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गड़बड़ी: बेमेतरा में अफसर ने करीबियों को बांट दी आवास सब्सिडी - Raipur News

July 13, 2026

मुख्यमंत्री श्रमिक आवास सहायता योजना में बेमेतरा जिले में 65 लाख रुपए की गड़बड़ी सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ कि जिन लोगों को मजदूर बताकर मकान निर्माण के लिए एक-एक लाख रुपए की सब्सिडी दी गई, वे पहले से पक्के मकानों के मालिक थे। इनमें अधिकांश तत्क

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2023-24 के इस मामले की शिकायत पार्षद नीतू कोठारी ने की थी। कई स्तर की जांच के बाद अतिरिक्त कलेक्टर गुड्डू लाल जगत ने दिसंबर 2025 में सौंपी रिपोर्ट में पाया कि 65 अपात्रों को नियम विरुद्ध अनुदान मिला। मौके के सत्यापन में किसी भी हितग्राही द्वारा नया मकान बनाना नहीं पाया गया।

सभी के पास पहले से मकान थे, जबकि योजना केवल बेघर पंजीकृत श्रमिकों के लिए है। जांच अधिकारी ने इसे 65 लाख का गबन मानते हुए तत्कालीन श्रम पदाधिकारी एनके. साहू से वसूली और निलंबन की सिफारिश की, पर फाइल श्रम विभाग में दब गई। अब विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लगा तो मामला फिर बाहर आ गया।

मामले को लेकर श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता ने बताया कि श्रम आयुक्त कार्यालय से इस मामले की जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा उसे पर कार्रवाई अवश्य होगी।

जांच में भी पुष्टि: श्रम विभाग ने 2024 में भी मामले की जांच कर रिपोर्ट श्रमायुक्त को भेजी थी। उसमें एक ही दिन 29 हितग्राहियों को एक-एक लाख रुपए की सहायता जारी किए जाने को संदेहास्पद बताया गया। जांच में यह भी पाया गया कि अधिकांश आवेदनों में एक जैसे दस्तावेज लगाए गए थे और ग्राम पंचायत की अनिवार्य अनुमति भी संलग्न नहीं थी। इसके बावजूद अनुदान स्वीकृत कर दिया गया।

सब्सिडी बढ़ी तो एक दिन में ही पात्र मुख्यमंत्री श्रमिक आवास सहायता योजना 1 मार्च 2023 से लागू हुई थी। शुरुआत में पात्र श्रमिकों को मकान निर्माण के लिए 50 हजार रुपए की सहायता मिलती थी। शर्त थी कि श्रमिक कम से कम तीन वर्ष से मंडल में पंजीकृत हो, उसके या परिवार के किसी सदस्य के नाम मकान न हो तथा शहरी क्षेत्र में एक हजार और ग्रामीण क्षेत्र में 500 वर्गफीट से अधिक जमीन न हो।

बेमेतरा में 100 से अधिक आवेदन आए, जिनमें 65 आवेदकों को अपात्र मानकर आवेदन निरस्त कर दिए गए। बाद में 20 सितंबर 2023 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सहायता राशि बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दी। इसके बाद इन्हीं 65 आवेदनों को एक ही दिन में स्वीकृत कर राशि जारी कर दी गई।

जांच में ऐसे खुली गड़बड़ी

गणेशराम साहू (ग्राम बाबामोहतरा) : एक हजार वर्गफीट से अधिक का मकान पहले से मिला। रोहित कुमार साहू (बाबामोहतरा) : पहले से मकान था। योजना के तहत दिखाया गया निर्माण ट्यूबवेल कक्ष के रूप में उपयोग हो रहा है। बोधराय साहू (भिलौरी) : निर्धारित सीमा से अधिक जमीन मिली। आवेदन में बताई जमीन से अलग स्थान पर निर्माण पाया गया। अशोक साहू (सरदा) : एक हजार वर्गफीट से अधिक जमीन। पैतृक मकान तोड़कर उसी पर निर्माण को योजना का लाभ बताया। छबिराम साहू (लोलेसरा) : आवेदन में दर्शाए गए खसरे पर पहले से मकान बना मिला और जमीन भी निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई।

सास के नाम ले ली सब्सिडी: श्रम कल्याण निरीक्षक छलेश्वर साहू ने सास सुदामा बाई के नाम से सब्सिडी ले ली। जांच में पाया गया कि वे लखनऊ में रहती हैं। इसके अलावा जितने लोगों को सब्सिडी मिली, उसमें 70% साहू समाज के ही हैं। अधिकतर छलेश्वर के रिश्तेदार व एनके साहू के परिचित हैं।

श्रमिक आवास सहायता योजना में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर जांच कराई गई। सभी लाभार्थियों के मकान पहले से बने हुए थे। जांच में 65 लाख रुपए के गबन की पुष्टि हुई। तत्कालीन अधिकारी से राशि की वसूली और कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई थी।' -गुड्डू लाल जगत, अतिरिक्त कलेक्टर, बेमेतरा

योजना की शुरुआत में पोर्टल त्रुटि थी, इस वजह से गड़बड़ी बताई जा रही है। षडयंत्र कर मुझे फंसाया गया है। मैंने जो भी किया, वह नियमानुसार है। लाभ हितग्राहियों को हुआ है, तो रिकवरी मुझसे क्यों की जाएगी। -एनके साहू, तत्कालीन श्रम पदाधिकारी, बेमेतरा।(अभी धमतरी पदस्थ हैं)