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Hartalika Teej 2026 Date : हरतालिका तीज का व्रत किस दिन रखा जाएगा? जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

August 11, 2026

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि दो दिन पड़ने के कारण हरतालिका तीज की सही तारीख को लेकर संशय बना हुआ है। शास्त्रों में उदयातिथि के महत्व को देखते हुए इस साल 14 सितंबर 2026 को ही यह व्रत रखा जाएगा।

Hartalika Teej 2026 Date : भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन बेहद मायने रखता है, क्योंकि वे पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। व

हीं, कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना के साथ यह नियम निभाती हैं।

इस बार तृतीया तिथि की शुरुआत और समाप्ति के समय को लेकर लोगों के मन में थोड़ी उलझन है कि व्रत 13 सितंबर को रखा जाए या 14 सितंबर को।

13 या 14 सितंबर: किस दिन रखें व्रत?

पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026 की सुबह से शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह तक रहेगी। सनातन परंपरा में किसी भी व्रत या त्योहार की तिथि तय करने के लिए उदयातिथि (सूर्योदय के समय रहने वाली तिथि) का विचार किया जाता है।

14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि मौजूद रहेगी। इसलिए शास्त्र सम्मत नियम के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार के दिन ही रखा जाएगा। इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करना फलदायी रहेगा।

हरतालिका तीज का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने अन्न-जल का त्याग करके बीहड़ जंगल में ध्यान लगाया था। उनकी सच्ची निष्ठा देखकर महादेव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

मान्यता है कि जो भी महिला इस दिन पूरे नियम और श्रद्धा से व्रत रखती है, उसके दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और खुशहाली बनी रहती है।

पूजा की आसान विधि

प्रातः स्नान और संकल्प: व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर निर्जला व्रत का संकल्प लें।

मिट्टी की प्रतिमा बनाना: शाम के समय पूजा स्थान को साफ करें और बालू या शुद्ध मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की छोटी प्रतिमाएं बनाएं।

पूजा सामग्री अर्पित करना: शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते और आंकड़े के फूल चढ़ाएं। माता पार्वती को सुहाग की वस्तुएं जैसे सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और लाल चुनरी अर्पित करें।

कथा और जागरण: धूप-दीप जलाकर हरतालिका तीज की कथा सुनें या पढ़ें। रात के समय भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना शुभ माना जाता है।

पारण का तरीका: अगले दिन सुबह अंतिम पूजा और आरती करने के बाद जल ग्रहण करके व्रत का पारण करें।

सेहत का रखें ध्यान

अगर आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, डायबिटीज है या आप गर्भवती हैं, तो निर्जला उपवास शुरू करने से पहले डॉक्टर या घर के बुजुर्गों से सलाह जरूर लें।

जरूरत पड़ने पर फलाहार के साथ भी पूजा का नियम पूरा किया जा सकता है।