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दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास के नए सिलेबस से दिल्ली सल्तनत का पेपर हटा, प्रोफेसरों ने उठाए सवाल
- Authored by: भावना किशोर
- Updated Aug 14, 2026, 09:51 AM IST
दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के पोस्टग्रेजुएट कोर्स के नए सिलेबस को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नए पाठ्यक्रम के अंतिम संस्करण में दिल्ली सल्तनत के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण पेपर शामिल नहीं किया गया है। इससे इतिहास विभाग के कुछ शिक्षकों के बीच सवाल उठ रहे हैं।
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दिल्ली यूनिवर्सिटी
दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के पोस्टग्रेजुएट कोर्स के नए सिलेबस को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नए पाठ्यक्रम के अंतिम संस्करण में दिल्ली सल्तनत के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण पेपर शामिल नहीं किया गया है। इससे इतिहास विभाग के कुछ शिक्षकों के बीच सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, “The Delhi Sultanate: Structures of Authority in Medieval North India” नाम का पेपर पहले तीसरे सेमेस्टर में पढ़ाया जाता था। इस पेपर में मध्यकालीन उत्तर भारत में राज्य के गठन, सत्ता के इस्तेमाल और उस दौर में हुए राजनीतिक एवं सामाजिक बदलावों का अध्ययन कराया जाता था।
इसके अलावा तीसरे सेमेस्टर से “उत्तर भारत का इतिहास (1400-1550)” नाम का पेपर भी हटा दिया गया है। नए अंतिम सिलेबस में प्राचीन भारत से जुड़े कुछ अन्य विषय भी नजर नहीं आ रहे हैं। इनमें प्राचीन भारत में जेंडर और महिलाओं का इतिहास, प्राचीन भारत में राजनीतिक व्यवस्था तथा प्राचीन साहित्य में धर्म और समाज जैसे पेपर शामिल हैं।
प्रोफेसरों ने उठाए सवाल
इतिहास विभाग के एक प्रोफेसर के अनुसार, दिल्ली सल्तनत से जुड़ा पेपर कई दशकों से मध्यकालीन भारतीय इतिहास के अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उनका कहना है कि पोस्टग्रेजुएट स्तर पर पढ़ाया जाने वाला दिल्ली सल्तनत और उत्तर भारत का इतिहास जैसे पेपर UG स्तर के विषयों से अलग और अधिक विशेष अध्ययन पर आधारित हैं।
ऐसे में इन विषयों को अंतिम सिलेबस से हटाए जाने को लेकर अकादमिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल विश्वविद्यालय की ओर से इन पेपरों को अंतिम सिलेबस में शामिल न किए जाने के कारणों पर विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
38 प्रस्तावित पेपर में से 16 ही शामिल
बताया गया है कि इतिहास विभाग की ओर से कुल 38 DSE (Discipline Specific Elective) पेपर प्रस्तावित किए गए थे। हालांकि, तीसरे सेमेस्टर के अंतिम सिलेबस में इनमें से सिर्फ 16 पेपर शामिल किए गए हैं।
रिकॉर्ड के मुताबिक, सिलेबस को मंजूरी देने की प्रक्रिया के दौरान कई पेपर पास भी हुए थे, लेकिन 7 अगस्त को जारी अंतिम नोटिफिकेशन में उन्हें जगह नहीं मिली। वहीं कुछ अन्य पेपर अभी भी “चर्चा के तहत” या “चर्चा नहीं हुई” की स्थिति में बताए जा रहे हैं।
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भावना किशोरauthor
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।
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