Mukesh Sahani: विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश में निषाद आरक्षण के मुद्दे को लेकर भाजपा और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद पर तीखा हमला बोला है। फेसबुक लाइव के जरिए उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिला तो समाज भाजपा को वोट नहीं देगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में चल रहे संकल्प यात्रा और रात्रि प्रवास कार्यक्रमों से सत्ता पक्ष में बेचैनी बढ़ी है।
सहनी ने डॉ. संजय निषाद के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने मंत्रालय छोड़ने के बदले निषाद आरक्षण देने की बात कही थी। सहनी ने कहा कि केवल मंत्रालय या सीटों के लिए दबाव बनाने के बजाय उन्हें स्पष्ट रूप से कहना चाहिए कि यदि 2027 से पहले आरक्षण लागू नहीं हुआ तो भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि निषाद समाज अब किसी नेता के कहने पर अपना वोट स्थानांतरित नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि आगरा में हजारों युवाओं ने गंगाजल हाथ में लेकर संकल्प लिया है कि आरक्षण लागू नहीं होने की स्थिति में भाजपा को वोट नहीं देंगे। सहनी ने कहा कि सरकार की ओर से अभियान में रोक-टोक के कारण अब उनकी पार्टी ने ‘प्लान बी’ तैयार किया है। इसके तहत हर गांव, जिले, प्रखंड और क्षेत्र में निषाद समाज के युवा खुद ‘सन ऑफ मल्लाह’ बनकर घर-घर संकल्प अभियान चलाएंगे और इसके वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाएंगे।
सहनी ने डॉ. संजय निषाद से कहा कि वह सत्ता में रहते हुए भी समाज के हित में मजबूत और स्पष्ट रुख अपनाएं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य संजय निषाद को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि समाज की लड़ाई को मजबूत करना है। सहनी ने दावा किया कि दूसरे दलों के अलावा भाजपा में काम करने वाले निषाद समाज के लोग भी उनसे संपर्क कर रहे हैं और आरक्षण के अभियान में सहयोग का भरोसा दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उनका जन्म ही आंदोलन से हुआ है और सत्ता या मंत्री पद उनका अंतिम लक्ष्य नहीं है। सहनी ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी गठन के समय ही उन्होंने ‘आरक्षण नहीं तो भाजपा से गठबंधन नहीं’ का नारा दिया था। उन्होंने कहा कि पद और सत्ता आते-जाते रहते हैं, लेकिन समाज का हित सबसे महत्वपूर्ण है।
मुकेश सहनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि अपने अधिकारों के लिए सवाल करना ‘दिमागी नक्सल’ कहलाता है तो वह गर्व से खुद को दिमागी नक्सल कहेंगे। उन्होंने युवाओं से सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और लोकतांत्रिक तरीके से जवाबदेही तय करने की अपील की।
सहनी ने महंगाई, रोजगार और सरकारी योजनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल मुफ्त राशन या आर्थिक सहायता को विकास का पैमाना नहीं माना जा सकता। युवाओं को रोजगार और परिवारों को स्थायी आर्थिक मजबूती मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के वोट में सरकार बदलने की ताकत होती है और लोगों को मतदान के समय अपने अधिकारों को ध्यान में रखना चाहिए।
सहनी ने जातिगत जनगणना और आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए दावा किया कि आने वाले समय में देश की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा। उन्होंने 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वंचित वर्गों को उनकी आबादी के अनुपात में अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने युवाओं और छात्रों को सरकार से सवाल करने के लिए धन्यवाद दिया। सहनी ने कहा कि उनका अभियान गरीब, पिछड़े और वंचित लोगों को अधिकार दिलाने के लिए है। उन्होंने कहा कि निषाद समाज उनके लिए केवल एक बिरादरी नहीं, बल्कि परिवार है और इसी कारण उन्होंने अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर समाज के हित को रखा है।
मुकेश सहनी ने गन्ने को इथेनॉल में इस्तेमाल किए जाने, चीनी की कीमत और पेट्रोल से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि नीतियों के कारण आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अंत में उन्होंने उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं से अभियान को और तेज करने की अपील करते हुए कहा कि अगले महीने से घर-घर जाकर निषाद आरक्षण के लिए संकल्प अभियान को व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा।