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Badaun Assembly Caste Equations: बदायूं में मुस्लिम-OBC वोट का गणित 2027

August 12, 2026

Badaun Assembly Caste Equations में मुस्लिम मतदाता सबसे बड़े सामाजिक समूहों में हैं, जबकि यादव, अनुसूचित जाति, वैश्य, ब्राह्मण, लोधी, मौर्य, शाक्य और दूसरे गैर-यादव OBC समुदाय सीट का राजनीतिक संतुलन तय करते हैं। उपलब्ध सामाजिक प्रोफाइल में मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी करीब 29.80 प्रतिशत और अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 16.08 प्रतिशत बताई जाती है। यादव भी बड़ा और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली समुदाय है। भाजपा 2017 और 2022 में लगातार दो विधानसभा चुनाव जीत चुकी है और 2019 तथा 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बदायूं विधानसभा खंड से आगे रही। वहीं 2026 SIR में करीब 69.12 हजार मतदाताओं की नेट कमी, लगभग 18.10 प्रतिशत, दर्ज होने के बाद सीट का नया मतदाता आधार करीब 3.13 लाख के आसपास बैठता है।

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण / जातीय समीकरण और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 एक ऐसा निर्णायक अवसर है जो राज्य की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा।

उत्तर प्रदेश एसआईआर (SIR) की अंतिम सूची 2026 के तहत राज्य के सभी 75 जिलों में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कुल मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

बदायूं जिले के बदायूं विधानसभा के 2007  से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण, ताज़ा अपडेट, चुनावी इतिहास और पिछले चुनावों के नतीजे

उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों का 2007 से 2022 तक तुलनात्मक विश्लेषण, जिसमें प्रत्येक सीट का चुनावी इतिहास, विजेता और उपविजेता प्रत्याशी, मत प्रतिशत, जीत का अंतर और बदलते राजनीतिक समीकरण शामिल हैं।

बदायूं विधानसभा संख्या 115 सामान्य यानी अनारक्षित सीट है और बदायूं लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसमें बदायूं नगर के साथ कुंवरगांव, वजीरगंज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं, जिससे सीट का चरित्र जिले की दूसरी ग्रामीण सीटों की तुलना में अधिक अर्ध-शहरी हो जाता है। वर्तमान विधायक भाजपा के महेश चंद्र गुप्ता हैं। उन्होंने 2022 में समाजवादी पार्टी के रईस अहमद को 11,179 वोट से हराया था। भाजपा को 1,01,096 और सपा को 89,917 वोट मिले थे।

बदायूं विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभाबदायूं
विधानसभा संख्या115
जिलाबदायूं
लोकसभा क्षेत्रबदायूं
आरक्षण स्थितिसामान्य
वर्तमान विधायकमहेश चंद्र गुप्ता
पार्टीभारतीय जनता पार्टी
2026 मतदाता आधारकरीब 3.13 लाख
SIR में नेट कमीकरीब 69.12 हजार
SIR में कमी18.10%
2024 कुल मतदाता3,81,571
2022 विजेतामहेश चंद्र गुप्ता, BJP
2022 उपविजेतारईस अहमद, SP
2022 जीत का अंतर11,179 वोट
2024 लोकसभा में BJP वोट1,02,952
2024 लोकसभा में SP वोट87,386
2024 BJP बढ़त15,566 वोट
ग्रामीण हिस्साकरीब 61.09%
शहरी हिस्साकरीब 38.91%
प्रमुख सामाजिक समूहमुस्लिम, यादव, SC, वैश्य, ब्राह्मण, लोधी, मौर्य, शाक्य

2024 लोकसभा चुनाव के समय बदायूं विधानसभा में 3,81,571 मतदाता थे। 2026 के SIR सारांश में करीब 69.12 हजार मतदाताओं की 18.10 प्रतिशत नेट कमी दर्ज की गई है। पुराने आधार और कमी के अनुपात से नई मतदाता संख्या लगभग 3.12 से 3.13 लाख के बीच बैठती है। इसलिए इस लेख में 2026 मतदाता आधार को करीब 3.13 लाख रखा गया है।

Badaun Assembly Caste Equations की सबसे पहली बड़ी धुरी मुस्लिम मतदाता हैं। सीट के सामाजिक प्रोफाइल में उनकी हिस्सेदारी करीब 29.80 प्रतिशत बताई जाती है। अनुसूचित जाति करीब 16.08 प्रतिशत है। यादव मतदाताओं की भी बड़ी और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मौजूदगी है। इसके साथ ब्राह्मण, वैश्य, लोधी, मौर्य, शाक्य और दूसरे OBC समूह सीट के अलग-अलग हिस्सों में महत्वपूर्ण हैं।

निर्वाचन आयोग विधानसभा की मतदाता सूची को जाति या धर्म के आधार पर प्रकाशित नहीं करता। इसलिए मुस्लिम, यादव, वैश्य, लोधी, मौर्य या शाक्य मतदाताओं की किसी निश्चित संख्या को 2026 का आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। जातीय हिस्सेदारी चुनावी और सामाजिक संकेत हैं, जबकि 2026 की आधिकारिक निर्वाचक नामावली का वास्तविक उपयोग कुल और बूथवार मतदाताओं के लिए किया जाना चाहिए।

बदायूं विधानसभा का संकेतात्मक जातीय समीकरण

जाति/समुदायसंकेतात्मक स्थिति2027 में महत्व
मुस्लिमकरीब 29.80%सबसे बड़ा सामाजिक ब्लॉक, SP-BSP समेत विपक्ष के लिए अहम
अनुसूचित जातिकरीब 16.08%BJP, SP और BSP तीनों के लिए निर्णायक
यादवबड़ा और प्रभावशाली OBC समूहSP का मजबूत परंपरागत आधार
वैश्यबदायूं शहर में महत्वपूर्णBJP के शहरी सामाजिक आधार में अहम
ब्राह्मणप्रमुख सवर्ण समूहBJP समेत सभी दलों की नजर
लोधीमहत्वपूर्ण गैर-यादव OBCBJP की सामाजिक रणनीति में अहम
मौर्यप्रभावशाली OBCBJP-SP दोनों के लिए स्विंग समूह
शाक्यमहत्वपूर्ण गैर-यादव OBC2024 के बाद राजनीतिक महत्व और बढ़ा
अन्य OBCकश्यप, पाल व दूसरे समूहग्रामीण बूथों पर परिणाम बदल सकते हैं
2026 मतदाता आधारकरीब 3.13 लाख

बदायूं की जातीय संरचना की खास बात यह है कि लगभग 30 प्रतिशत मुस्लिम हिस्सेदारी के बावजूद भाजपा लगातार दो चुनाव जीत चुकी है। इसका अर्थ है कि गैर-मुस्लिम सामाजिक समूहों का बड़ा हिस्सा भाजपा के पक्ष में एकजुट होने के साथ उसे अन्य वर्गों से भी पर्याप्त समर्थन मिलता रहा है। दूसरी तरफ सपा के लिए मुस्लिम मतों के साथ यादव और गैर-यादव OBC के वोट जोड़ना जरूरी है।

मुस्लिम वोट करीब 30 प्रतिशत, फिर भी सीट BJP के पास क्यों?

बदायूं विधानसभा में मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी करीब 29.80 प्रतिशत का अनुमान इसे जिले की उन सीटों में रखता है जहां मुस्लिम मतदाता किसी भी चुनावी रणनीति के केंद्र में रहते हैं। लेकिन 2017 और 2022 के चुनाव बताते हैं कि केवल मुस्लिम मतों की बड़ी संख्या किसी विपक्षी प्रत्याशी की जीत की गारंटी नहीं है।

2012 में सपा ने मुस्लिम प्रत्याशी आबिद रजा खान को मैदान में उतारा था। उन्हें 62,786 वोट मिले और उन्होंने भाजपा के महेश चंद्र गुप्ता को 15,413 मतों से हराया। बसपा के रामसेवक सिंह को भी 44,643 वोट मिले थे। उस समय विपक्षी और सामाजिक वोट कई हिस्सों में बंटा था, लेकिन सपा सबसे आगे निकल गई।

2017 में भाजपा ने तस्वीर बदल दी। महेश चंद्र गुप्ता को 87,314 वोट, सपा के आबिद रजा खान को 70,847 और बसपा को 32,641 वोट मिले। भाजपा 16,467 मत से जीत गई।

2022 में सपा ने रईस अहमद को टिकट दिया। उनका वोट बढ़कर 89,917 हो गया, लेकिन भाजपा भी बढ़कर 1,01,096 तक पहुंच गई। भाजपा 11,179 वोट से सीट बचाने में सफल रही।

इसलिए 2027 में मुस्लिम मतों की दिशा जितनी महत्वपूर्ण होगी, उतना ही महत्वपूर्ण यह होगा कि भाजपा के मुकाबले गैर-भाजपा वोट कितने हिस्सों में बंटते हैं।

यादव मतदाता SP की दूसरी मजबूत धुरी

बदायूं विधानसभा में यादव समुदाय की आधिकारिक जाति-वार संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन मौजूदा सामाजिक प्रोफाइल यादवों को बड़े और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली समुदायों में रखता है। बदायूं जिले और लोकसभा क्षेत्र की समाजवादी राजनीति में यादव नेतृत्व लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है।

सपा के लिए मुस्लिम और यादव मतदाताओं का संभावित गठजोड़ मजबूत शुरुआती आधार तैयार करता है। फिर भी 2017 और 2022 की हार बताती है कि यह आधार अकेले पर्याप्त नहीं है।

2022 में सपा को 89,917 वोट मिले। भाजपा को उससे 11,179 अधिक मत मिले। यदि सपा 2027 में यादव-मुस्लिम आधार के साथ मौर्य, शाक्य, लोधी और अनुसूचित जाति के मतदाताओं में अतिरिक्त समर्थन हासिल करती है, तभी भाजपा के दो चुनावों के विजय क्रम को चुनौती देना आसान होगा।

2024 लोकसभा चुनाव में पूरे बदायूं संसदीय क्षेत्र से सपा जीती, लेकिन बदायूं विधानसभा खंड में भाजपा फिर आगे रही। यह सपा के लिए खास संकेत है कि लोकसभा सीट जीतने वाला व्यापक गठजोड़ भी बदायूं सदर विधानसभा में भाजपा की बढ़त खत्म नहीं कर पाया।

अनुसूचित जाति करीब 16.08 प्रतिशत, BSP कमजोर हुई तो किसे लाभ?

बदायूं विधानसभा में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 16.08 प्रतिशत बताई जाती है। इतनी बड़ी सामाजिक संख्या दो मुख्य दलों के बीच 10-15 हजार वोट के अंतर वाले मुकाबले में निर्णायक हो सकती है।

बसपा के पिछले चुनावी प्रदर्शन को देखें तो उसका वोट लगातार कम हुआ है।

2012 में बसपा को 44,643 वोट मिले।

2017 में यह घटकर 32,641 रह गया।

2022 में बसपा के राजेश कुमार सिंह को 23,135 वोट मिले।

बदायूं में BSP का प्रदर्शन

वर्षBSP वोट
201244,643
201732,641
202223,135

बसपा के सभी वोटों को अनुसूचित जाति वोट नहीं माना जा सकता, लेकिन उसके घटते चुनावी प्रदर्शन से दलित मतों के भीतर पुनर्गठन की गुंजाइश दिखाई देती है।

2022 में बसपा के 23,135 वोट भाजपा की 11,179 वोट की जीत के अंतर से दोगुने से अधिक थे। इसलिए 2027 में BSP मजबूत होती है या और कमजोर—दोनों स्थितियां भाजपा और सपा के समीकरण को प्रभावित करेंगी।

वैश्य वोट और बदायूं शहर की राजनीति

बदायूं सदर जिले की दूसरी सीटों की तुलना में अधिक शहरी है। विधानसभा की करीब 38.91 प्रतिशत आबादी शहरी है, जबकि लगभग 61.09 प्रतिशत क्षेत्र ग्रामीण प्रकृति का है। बदायूं शहर व्यापार, थोक मंडी, सरकारी कार्यालयों, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन का जिला केंद्र है। इस कारण वैश्य और कारोबारी मतदाता सीट की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं।

मौजूदा विधायक महेश चंद्र गुप्ता स्वयं वैश्य सामाजिक पृष्ठभूमि से आते हैं। 2007, 2017 और 2022 में उनकी जीत ने भाजपा को इस सीट पर मजबूत शहरी-सवर्ण और कारोबारी आधार दिया है। किसी प्रत्याशी के पूरे वोट को उसकी जाति से जोड़ना उचित नहीं होगा, लेकिन उम्मीदवार की सामाजिक स्वीकार्यता शहरी सीटों पर टिकट चयन में महत्वपूर्ण रहती है।

2027 में भाजपा यदि मौजूदा विधायक को दोबारा मैदान में उतारती है या नया प्रत्याशी चुनती है, दोनों स्थितियों में वैश्य और शहरी व्यापारी वोट उसके चुनावी गणित का अहम हिस्सा रहेगा।

ब्राह्मण वोट पर BJP की पकड़ और SP की सेंध की कोशिश

ब्राह्मण मतदाता भी बदायूं विधानसभा के महत्वपूर्ण सवर्ण समूहों में शामिल हैं। आधिकारिक जाति-वार संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन सीट के सामाजिक प्रोफाइल में ब्राह्मण समुदाय को उल्लेखनीय राजनीतिक ताकत माना गया है।

भाजपा के लिए ब्राह्मण, वैश्य और दूसरे सवर्ण मतदाताओं का व्यापक समर्थन उसके गैर-यादव OBC और दलित समर्थन के साथ एक मजबूत आधार बनाता है।

सपा के लिए चुनौती इस वोट को पूरी तरह भाजपा के खाते में जाने से रोकना होगी। यदि भाजपा-सपा का अंतर 2022 की तरह 10-12 हजार वोट के भीतर रहता है तो सवर्ण मतों में कुछ प्रतिशत का बदलाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

लोधी, मौर्य और शाक्य वोट 2027 का असली OBC रणक्षेत्र

बदायूं विधानसभा में लोधी, मौर्य और शाक्य तीनों महत्वपूर्ण गैर-यादव OBC समूह हैं। इनकी ताजा विधानसभा-स्तरीय आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन मौजूदा सामाजिक प्रोफाइल में इन्हें प्रभावशाली समुदायों में शामिल किया गया है।

भाजपा के लिए यह वर्ग खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि यादव मतदाताओं में सपा की मजबूत मौजूदगी के मुकाबले पार्टी गैर-यादव OBC सामाजिक गठजोड़ पर निर्भर रहती है।

2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बदायूं से शाक्य प्रत्याशी उतारा। बदायूं विधानसभा खंड में भाजपा को 1,02,952 वोट मिले, जबकि सपा के यादव प्रत्याशी को 87,386 वोट मिले। भाजपा 15,566 मत आगे रही।

इसे केवल शाक्य बनाम यादव मतदान का परिणाम नहीं माना जा सकता, लेकिन इतना जरूर है कि 2027 में मौर्य-शाक्य-लोधी सहित गैर-यादव OBC मतदाता दोनों मुख्य दलों की रणनीति के केंद्र में रहेंगे।

2022 में BJP को 46 प्रतिशत से ज्यादा वोट

2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा के महेश चंद्र गुप्ता ने 1,01,096 वोट और 46.12 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया। सपा के रईस अहमद को 89,917 वोट यानी करीब 41.02 प्रतिशत मिले। बसपा 23,135 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रही।

बदायूं विधानसभा चुनाव 2022

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट शेयर
महेश चंद्र गुप्ताBJP1,01,09646.12%
रईस अहमदSP89,91741.02%
राजेश कुमार सिंहBSP23,13510.56%
रजनी सिंहकांग्रेस2,2351.02%
NOTA1,3920.64%
उस्मान गद्दीVIP7060.32%
BJP की जीत11,179 वोट

2022 में भाजपा और सपा के बीच वोट शेयर का अंतर करीब 5.1 प्रतिशत था। 2017 की तुलना में सपा ने अपना वोट काफी बढ़ाया, लेकिन भाजपा ने भी अपना वोट एक लाख से ऊपर पहुंचा दिया।

यह बताता है कि 2027 में यदि मुकाबला फिर BJP-SP के बीच केंद्रित रहता है, तो छोटे सामाजिक स्विंग का महत्व बढ़ जाएगा।

2017 में BJP ने SP से वापस छीनी सीट

2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के महेश चंद्र गुप्ता को 87,314 वोट मिले। सपा के तत्कालीन विधायक आबिद रजा खान को 70,847 और बसपा को 32,641 मत मिले। भाजपा की जीत का अंतर 16,467 वोट रहा।

बदायूं विधानसभा चुनाव 2017

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट शेयर
महेश चंद्र गुप्ताBJP87,31441.04%
आबिद रजा खानSP70,84733.30%
भूपेंद्र सिंहBSP32,64115.34%
रामसेवक सिंह पटेलशिवसेना14,5766.85%
NOTA1,5090.71%
BJP की जीत16,467 वोट

2017 में सपा और बसपा को मिले वोट अलग-अलग रहे। 2022 में बसपा कमजोर हुई और मुख्य मुकाबला अधिक स्पष्ट रूप से भाजपा-सपा के बीच केंद्रित हो गया।

2012 में SP के आबिद रजा खान ने जीती थी सीट

2012 विधानसभा चुनाव में सपा के आबिद रजा खान ने 62,786 वोट हासिल किए। भाजपा के महेश चंद्र गुप्ता को 47,373 और बसपा के रामसेवक सिंह को 44,643 वोट मिले। सपा की जीत का अंतर 15,413 वोट था।

बदायूं विधानसभा चुनाव 2012

प्रत्याशीपार्टीवोट
आबिद रजा खानSP62,786
महेश चंद्र गुप्ताBJP47,373
रामसेवक सिंहBSP44,643
फखरे अहमदकांग्रेस12,424
माधवी साहूजनक्रांति पार्टी11,227
भूपेंद्र सिंहमहान दल6,850
SP की जीत15,413 वोट

2012 का परिणाम मुस्लिम और समाजवादी आधार की ताकत दिखाता है, लेकिन साथ ही बसपा के 44 हजार से अधिक वोट यह बताते हैं कि उस समय विपक्षी सामाजिक समूहों में बड़ा बंटवारा था।

2007 में BJP के महेश चंद्र ने दर्ज की थी जीत

2007 विधानसभा चुनाव में भाजपा के महेश चंद्र को 36,403 वोट मिले। सपा के विमल कृष्ण अग्रवाल उर्फ पप्पी को 29,205 और बसपा के खालिद परवेज को 24,513 वोट मिले। भाजपा ने 7,198 वोट से जीत दर्ज की।

बदायूं विधानसभा चुनाव 2007

प्रत्याशीपार्टीवोट
महेश चंद्रBJP36,403
विमल कृष्ण अग्रवाल उर्फ पप्पीSP29,205
खालिद परवेजBSP24,513
फखरे अहमद शोबीकांग्रेस16,526
BJP की जीत7,198 वोट

2007 में जीत का अंतर कम था और वोट चार प्रमुख दलों में बंटे थे। 2022 तक चुनावी तस्वीर काफी बदल गई और भाजपा-सपा दोनों 90 हजार से एक लाख वोट के स्तर पर पहुंच गए।

बदायूं विधानसभा चुनाव 2007-2022 का तुलनात्मक इतिहास

वर्षविजेतापार्टीवोटउपविजेताजीत का अंतर
2007महेश चंद्रBJP36,403विमल कृष्ण अग्रवाल, SP7,198
2012आबिद रजा खानSP62,786महेश चंद्र गुप्ता, BJP15,413
2017महेश चंद्र गुप्ताBJP87,314आबिद रजा खान, SP16,467
2022महेश चंद्र गुप्ताBJP1,01,096रईस अहमद, SP11,179

पिछले चार विधानसभा चुनावों में भाजपा तीन और सपा एक बार जीती है। मौजूदा विधायक स्वयं इनमें तीन बार विजेता रहे हैं। इस लिहाज से बदायूं सदर में भाजपा की स्थानीय संगठनात्मक और प्रत्याशी आधारित पकड़ दोनों दिखाई देती हैं।

2024 लोकसभा चुनाव में BJP को 15,566 वोट की बढ़त

2024 बदायूं लोकसभा चुनाव पूरे संसदीय क्षेत्र में समाजवादी पार्टी ने जीता, लेकिन बदायूं विधानसभा खंड में भाजपा आगे रही। भाजपा प्रत्याशी को यहां 1,02,952 वोट मिले, जबकि सपा को 87,386 वोट मिले। भाजपा की बढ़त 15,566 वोट रही।

बदायूं विधानसभा खंड: लोकसभा चुनाव 2024

प्रत्याशी/पार्टीवोट
BJP1,02,952
SP87,386
BJP की बढ़त15,566

पूरे बदायूं संसदीय क्षेत्र में सपा को 5,01,855 और भाजपा को 4,66,864 वोट मिले तथा सपा ने 34,991 वोट से लोकसभा सीट जीती। लेकिन विधानसभा-खंड स्तर पर बदायूं सदर भाजपा की मजबूत सीट बनी रही।

यह 2027 के लिए भाजपा का सबसे महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत है।

2014 में SP आगे, 2019 से BJP का पलटवार

बदायूं विधानसभा खंड के पिछले चार लोकसभा चुनाव अलग-अलग राजनीतिक चरण दिखाते हैं।

2009 में कांग्रेस ने बसपा पर 12,005 वोट की बढ़त बनाई थी।

2014 में समाजवादी पार्टी भाजपा से 7,804 वोट आगे रही।

2019 में भाजपा ने स्थिति पलटकर सपा पर 14,151 वोट की बढ़त बना ली।

2024 में यह बढ़त बढ़कर 15,566 वोट हो गई।

बदायूं विधानसभा खंड का लोकसभा ट्रेंड

लोकसभा चुनावविधानसभा खंड का प्रमुख रुझान
2009कांग्रेस +12,005
2014SP +7,804
2019BJP +14,151
2024BJP +15,566

लोकसभा और विधानसभा चुनावों को सीधे एक समान नहीं माना जा सकता, लेकिन 2017 विधानसभा से लेकर 2024 लोकसभा तक बदायूं सदर में भाजपा की निरंतर बढ़त एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पैटर्न है।

2026 की नई वोटर लिस्ट: करीब 69 हजार की नेट कमी

बदायूं विधानसभा में मतदाताओं की संख्या पिछले दशक में लगातार बढ़ी थी।

2012 में 3,13,196 मतदाता थे।

2017 में संख्या बढ़कर 3,53,550 हुई।

2019 में 3,63,823

2022 में 3,76,111

2024 में 3,81,571 मतदाता दर्ज थे।

2026 SIR के बाद तस्वीर बदल गई। सीटवार सारांश में बदायूं में करीब 69.12 हजार की नेट कमी, यानी 18.10 प्रतिशत, दर्ज हुई। इससे नया मतदाता आधार करीब 3.13 लाख के आसपास बैठता है।

बदायूं विधानसभा में मतदाताओं का ट्रेंड

वर्षकुल मतदाता
20123,13,196
20173,53,550
2019 लोकसभा3,63,823
2022 विधानसभा3,76,111
2024 लोकसभा3,81,571
2026 SIRकरीब 3.13 लाख

2024 के मुकाबले मतदाता आधार में करीब 69 हजार का बदलाव 2022 की भाजपा जीत के 11,179 वोट और 2024 की विधानसभा-खंड बढ़त 15,566 वोट—दोनों से कई गुना बड़ा है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी पार्टी के 69 हजार वोट कम हो गए हैं। मतदाता सूची में बदलाव को किसी जाति, धर्म या राजनीतिक दल से जोड़ने का कोई आधार नहीं है। लेकिन सभी दलों के लिए 2027 की बूथ रणनीति अब नई सूची के अनुसार बनानी होगी।

करीब 39 प्रतिशत शहरी आबादी से बदल जाता है जातीय गणित

बदायूं विधानसभा की करीब 38.91 प्रतिशत आबादी शहरी है। जिले की दूसरी कई विधानसभा सीटों की तुलना में यह बड़ा शहरी आधार है। यही कारण है कि यहां केवल ग्रामीण जातीय समीकरण चुनाव तय नहीं करता।

बदायूं शहर जिला मुख्यालय होने के कारण सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, व्यापारी, छोटे कारोबारी, परिवहन क्षेत्र, निजी संस्थानों से जुड़े परिवार और शहरी मध्यम वर्ग भी बड़ी संख्या में मतदाता हैं।

इस वर्ग के लिए जातीय पहचान के साथ सड़क, ट्रैफिक, जल निकासी, पेयजल, सफाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार और नागरिक सुविधाएं मतदान के स्वतंत्र कारक बन सकती हैं।

इसलिए बदायूं सदर में किसी भी पार्टी को ग्रामीण और शहरी—दो अलग राजनीतिक रणनीतियां बनानी पड़ती हैं।

ग्रामीण इलाकों में किसान और OBC वोट की अलग भूमिका

विधानसभा का करीब 61.09 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण है। यहां गेहूं, धान, गन्ना, आलू और मेंथा की खेती प्रमुख है। डेयरी, पशुपालन और कृषि आधारित व्यवसाय भी ग्रामीण परिवारों की आय से जुड़े हैं।

ग्रामीण क्षेत्र में लोधी, मौर्य, शाक्य, यादव, दलित और दूसरे किसान समुदायों के लिए सिंचाई, खाद-बीज, बिजली, ग्रामीण सड़क, फसल मूल्य और मंडी तक पहुंच जैसे मुद्दे जातीय पहचान के साथ समानांतर चलते हैं।

सलारपुर विकासखंड को 2026 में आकांक्षात्मक विकासखंड योजना में शामिल कर कृषि एवं संबद्ध सेवाओं के लिए ₹1.50 करोड़ स्वीकृत किए गए। इसमें कृषि एवं डिजिटल सेंटर, बीज भंडारण और किसानों के लिए सभागार जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं।

इस तरह किसान वोट पर विकास परियोजनाओं का असर भी 2027 में देखने को मिल सकता है।

₹54 करोड़ के सड़क कार्य BJP के विकास एजेंडे में

जुलाई 2026 में बदायूं सदर विधानसभा में विभिन्न सड़क और ग्रामीण विकास कार्यों के लिए करीब ₹54 करोड़ के काम जनता को समर्पित करने की बात सामने आई। इसमें संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण और आंगनबाड़ी केंद्र जैसे कार्य शामिल थे।

शहर के भीतर भी विधायक निधि से करीब ₹55 लाख की लागत से कई सीसी सड़कें और गलियों के सुधार का काम स्वीकृत हुआ। इसके साथ रोडवेज बस स्टैंड के विकास, पथ प्रकाश और प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण पर काम जारी रहने की जानकारी सामने आई।

भाजपा 2027 में इन कामों को मौजूदा विधायक के विकास रिपोर्ट कार्ड के रूप में सामने रख सकती है।

विपक्ष के लिए चुनौती यह होगी कि वह शहर के ट्रैफिक, जर्जर सड़क, जल निकासी, स्वास्थ्य, रोजगार और दूसरी अधूरी समस्याओं के आधार पर सत्ता विरोधी मत तैयार करे।

रोजगार, ट्रैफिक और जल निकासी शहरी वोट के बड़े मुद्दे

बदायूं शहर का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन उसके साथ ट्रैफिक, पार्किंग, जल निकासी और भीड़ वाली सड़कों की समस्या भी बढ़ी है। स्वास्थ्य और शिक्षा की जिला स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद बेहतर विशेषज्ञ सेवाओं और रोजगार के अधिक अवसरों की मांग बनी रहती है।

शहरी मतदाताओं के लिए 2027 में मुख्य सवाल केवल यह नहीं होगा कि प्रत्याशी किस जाति का है, बल्कि यह भी होगा कि पिछले पांच वर्षों में शहर में सड़क, सीवर, स्ट्रीट लाइट, यातायात, रोजगार और व्यापारिक सुविधाओं में कितना सुधार हुआ।

38 प्रतिशत से अधिक शहरी हिस्सेदारी वाली सीट पर ये मुद्दे राजनीतिक दलों के पारंपरिक जातीय समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।

BJP का 2027 का संभावित सामाजिक फॉर्मूला

भाजपा लगातार दो विधानसभा और दो लोकसभा-खंड मुकाबलों में बदायूं सदर से आगे रही है।

पार्टी का संभावित सामाजिक फॉर्मूला इस तरह देखा जा सकता है—

वैश्य + ब्राह्मण + गैर-यादव OBC + SC का हिस्सा + शहरी वोट + यादव-मुस्लिम में सीमित सेंध

मौजूदा विधायक की वैश्य सामाजिक पहचान और पार्टी का सवर्ण-व्यापारी आधार शहरी क्षेत्र में उसे मजबूती देता है।

ग्रामीण हिस्से में लोधी, मौर्य, शाक्य और दूसरे गैर-यादव OBC समुदायों की एकजुटता भाजपा के लिए महत्वपूर्ण होगी। अनुसूचित जाति के करीब 16 प्रतिशत सामाजिक आधार में भी पार्टी को पर्याप्त हिस्सेदारी चाहिए।

2022 में 46.12 प्रतिशत वोट और 2024 विधानसभा खंड में 15,566 वोट की बढ़त भाजपा को मजबूत शुरुआती स्थिति देती है।

SP के लिए मुस्लिम-यादव आधार से आगे बढ़ना जरूरी

सपा का संभावित सामाजिक फॉर्मूला हो सकता है—

मुस्लिम + यादव + SC का हिस्सा + मौर्य/शाक्य/लोधी में सेंध + कुछ सवर्ण वोट

मुस्लिम आबादी करीब 29.80 प्रतिशत होने और यादवों की बड़ी मौजूदगी के कारण सपा का शुरुआती सामाजिक आधार मजबूत दिखाई देता है। लेकिन 2017, 2022 और 2024 के नतीजे बताते हैं कि इसे जीत में बदलने के लिए गैर-यादव OBC और दलित मतदाताओं का समर्थन जरूरी है।

2022 में सपा 89,917 वोट तक पहुंची, लेकिन भाजपा एक लाख का आंकड़ा पार कर गई।

सपा के लिए 2027 में टिकट चयन बेहद महत्वपूर्ण होगा। ऐसा उम्मीदवार जो मुस्लिम आधार को एकजुट रखने के साथ यादव, दलित और गैर-यादव OBC मतदाताओं में स्वीकार्य हो, भाजपा को कड़ी चुनौती दे सकता है।

BSP के 23 हजार वोट दोनों बड़े दलों के लिए अहम

बदायूं विधानसभा पर बसपा का वोट पिछले तीन चुनावों में लगातार घटा है, लेकिन 2022 में भी उसे 23,135 वोट मिले।

भाजपा की जीत का अंतर 11,179 था।

इसलिए बसपा का वोट जीत के अंतर से दोगुना रहा।

यदि BSP मजबूत दलित या मुस्लिम-OBC सामाजिक स्वीकार्यता वाला उम्मीदवार उतारती है तो वह विपक्षी वोटों में बड़ा हिस्सा ले सकती है।

अगर उसका वोट और गिरता है तो सवाल यह होगा कि पुराने दलित, मुस्लिम या दूसरे समर्थक भाजपा और सपा में किस अनुपात में जाते हैं।

यही कारण है कि 2027 में बसपा की स्थिति बदायूं सदर के परिणाम पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकती है।

2026 की नई वोटर लिस्ट ने बदल दिया पुराने बूथों का गणित

बदायूं में 2024 तक 3,81,571 मतदाता थे।

2026 SIR में नेट कमी — करीब 69.12 हजार

कमी — 18.10 प्रतिशत

नया मतदाता आधार — करीब 3.13 लाख

यह बदलाव बेहद बड़ा है।

2022 BJP की जीत — 11,179 वोट

2024 BJP लोकसभा बढ़त — 15,566 वोट

SIR नेट कमी — करीब 69 हजार मतदाता

इसलिए 2022 या 2024 के बूथों के आधार पर सीधे 2027 का अनुमान निकालना ठीक नहीं होगा।

जिस बूथ को पहले मुस्लिम बहुल, यादव प्रभाव वाला, वैश्य प्रधान, दलित बहुल या मौर्य-शाक्य प्रभाव वाला माना जाता था, वहां मतदाता संख्या नई सूची में बदल चुकी हो सकती है।

वास्तविक चुनावी संगठन के लिए 2026 की अंतिम बूथवार सूची ही सबसे महत्वपूर्ण डेटा होगी।

2027 में किन सामाजिक समूहों पर सबसे ज्यादा नजर?

पहला और सबसे बड़ा समूह मुस्लिम मतदाता हैं। करीब 29.80 प्रतिशत का सामाजिक हिस्सा उन्हें स्वतंत्र रूप से बहुत बड़ी चुनावी शक्ति बनाता है।

दूसरा, यादव मतदाता। सपा के लिए यह मजबूत परंपरागत आधार है।

तीसरा, अनुसूचित जाति। करीब 16.08 प्रतिशत का आधार भाजपा, सपा और बसपा तीनों के लिए महत्वपूर्ण है।

चौथा, वैश्य और शहरी कारोबारी वोट। मौजूदा विधायक की राजनीतिक ताकत में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

पांचवां, मौर्य, शाक्य और लोधी मतदाता। 2027 की असली OBC लड़ाई इन्हीं गैर-यादव पिछड़े समूहों के भीतर होगी।

छठा, ब्राह्मण और दूसरे सवर्ण मतदाता। भाजपा को अपने मौजूदा गठजोड़ को बनाए रखने के लिए इनके मजबूत समर्थन की जरूरत रहेगी।

सातवां, बसपा का वोट। 20 हजार से अधिक का आधार किसी करीबी चुनाव का परिणाम बदल सकता है।

बदायूं विधानसभा चुनाव 2027 का जातीय गणित क्या संकेत देता है?

बदायूं विधानसभा की हालिया राजनीतिक तस्वीर को एक साथ रखें तो आंकड़े इस तरह दिखाई देते हैं—

चुनावी संकेतस्थिति
2007 विधानसभाBJP +7,198
2012 विधानसभाSP +15,413
2017 विधानसभाBJP +16,467
2022 विधानसभाBJP +11,179
2014 लोकसभा खंडSP +7,804
2019 लोकसभा खंडBJP +14,151
2024 लोकसभा खंडBJP +15,566
2024 मतदाता3,81,571
2026 मतदाता आधारकरीब 3.13 लाख
SIR नेट कमीकरीब 69.12 हजार

इन आंकड़ों में फिलहाल भाजपा की बढ़त दिखाई देती है। पार्टी ने पिछले दो विधानसभा चुनाव जीते हैं और पिछले दो लोकसभा चुनावों में भी बदायूं विधानसभा खंड में आगे रही है।

लेकिन Badaun Assembly Caste Equations भाजपा के लिए आसान या पूरी तरह सुरक्षित सीट की तस्वीर नहीं बनाते।

करीब 29.80 प्रतिशत मुस्लिम आबादी और बड़ा यादव सामाजिक आधार समाजवादी पार्टी को मजबूत शुरुआती गणित देता है। अनुसूचित जाति के करीब 16.08 प्रतिशत मतदाता तीसरी बड़ी धुरी हैं। मौर्य, शाक्य, लोधी, वैश्य और ब्राह्मण मतदाताओं का रुख अंतिम परिणाम में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

भाजपा के लिए सबसे बड़ी ताकत उसका पिछले चार बड़े चुनावों का लगातार सकारात्मक प्रदर्शन और मौजूदा विधायक का संगठनात्मक आधार है। 2022 में पार्टी एक लाख से ज्यादा वोट हासिल कर चुकी है।

सपा के लिए सबसे बड़ा अवसर मुस्लिम-यादव आधार है, लेकिन पार्टी को गैर-यादव OBC और अनुसूचित जाति के मतदाताओं में 2022 से ज्यादा समर्थन हासिल करना होगा।

बसपा के लिए दलित और मुस्लिम वोटों में पुरानी पकड़ वापस पाने की चुनौती है। यदि बसपा मजबूत होती है तो सपा का समीकरण ज्यादा प्रभावित हो सकता है, लेकिन उम्मीदवार की सामाजिक पृष्ठभूमि के अनुसार भाजपा के वोट पर भी असर पड़ सकता है।

इसके ऊपर 2026 में करीब 69 हजार मतदाताओं की नेट कमी ने बूथवार चुनावी गणित बदल दिया है। पुराने जाति आधारित संख्या अनुमानों को नई वोटर लिस्ट से मिलाए बिना 2027 की तस्वीर अधूरी रहेगी।

जातीय समीकरण के साथ शहर की सड़कें, ट्रैफिक, जल निकासी, रोडवेज, स्वास्थ्य, रोजगार, ग्रामीण सड़क, किसान, सिंचाई और कृषि सुविधाएं भी चुनावी एजेंडे का हिस्सा रहेंगी। 2026 में सड़क और ग्रामीण विकास पर बड़े बजट के काम आगे बढ़े हैं, जिन्हें भाजपा अपने विकास रिकॉर्ड के रूप में पेश कर सकती है, जबकि विपक्ष अधूरी नागरिक और रोजगार संबंधी समस्याओं को मुद्दा बना सकता है।

यानी बदायूं विधानसभा चुनाव 2027 को केवल मुस्लिम बनाम गैर-मुस्लिम या BJP बनाम SP की सीधी लड़ाई के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। असली फैसला मुस्लिम वोट की एकजुटता, यादव समर्थन, अनुसूचित जाति मतों का बंटवारा, वैश्य-ब्राह्मण शहरी वोट, मौर्य-शाक्य-लोधी जैसे गैर-यादव OBC समूहों का रुख, बसपा की ताकत, प्रत्याशी की सामाजिक स्वीकार्यता, शहरी विकास का रिपोर्ट कार्ड और 2026 की नई मतदाता सूची के बूथवार बदलाव मिलकर करेंगे।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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