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पेरेंटिंग की कोई किताब नहीं सिखा सकती ये बातें, अपने अनुभव से सीखते हैं पेरेंट्स

August 8, 2026

लाइफस्टाइल

पेरेंटिंग की कोई किताब नहीं सिखा सकती ये बातें, अपने अनुभव से सीखते हैं पेरेंट्स

  • Authored by: सुनीत सिंह
  • Updated Aug 8, 2026, 10:36 AM IST

Paremting: पेरेंटिंग में कोई अंतिम परीक्षा नहीं होती और न ही कोई ऐसा दिन आता है, जब आप कह सकें कि अब सब सीख लिया। हर उम्र के साथ बच्चे बदलते हैं और माता-पिता भी।

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अपने अनुभव से कौन सी बातें सीखते हैं पेरेंट्स (Photo: iStock)

Parenting: बच्चे के जन्म के साथ ही माता-पिता का भी जन्म होता है। इसके साथ शुरू होती है सही परवरिश की चुनौती। आज बाजार में पेरेंटिंग पर सैकड़ों किताबें हैं। इंटरनेट पर हजारों वीडियो और एक्सपर्ट्स की सलाह भी मिल जाती है। फिर भी परवरिश का सही मतलब अनुभव से ही समझ आता है। समय के साथ माता-पिता कुछ ऐसी बातें सीखते हैं, जो किसी गाइडबुक में नहीं लिखी होतीं:

प्यार बराबर होता है, एक जैसा नहीं

अगर घर में दो या उससे ज्यादा बच्चे हैं, तो माता-पिता जल्दी समझ जाते हैं कि हर बच्चे की जरूरतें अलग होती हैं। किसी बच्चे को ज्यादा समय चाहिए, किसी को ज्यादा भरोसा और किसी को ज्यादा भावनात्मक सहारा। इसीलिए प्यार जताने का तरीका अलग होता है।

अपराधबोध हर माता-पिता का साथी है

अच्छे माता-पिता भी कई बार सोचते हैं कि कहीं उन्होंने गलती तो नहीं कर दी। क्या उन्हें बच्चे के साथ और समय बिताना चाहिए था? क्या उन्होंने ज्यादा डांट दिया? यह अपराधबोध यह दिखाता है कि आप अपने बच्चे की परवाह करते हैं और बेहतर माता-पिता बनने की कोशिश कर रहे हैं।

प्यार करना आसान है, धैर्य रखना मुश्किल

सारे पेरेंट्सअपने बच्चे से प्यार करते हैं। असली चुनौती तब आती है, जब बच्चा जिद करता है, गुस्सा करता है या आपकी बात नहीं मानता। ऐसे समय में शांत रहना, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना और सोच-समझकर प्रतिक्रिया देना ही पेरेंटिंग की असली परीक्षा होती है।

स्थायी नहीं कोई तरीका

जो तरीका तीन साल के बच्चे के साथ काम करता है, वह 13 साल के किशोर के साथ शायद बिल्कुल काम न करे। बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, उनकी भावनाएं, जरूरतें और सोच बदलती रहती हैं। इसलिए अच्छे माता-पिता भी समय के साथ खुद को बदलना सीखते हैं।

बच्चों से मिलता है बड़ा सबक

माना जाता है कि माता-पिता बच्चों को सिखाते हैं। लेकिन सच यह है कि बच्चे भी अपने व्यवहार से बहुत कुछ सिखाते हैं। कई माता-पिता कहते हैं कि बच्चे के आने के बाद उन्होंने खुद को नए तरीके से समझना शुरू किया।

परफेक्ट जैसा कुछ नहीं होता

हर समय सही फैसला लेना संभव नहीं है। बच्चे ऐसे माता-पिता नहीं चाहते जो कभी गलती न करें। उन्हें ऐसे माता-पिता चाहिए जो गलती होने पर उसे स्वीकार करें, माफी मांग सकें और उससे सीखने का साहस रखें। यही ईमानदारी बच्चों को भी बेहतर इंसान बनाती है।

पेरेंटिंग में कोई अंतिम परीक्षा नहीं होती और न ही कोई ऐसा दिन आता है, जब आप कह सकें कि अब सब सीख लिया। हर उम्र के साथ बच्चे बदलते हैं और माता-पिता भी। इसलिए खुद पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने के बजाय इस सफर को सीखने की प्रक्रिया की तरह अपनाइए।

पेरेंटिंग केवल बच्चे की परवरिश नहीं है। यह माता-पिता के भीतर भी बदलाव लाती है। यह आपको ज्यादा धैर्यवान, संवेदनशील और जिम्मेदार बनाती है। कई बार बच्चा बड़ा होने से पहले माता-पिता को बड़ा बना देता है। यही इस सफर की सबसे खूबसूरत बात है।

Suneet Singh

सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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