पीलीभीत जिले की बीसलपुर विधानसभा सीट पर जाति, धर्म, स्थानीय नेतृत्व और राजनीतिक विरासत चारों मिलकर चुनावी तस्वीर बनाते हैं। Bisalpur Assembly Caste Equations में मुस्लिम और कुर्मी/गंगवार मतदाता सबसे बड़े सामाजिक समूहों में गिने जाते हैं, जबकि कश्यप, लोध, ब्राह्मण, ठाकुर, मौर्य और अनुसूचित जाति के अलग-अलग समुदाय जीत-हार का संतुलन तय करते हैं। 2022 के क्षेत्रीय चुनावी अनुमान में मुस्लिम मतदाता करीब 60-65 हजार और कुर्मी मतदाता करीब 40-45 हजार बताए गए थे।
बीसलपुर की राजनीति लंबे समय तक दो बड़े राजनीतिक परिवारों के आसपास घूमती रही। 1991 से 2017 के सात विधानसभा चुनावों में चार बार रामसरन वर्मा और तीन बार अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू विधायक बने। 2022 में रामसरन वर्मा के बेटे विवेक कुमार वर्मा ने भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज कर इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। वर्तमान में विवेक कुमार वर्मा ही बीसलपुर के विधायक हैं।
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण / जातीय समीकरण और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 एक ऐसा निर्णायक अवसर है जो राज्य की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा।
उत्तर प्रदेश एसआईआर (SIR) की अंतिम सूची 2026 के तहत राज्य के सभी 75 जिलों में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कुल मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है।
पीलीभीत जिले के बीसलपुर विधानसभा के 2007 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण, ताज़ा अपडेट, चुनावी इतिहास और पिछले चुनावों के नतीजे
उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों का 2007 से 2022 तक तुलनात्मक विश्लेषण, जिसमें प्रत्येक सीट का चुनावी इतिहास, विजेता और उपविजेता प्रत्याशी, मत प्रतिशत, जीत का अंतर और बदलते राजनीतिक समीकरण शामिल हैं।
बीसलपुर विधानसभा एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा | बीसलपुर |
| विधानसभा संख्या | 130 |
| जिला | पीलीभीत |
| आरक्षण | सामान्य |
| लोकसभा क्षेत्र | पीलीभीत |
| वर्तमान विधायक | विवेक कुमार वर्मा |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| 2022 कुल मतदाता | 3,58,345 |
| SIR से पहले मतदाता | करीब 3,65,824 |
| 2026 अंतिम मतदाता सूची | 3,31,914 |
| SIR में हटाए गए नाम | 53,523 |
| SIR में जोड़े गए नाम | 19,613 |
| शुद्ध कमी | 33,910 |
| 2022 विजेता | विवेक कुमार वर्मा, BJP |
| 2022 उपविजेता | दिव्या गंगवार, SP |
| 2022 जीत का अंतर | 50,409 वोट |
| प्रमुख सामाजिक समूह | मुस्लिम, कुर्मी/गंगवार, कश्यप, लोध, ब्राह्मण, मौर्य, जाटव |
बीसलपुर विधानसभा संख्या 130 सामान्य सीट है और वर्तमान में इसका प्रतिनिधित्व भाजपा के विवेक कुमार वर्मा कर रहे हैं। 2026 की अंतिम मतदाता सूची में यहां 3,31,914 मतदाता दर्ज हैं।
Bisalpur Assembly Caste Equations में किसी एक समुदाय का इतना वर्चस्व नहीं है कि बाकी सामाजिक समूह अप्रासंगिक हो जाएं। पुराने विधानसभा स्तरीय चुनावी अनुमान में मुस्लिम मतदाता करीब 60 से 65 हजार और कुर्मी करीब 40 से 45 हजार बताए गए थे। इसके बाद कश्यप मतदाता करीब 20-28 हजार, किसान समूह 20-25 हजार, लोध 15-17 हजार, ब्राह्मण करीब 15 हजार और ठाकुर तथा मौर्य समुदाय करीब 10-12 हजार के स्तर पर बताए गए थे।
इस सामाजिक संरचना के कारण बीसलपुर में किसी पार्टी को जीत के लिए कम से कम तीन-चार बड़े सामाजिक समूहों का समर्थन चाहिए। मुस्लिम और कुर्मी वोट की दिशा महत्वपूर्ण रहती है, लेकिन कश्यप, लोध, मौर्य, सवर्ण और दलित मतदाताओं का संयुक्त झुकाव अक्सर अंतिम बढ़त तय करता है।
बीसलपुर विधानसभा का अनुमानित जातीय समीकरण
| जाति/समुदाय | पुराने क्षेत्रीय अनुमान | चुनावी महत्व |
|---|---|---|
| मुस्लिम | 60-65 हजार | सबसे बड़े एकल सामाजिक समूहों में |
| कुर्मी/गंगवार | 40-45 हजार | सबसे प्रभावशाली OBC वोट |
| कश्यप | 20-28 हजार | बड़ा स्विंग OBC समूह |
| किसान/कृषक समूह* | 20-25 हजार | ग्रामीण और कृषि मुद्दों पर प्रभाव |
| लोध | 15-17 हजार | गैर-यादव OBC राजनीति में महत्वपूर्ण |
| ब्राह्मण | करीब 15 हजार | बड़ा सवर्ण समूह |
| ठाकुर | 10-12 हजार | सवर्ण मतों की दूसरी महत्वपूर्ण धुरी |
| मौर्य | 10-12 हजार | गैर-यादव OBC वोट |
| जाटव | 16-18 हजार | प्रमुख दलित समूह |
| कोरी | 8-10 हजार | SC वोट में महत्वपूर्ण |
| धोबी | करीब 6 हजार | दलित सामाजिक समीकरण का हिस्सा |
| वैश्य | 4-5 हजार | बाजार और व्यापारिक इलाकों में प्रभाव |
| धानुक | करीब 4,500 | कई ग्रामीण बूथों पर असर |
| यादव | करीब 3,500-4,000 | SP के सामाजिक आधार का हिस्सा |
| बढ़ई | करीब 3,000-3,500 | ग्रामीण OBC समूह |
| पासी | करीब 2,800 | अनुसूचित जाति वोट का हिस्सा |
| कुम्हार | करीब 2,500-2,800 | OBC वोट |
| पाल | करीब 2,500-2,800 | OBC वोट |
| नाई | करीब 2,200-2,500 | छोटे लेकिन क्षेत्रवार प्रभावी |
| वाल्मीकि | करीब 2,500 | SC वोट |
| बहेलिया | करीब 2,000 | क्षेत्रीय प्रभाव |
| गुर्जर | करीब 1,500-2,000 | सीमित लेकिन कुछ बूथों पर असर |
| लुहार | करीब 1,500-1,600 | OBC/कारीगर समुदाय |
| स्वर्णकार | करीब 900 | शहरी और बाजार क्षेत्र में उपस्थिति |
| सिख | करीब 4,000-4,500 | किसान राजनीति में प्रभाव |
नोट: विधानसभा स्तर पर जातिवार मतदाताओं की कोई आधिकारिक सरकारी सूची प्रकाशित नहीं होती। ये 2022 के चुनाव से पहले तैयार क्षेत्रीय अनुमान हैं। इनमें ‘किसान’ सामाजिक-आर्थिक श्रेणी है, जो दूसरी जातीय पहचानों से ओवरलैप कर सकती है। इसलिए तालिका की सभी संख्याओं को जोड़कर कुल मतदाता संख्या निकालना उचित नहीं होगा।
2026 Voter List में बीसलपुर के 3,31,914 मतदाता
2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद बीसलपुर विधानसभा की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव हुआ है। अंतिम सूची में बीसलपुर में 3,31,914 मतदाता रह गए। SIR से पहले मतदाता आधार करीब 3,65,824 था। पुनरीक्षण में करीब 53,523 नाम हटाए गए, जबकि 19,613 नए मतदाताओं को जोड़ा गया। इस तरह शुद्ध रूप से 33,910 मतदाताओं की कमी हुई।
यह कमी SIR से पहले के मतदाता आधार की तुलना में करीब 9.27 प्रतिशत बैठती है। जिले की चारों विधानसभाओं को मिलाकर अंतिम मतदाता संख्या 13,50,918 रही।
बीसलपुर में मतदाता संख्या का बदलाव
| चरण | मतदाता/बदलाव |
|---|---|
| 2012 कुल मतदाता | 3,15,152 |
| 2017 कुल मतदाता | 3,48,282 |
| 2022 कुल मतदाता | 3,58,345 |
| SIR से पहले 2025-26 आधार | करीब 3,65,824 |
| SIR में हटाए गए नाम | 53,523 |
| नए जोड़े गए नाम | 19,613 |
| शुद्ध कमी | 33,910 |
| 2026 अंतिम मतदाता सूची | 3,31,914 |
| अनुमानित शुद्ध गिरावट | करीब 9.27% |
2012 में बीसलपुर में 3.15 लाख से कुछ अधिक मतदाता थे। 2017 में यह संख्या बढ़कर 3.48 लाख और 2022 में 3.58 लाख से अधिक हो गई थी। SIR-2026 के बाद पहली बार मतदाता आधार में बड़ा संकुचन दिखाई देता है।
2027 के विधानसभा चुनाव के लिए यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है। 2022 के पुराने जातीय आंकड़ों को जस का तस 2026 की सूची पर लागू करना सही नहीं होगा। अब राजनीतिक दलों के लिए यह देखना ज्यादा जरूरी होगा कि किन बूथों और सामाजिक समूहों में नाम सबसे ज्यादा घटे या नए जुड़े हैं।
मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा एकल चुनावी समूह
पुराने क्षेत्रीय अनुमान में बीसलपुर में मुस्लिम मतदाता करीब 60 से 65 हजार बताए गए थे। इस हिसाब से मुस्लिम मतदाता विधानसभा के सबसे बड़े एकल सामाजिक समूहों में हैं।
बीसलपुर की राजनीति में मुस्लिम वोट का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू इस सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे। उन्होंने 1996, 2002 और 2007 में जीत दर्ज की। 2007 में वह BSP के टिकट पर 45,689 वोट लेकर विधायक बने और भाजपा के रामसरन वर्मा को 4,936 वोट से हराया।
हालांकि पुराने चुनाव बताते हैं कि मुस्लिम वोट अकेले जीत दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। फूल बाबू की सफल राजनीति में दलित और दूसरे सामाजिक समूहों को जोड़ने की रणनीति भी महत्वपूर्ण रही।
2022 में वह BSP के टिकट पर मैदान में थे और 35,983 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे। इस बार मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच चला गया।
कुर्मी-गंगवार वोट 40-45 हजार, दोनों प्रमुख दलों की नजर
बीसलपुर में कुर्मी/गंगवार मतदाताओं की संख्या पुराने चुनावी अनुमान में करीब 40 से 45 हजार बताई गई थी। यह सीट के सबसे बड़े OBC समूहों में है।
2022 में समाजवादी पार्टी ने दिव्या गंगवार को उम्मीदवार बनाया था। उन्हें 70,733 वोट मिले। इससे पहले 2017 में दिव्या गंगवार BSP से चुनाव लड़ चुकी थीं और 45,338 वोट हासिल किए थे।
यानी केवल पार्टी बदलने से उनका वोट करीब 25 हजार बढ़ा। इसमें SP के परंपरागत वोट के साथ गंगवार-कुर्मी समर्थन का हिस्सा भी रहा होगा, हालांकि जातिवार मतदान का आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं होने के कारण इसकी सटीक मात्रा तय नहीं की जा सकती।
2027 में BJP और SP दोनों के लिए गंगवार-कुर्मी वोट बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। जिस दल को इस समुदाय में स्पष्ट बढ़त मिलती है, वह मुकाबले में बड़ा फायदा हासिल कर सकता है।
कश्यप वोट 20-28 हजार का बड़ा स्विंग ब्लॉक
बीसलपुर का एक और महत्वपूर्ण सामाजिक समूह कश्यप मतदाता हैं। पुराने क्षेत्रीय अनुमान में इनकी संख्या करीब 20 से 28 हजार बताई गई थी।
करीब 25 हजार के स्तर का वोट बैंक ऐसी सीट पर बेहद महत्वपूर्ण है जहां अलग-अलग चुनावों में सामाजिक गठबंधन तेजी से बदलते रहे हैं।
कश्यप वोट गैर-यादव OBC राजनीति का हिस्सा है और BJP के लिए पिछले चुनावों में यह महत्वपूर्ण सामाजिक आधार रहा है। दूसरी तरफ SP की PDA रणनीति भी कश्यप सहित छोटे और मध्यम OBC समुदायों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर निर्भर करती है।
अगर 2027 में मुस्लिम और गंगवार वोट का बड़ा हिस्सा विपक्ष के पास जाता है तो कश्यप मतदाताओं की दिशा मुकाबले का संतुलन बदल सकती है।
लोध, मौर्य और दूसरे OBC मिलकर बनाते हैं बड़ा वोट समूह
लोध मतदाता करीब 15-17 हजार और मौर्य समुदाय करीब 10-12 हजार के पुराने अनुमान पर है। इसके अलावा बढ़ई, कुम्हार, पाल, नाई, लुहार और दूसरे OBC समुदाय भी विधानसभा में मौजूद हैं।
अलग-अलग देखने पर इनमें से कई जातियों की संख्या छोटी लगती है, लेकिन संयुक्त रूप से यह बड़ा गैर-यादव OBC आधार बनाती हैं।
BJP की पिछले तीन चुनावों की सफलता में इसी विस्तृत OBC गठबंधन का महत्व दिखाई देता है। दूसरी तरफ SP के लिए 2027 में सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि मुस्लिम और गंगवार आधार के अतिरिक्त छोटे OBC समूहों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाए।
ब्राह्मण और ठाकुर मतदाता भी कम महत्वपूर्ण नहीं
बीसलपुर विधानसभा में पुराने सामाजिक अनुमान के अनुसार करीब 15 हजार ब्राह्मण और 10-12 हजार ठाकुर मतदाता हैं। वैश्य मतदाता भी करीब चार से पांच हजार बताए गए थे।
इन तीनों वर्गों को साथ देखें तो सवर्ण और कारोबारी मतदाताओं का प्रभाव किसी करीबी चुनाव में महत्वपूर्ण हो जाता है।
2012, 2017 और 2022 में भाजपा की लगातार मजबूत स्थिति यह बताती है कि पार्टी केवल OBC आधार पर चुनाव नहीं जीत रही। सवर्ण मतदाताओं का समर्थन भी उसके व्यापक सामाजिक गठबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यह चुनावी नतीजों और सामाजिक संरचना से निकलने वाला राजनीतिक संकेत है।
जाटव-कोरी समेत दलित वोट किस ओर जाएगा?
बीसलपुर विधानसभा में जाटव मतदाता पुराने अनुमान में करीब 16-18 हजार बताए गए थे। कोरी मतदाता आठ से दस हजार, धोबी करीब छह हजार, धानुक करीब 4,500, पासी करीब 2,800 और वाल्मीकि करीब 2,500 बताए गए थे।
यानी अनुसूचित जाति मतदाताओं को संयुक्त रूप से देखें तो यह बड़ा सामाजिक आधार बनता है।
BSP के लिए जाटव मतदाता उसका पारंपरिक आधार रहे हैं। 2022 में बीसलपुर में BSP को 35,983 वोट यानी करीब 15 प्रतिशत मत मिले। राज्य की कई दूसरी सीटों की तुलना में यह BSP का उल्लेखनीय प्रदर्शन था।
अगर 2027 में BSP अपना दलित आधार बनाए रखते हुए मुस्लिम वोट का भी हिस्सा हासिल करती है तो बीसलपुर में त्रिकोणीय मुकाबला बन सकता है।
इसके विपरीत अगर BSP का वोट घटता है तो उसके दलित और मुस्लिम वोट का स्थानांतरण BJP-SP मुकाबले की दिशा बदल सकता है।
2022 में BJP ने 50,409 वोट से जीती बीसलपुर सीट
2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बीसलपुर में बड़ी जीत दर्ज की। विवेक कुमार वर्मा को 1,21,142 वोट मिले। समाजवादी पार्टी की दिव्या गंगवार को 70,733 वोट मिले। भाजपा ने 50,409 वोट के अंतर से सीट जीत ली।
बीसलपुर विधानसभा चुनाव 2022
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| विवेक कुमार वर्मा | BJP | 1,21,142 | 50.55% |
| दिव्या गंगवार | SP | 70,733 | 29.52% |
| अनीस अहमद खां फूल बाबू | BSP | 35,983 | 15.02% |
| नितिन पाठक | निर्दलीय | 2,880 | 1.20% |
| भीमसेन शर्मा | CPI | 1,774 | — |
| शिखा पांडेय | कांग्रेस | 1,382 | — |
| NOTA | — | 1,238 | 0.52% |
| BJP की जीत | — | 50,409 | — |
2022 में मतदान प्रतिशत करीब 66.40 रहा। BJP ने अकेले 50 प्रतिशत से अधिक मत हासिल किए, जबकि SP और BSP मिलाकर करीब 44.5 प्रतिशत के आसपास रहे।
इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि BJP प्रत्याशी बदलने के बावजूद सीट बचाने में सफल रही। चार बार विधायक रहे रामसरन वर्मा की जगह उनके बेटे विवेक कुमार वर्मा मैदान में आए और उन्होंने 50 हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
2017 में रामसरन वर्मा ने 40,996 वोट से जीती थी सीट
2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के रामसरन वर्मा को 1,03,498 वोट मिले थे। कांग्रेस के अनीस अहमद खां फूल बाबू 62,502 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। BSP की दिव्या गंगवार को 45,338 वोट मिले थे।
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| रामसरन वर्मा | BJP | 1,03,498 | 46.43% |
| अनीस अहमद खां फूल बाबू | कांग्रेस | 62,502 | 28.04% |
| दिव्या गंगवार | BSP | 45,338 | 20.34% |
| भीमसेन शर्मा | CPI | 2,451 | 1.10% |
| NOTA | — | 2,301 | 1.04% |
| जीत का अंतर | — | 40,996 | — |
2017 में SP और कांग्रेस का गठबंधन था और सीट कांग्रेस के हिस्से में गई थी। इस वजह से सपा का अलग उम्मीदवार मैदान में नहीं था।
2012 में BJP ने हासिल किए थे करीब 50 प्रतिशत वोट
2012 में भी रामसरन वर्मा ने भाजपा के टिकट पर बड़ी जीत हासिल की थी। उन्हें 1,11,735 वोट मिले थे। कांग्रेस के अनीस अहमद खां को 55,664 और BSP के नीरज गंगवार को 32,098 वोट मिले। SP केवल 15,727 वोट पर रही।
बीसलपुर विधानसभा चुनाव 2012
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| रामसरन वर्मा | BJP | 1,11,735 | 49.71% |
| अनीस अहमद खां फूल बाबू | कांग्रेस | 55,664 | 24.77% |
| नीरज गंगवार | BSP | 32,098 | 14.28% |
| संजीव कनौजिया | SP | 15,727 | 7.00% |
| मोहम्मद साबिर | AITC | 3,960 | 1.77% |
| जीत का अंतर | — | 56,071 | — |
2012 में रामसरन वर्मा की जीत का अंतर 56,071 वोट था। यह बीसलपुर में उनके सबसे मजबूत चुनावों में से एक रहा।
2007 में सिर्फ 4,936 वोट से जीते थे फूल बाबू
2007 का चुनाव वर्तमान बीसलपुर के राजनीतिक इतिहास में सबसे करीबी मुकाबलों में से एक रहा। BSP के अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू को 45,689 वोट मिले, जबकि BJP के रामसरन वर्मा 40,753 वोट पर रहे। BSP की जीत सिर्फ 4,936 वोट से हुई।
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
|---|---|---|
| अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू | BSP | 45,689 |
| रामसरन वर्मा | BJP | 40,753 |
| जीत का अंतर | — | 4,936 |
2008 के परिसीमन के बाद विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं में बदलाव हुआ, इसलिए 2007 और 2012 के बाद के नतीजों की सीधी तुलना करते समय परिसीमन को ध्यान में रखना जरूरी है।
2007 से 2022 तक बीसलपुर विधानसभा का चुनावी इतिहास
| चुनाव | विजेता | पार्टी | वोट | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|
| 2007 | अनीस अहमद खां फूल बाबू | BSP | 45,689 | 4,936 |
| 2012 | रामसरन वर्मा | BJP | 1,11,735 | 56,071 |
| 2017 | रामसरन वर्मा | BJP | 1,03,498 | 40,996 |
| 2022 | विवेक कुमार वर्मा | BJP | 1,21,142 | 50,409 |
इन चार चुनावों में BJP ने तीन बार जीत दर्ज की। 2012 के बाद से पार्टी ने लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते हैं।
एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि समाजवादी पार्टी अब तक बीसलपुर सीट नहीं जीत सकी है। 2022 में पार्टी ने दिव्या गंगवार को उतारकर मुकाबले में दूसरा स्थान जरूर हासिल किया, लेकिन BJP से उसका अंतर 50 हजार से अधिक रहा।
तीन दशक तक रामसरन वर्मा बनाम फूल बाबू रही बीसलपुर की राजनीति
बीसलपुर की राजनीति लंबे समय तक दो नेताओं के बीच केंद्रित रही।
1991 और 1993 में रामसरन वर्मा BJP से जीते। इसके बाद 1996, 2002 और 2007 में अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू लगातार तीन बार विधायक बने। 2012 और 2017 में रामसरन वर्मा ने फिर सीट जीत ली।
इस तरह 1991 से 2017 के बीच हुए सात चुनावों में सिर्फ दो राजनीतिक चेहरों ने सीट पर कब्जा रखा—चार बार रामसरन वर्मा और तीन बार फूल बाबू।
2022 में इस पुराने मुकाबले की अगली पीढ़ी सामने आई। रामसरन वर्मा के बेटे विवेक कुमार वर्मा BJP उम्मीदवार बने, जबकि फूल बाबू BSP से फिर मैदान में थे। विवेक ने चुनाव जीत लिया और फूल बाबू तीसरे स्थान पर रहे।
2024 लोकसभा चुनाव में BJP को बीसलपुर से 30,610 वोट की बढ़त
2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार आंकड़े भी बीसलपुर में BJP की बढ़त दिखाते हैं। पीलीभीत लोकसभा सीट के बीसलपुर विधानसभा खंड में BJP के जितिन प्रसाद को 1,05,364 वोट मिले, जबकि SP के भगवत सरन गंगवार को 74,754 वोट मिले। BJP की बढ़त 30,610 वोट रही।
| प्रत्याशी | पार्टी | बीसलपुर खंड में वोट |
|---|---|---|
| जितिन प्रसाद | BJP | 1,05,364 |
| भगवत सरन गंगवार | SP | 74,754 |
| BJP की बढ़त | — | 30,610 |
2022 विधानसभा चुनाव में BJP की बढ़त 50,409 वोट थी। 2024 लोकसभा चुनाव में यह अंतर घटकर 30,610 रह गया। दोनों चुनावों की प्रकृति अलग है, इसलिए इस बदलाव को सीधे विधानसभा चुनाव का पूर्वानुमान नहीं माना जा सकता, लेकिन विपक्ष के लिहाज से यह महत्वपूर्ण संकेत है।
2022 से 2024 के बीच BJP की बढ़त घटी
| चुनाव | BJP के मुख्य प्रतिद्वंद्वी | BJP की बढ़त |
|---|---|---|
| विधानसभा 2017 | कांग्रेस | 40,996 |
| विधानसभा 2022 | SP | 50,409 |
| लोकसभा 2024, बीसलपुर खंड | SP | 30,610 |
2017 से 2022 के बीच BJP की विधानसभा बढ़त बढ़ी थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा खंड स्तर पर अंतर कम हुआ।
2027 में बड़ा सवाल यही होगा कि यह अंतर विधानसभा चुनाव में फिर बढ़ता है या SP इसे और कम करने में सफल होती है।
SP के लिए मुस्लिम-कुर्मी गठजोड़ सबसे महत्वपूर्ण
बीसलपुर में SP के लिए सबसे अनुकूल संभावित सामाजिक समीकरण मुस्लिम और कुर्मी/गंगवार मतदाताओं का बड़ा हिस्सा एक साथ जोड़ना होगा।
पुराने अनुमान में मुस्लिम 60-65 हजार और कुर्मी करीब 40-45 हजार हैं। दोनों समूह मिलकर कागज पर एक लाख से अधिक का सामाजिक आधार बनाते हैं, हालांकि वास्तविक चुनाव में किसी समुदाय का 100 प्रतिशत वोट किसी एक दल को नहीं मिलता।
2022 में SP ने गंगवार प्रत्याशी के जरिए इसी दिशा में प्रयोग किया था। पार्टी को 70,733 वोट मिले, लेकिन BJP 1.21 लाख से अधिक वोट तक पहुंच गई।
इसलिए 2027 में SP के लिए केवल मुस्लिम-कुर्मी समीकरण पर्याप्त नहीं होगा। उसे कश्यप, मौर्य, लोध और दलित मतदाताओं में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी।
BJP का मजबूत मॉडल: कुर्मी + OBC + सवर्ण + दलित का हिस्सा
BJP ने 2012, 2017 और 2022 तीनों विधानसभा चुनाव लगातार जीते हैं। तीनों चुनावों में उसका वोट 46 से 50 प्रतिशत के बीच या उससे ऊपर रहा।
इसका मतलब यह है कि BJP की जीत किसी एक जाति के बल पर नहीं बनी।
कुर्मी/गंगवार, कश्यप, लोध, मौर्य और दूसरे गैर-यादव OBC के साथ ब्राह्मण-ठाकुर-वैश्य और दलित वोट का हिस्सा मिलकर पार्टी के लिए बड़ा गठबंधन बनाता है।
2027 में BJP के लिए मुख्य चुनौती यही सामाजिक गठबंधन बनाए रखने की होगी। 2026 की नई मतदाता सूची के बाद बूथ स्तर पर हुए बदलाव के कारण पुराने चुनावी प्रबंधन में भी संशोधन करना पड़ेगा।
BSP के हाथ में मुकाबले की तीसरी चाबी
बीसलपुर BSP के लिए पीलीभीत जिले की राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीट रही है। अनीस अहमद खां फूल बाबू यहां से तीन बार विधायक रह चुके हैं। 2022 में भी BSP को 35,983 वोट यानी करीब 15 प्रतिशत मत मिले।
यही BSP को 2027 की लड़ाई में महत्वपूर्ण बनाता है।
अगर BSP अपना जाटव और दूसरा दलित आधार बनाए रखते हुए मुस्लिम मतों में हिस्सेदारी लेती है तो SP का सामाजिक समीकरण कमजोर हो सकता है।
अगर BSP का वोट काफी घटता है तो उसके मतदाताओं का BJP और SP में स्थानांतरण परिणाम पर बड़ा असर डाल सकता है।
50 हजार के 2022 के अंतर को देखते हुए BSP को सिर्फ ‘वोट काटने वाली’ पार्टी कहना पर्याप्त नहीं होगा। मजबूत प्रत्याशी मिलने पर यह मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की क्षमता रखती है।
2027 में कौन से सामाजिक गठबंधन निर्णायक हो सकते हैं?
| संभावित गठबंधन | चुनावी असर |
|---|---|
| कुर्मी + कश्यप + लोध + सवर्ण | BJP का मजबूत मॉडल |
| मुस्लिम + कुर्मी/गंगवार | SP के लिए सबसे बड़ा अवसर |
| मुस्लिम + कुर्मी + दलित का हिस्सा | BJP को सीधी चुनौती |
| दलित + मुस्लिम | BSP मजबूत होने पर त्रिकोणीय मुकाबला |
| कश्यप + मौर्य + लोध | बड़ा गैर-यादव OBC स्विंग वोट |
| ब्राह्मण + ठाकुर + वैश्य | सवर्ण वोट की महत्वपूर्ण धुरी |
| जाटव + कोरी + धोबी + धानुक | दलित मतों का महत्वपूर्ण समूह |
| किसान + OBC | स्थानीय कृषि मुद्दों पर चुनाव बदल सकता है |
प्रत्याशी की जाति 2027 में फिर होगी महत्वपूर्ण
बीसलपुर में टिकट वितरण का प्रभाव सामाजिक समीकरण पर सीधे पड़ता है।
2022 में BJP ने अपने चार बार के विधायक रामसरन वर्मा की जगह उनके बेटे विवेक वर्मा को टिकट दिया। SP ने दिव्या गंगवार को उतारा और BSP ने तीन बार के पूर्व विधायक फूल बाबू पर भरोसा किया। यानी तीनों प्रमुख उम्मीदवारों के पीछे अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक विरासत मौजूद थी।
2027 में भी अगर BJP और SP दोनों कुर्मी/गंगवार सामाजिक आधार को ध्यान में रखकर टिकट तय करते हैं तो इस वोट का बंटवारा मुकाबले को प्रभावित करेगा।
वहीं किसी मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार की मौजूदगी विपक्षी वोट में नया समीकरण बना सकती है। BSP का प्रत्याशी किस समुदाय से आता है, यह भी BJP-SP की रणनीति पर असर डालेगा।
2026 की नई Voter List बदलेगी बूथवार चुनावी गणना
2026 में बीसलपुर के मतदाता 3,31,914 रह गए हैं। SIR के दौरान 53,523 नाम हटे और 19,613 नए नाम जुड़े। इस तरह पुराने मतदाता आधार से करीब 33,910 की शुद्ध कमी हुई।
यह संख्या छोटी नहीं है।
2022 में BJP ने 50,409 वोट से चुनाव जीता था और 2024 लोकसभा चुनाव में BJP की विधानसभा-खंड बढ़त 30,610 वोट थी। मतदाता सूची में हुई 33,910 की शुद्ध कमी इन दोनों चुनावी अंतरों के बीच बैठती है। इसलिए बूथवार बदलाव 2027 की रणनीति में महत्वपूर्ण होगा।
इसका मतलब यह नहीं कि हटे हुए सभी मतदाता किसी एक पार्टी या समुदाय के थे। ऐसी कोई आधिकारिक जातिवार या पार्टीवार जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन राजनीतिक दलों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि किन क्षेत्रों में मतदाता आधार सबसे ज्यादा बदला।
बीसलपुर में 2027 का चुनाव किन पांच सवालों से तय होगा?
2027 में बीसलपुर के जातीय समीकरण का पहला बड़ा सवाल मुस्लिम मतदाताओं की दिशा होगी। करीब 60-65 हजार के पुराने अनुमान के साथ यह सबसे बड़े सामाजिक समूहों में है।
दूसरा सवाल करीब 40-45 हजार कुर्मी/गंगवार मतदाताओं का है। इस समुदाय में BJP और SP दोनों की मजबूत दावेदारी रहेगी।
तीसरा बड़ा सवाल कश्यप, लोध और मौर्य जैसे गैर-यादव OBC मतदाताओं का है। इनका संयुक्त वोट किसी भी बड़े मुस्लिम-कुर्मी समीकरण को संतुलित कर सकता है।
चौथा सवाल दलित वोट का है। जाटव, कोरी, धोबी, धानुक, पासी और वाल्मीकि मतदाता BJP, SP और BSP में किस अनुपात में बंटते हैं, इससे मुकाबला बदल सकता है।
पांचवां सवाल प्रत्याशी और राजनीतिक विरासत का है। बीसलपुर लंबे समय तक रामसरन वर्मा और फूल बाबू के बीच घूमती रही है। 2022 में रामसरन वर्मा की अगली पीढ़ी के रूप में विवेक कुमार वर्मा ने सीट संभाली। 2027 में अगर पार्टियां नए चेहरे उतारती हैं तो पुराना सामाजिक समीकरण भी नए सिरे से बन सकता है।
Bisalpur Assembly Caste Equations में फिलहाल BJP के पास लगातार तीन विधानसभा जीत और 2024 लोकसभा चुनाव की विधानसभा-खंड बढ़त का फायदा है। दूसरी तरफ SP के लिए मुस्लिम-कुर्मी समीकरण के साथ कश्यप, मौर्य, लोध और दलित मतदाताओं में सेंध लगाने की गुंजाइश मौजूद है। BSP का लगभग 15 प्रतिशत रहा 2022 का वोट इसे तीसरा महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाता है। 2026 की नई मतदाता सूची के बाद 2027 की वास्तविक लड़ाई इस बात से तय होगी कि कौन-सा दल पुराने जातीय आधार को नए बूथवार मतदाता गणित से सबसे बेहतर तरीके से जोड़ पाता है
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