज के कारण ऋषिकेश कुमार की पढ़ाई प्रभावित हुई और उसके लिए परीक्षा की तैयारी करना मुश्किल हो गया. ऐसे में उन्होंने सेमेस्टर वापस लेने (Semester Withdrawal) का अनुरोध किया और वह घर चल गया था.
कैंपस वापस लौटे तो हॉस्टल से नाम कट गया
साथी छात्रों के मुताबिक ऋषिकेश कुमार जुलाई के आखिरी सप्ताह में कैंपस लौटा तो पता चला कि हॉस्टल से उसका नाम हटा दिया गया है. तो वहीं सेमेस्टर विड्रॉल के लिए IIT दिल्ली अस्पताल से मेडिकल क्लियरेंस सर्टिफिकेट मांगा गया. छात्रों के मुताबिक, यह शर्त IIT ने पहले से स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई थी. हॉस्टल अलॉटमेंट को लेकर भी विवाद था. शिवालिक हॉस्टल में रूम नहीं मिलने के बाद दूसरे हॉस्टल में भी रूम लेने की कोशिश की. छात्रों के अनुसार, 18 जुलाई को विंध्याचल हॉस्टल के केयरटेकर ने रूम होने की बात कही थी, लेकिन ऋषिकेश कुमार को रूम आवंटित नहीं किया गया.
मां ने साथ रहना शुरू किया
साथी छात्रों का कहना है कि ऋषिकेश कुमार को कैंपस में हॉस्टल नहीं दिया गया. ऐसे में उसे कैंपस से बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा. इस स्थिति में उसकी मां भी उनके साथ रहने लगीं ताकि उन्हें सहयोग मिल सके. छात्रों का आरोप है कि कैंपस से बाहर रहने के कारण ऋषिकेश कुमार अपने दोस्तों से अलग-थलग पड़ गया. छात्रों ने बताया कि ऋषिकेश कुमार की मां ने हॉस्टल के लिए स्टूडेंट अफेयर्स ऑफिस से संपर्क किया.
पहले भी की थी सुसाइड की कोशिश
प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि 6 अगस्त 2026 को ऋषिकेश कुमार की मां ने उनके एक दोस्त को बताया कि ऋषिकेश कुमार ने आत्महत्या का प्रयास किया था. उनकी मां ने संस्थान को भी जानकारी दी थी कि ऋषिकेश कुमार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रहा है और पहले ही आत्महत्या का प्रयास कर चुका है. छात्रों का आरोप है कि इसके बावजूद उसे संस्थान की ओर से पर्याप्त मदद नहीं मिली.
ऋषिकेश कुमार के साथ भेदभाव किया गया
प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, ऋषिकेश कुमार के साथ उसके पुराने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संघर्षों के कारण भेदभाव किया गया. छात्रों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ है, तो इससे दूसरे छात्र मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मदद लेने से डर सकते हैं.
छात्रों ने साथ में प्रोजेक्ट करने से किया इनकार
प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक,ऋषिकेश कुमार को डिग्री पूरी करने के लिए जरूरी प्रोजेक्ट करने थे. समय की कमी और पढ़ाई के नुकसान को देखते हुए वह किसी दूसरे छात्र के साथ मिलकर प्रोजेक्ट करना चाहता था. छात्रों के मुताबिक, उसे चार प्रोजेक्ट के विकल्प मिले थे, इनमें से तीन प्रोजेक्ट में संबंधित छात्रों ने दो छात्रों के साथ प्रोजेक्ट करने से इनकार किया था. चौथे प्रोजेक्ट में सुपरवाइजर ने ऋषिकेश कुमार को लेने से इनकार कर दिया था. छात्रों का आरोप है कि प्रोजेक्ट न मिलने की स्थिति ने उसके मानसिक तनाव को और बढ़ाया.
दोबारा पहले साल से पढ़ना चाहते था ऋषिकेश
छात्रों ने बताया कि ऋषिकेश तीसरे सेमेस्टर को छोड़कर दोबारा पहले वर्ष से पढ़ाई शुरू करना चाहता था. छात्रों के अनुसार, ऋषिकेश से IIT दिल्ली अस्पताल से medically unfit certificate लाने को कहा गया था, अस्पताल के डॉक्टर ने कथित तौर पर ऐसा प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया. इसके चलते ऋषिकेश अपना सेमेस्टर वापस नहीं ले सका.

शालिनी बाजपेयी
शालिनी बाजपेयी टीवी9 भारतवर्ष न्यूज चैनल में सीनियर रिपोर्टर के तौर पर दिल्ली में काम कर रही हैं. टीवी9 भारतवर्ष से 2019 से जुड़ी हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. शिक्षा, स्वास्थ्य और दिल्ली सरकार जैसी अहम बीट को कवर करती हैं. शालिनी ने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक और परास्नातक किया है
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