Updated: Saturday, August 8, 2026, 10:36 [IST]
CJP Leaders Slam Supreme Court Justice: सुप्रीम कोर्ट में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की एक याचिका पर हुई सुनवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। महुआ ने एक आपराधिक मामले में पुलिस के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि पिछली बार पुलिस स्टेशन जाने के दौरान उन पर अंडे फेंके गए थे, इसलिए दोबारा भीड़ के बीच जाने पर सुरक्षा का खतरा है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए राजनीति में आने के बाद अंडों से डरने की बात कही और स्वतंत्रता सेनानियों का उदाहरण दिया। महुआ की याचिका वापस लिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। अब इस टिप्पणी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने जस्टिस दत्ता पर सवाल उठाए हैं।
फेसबुक पोस्ट को लेकर दर्ज हुई FIR
दरअसल, महुआ मोइत्रा के खिलाफ एक फेसबुक पोस्ट को लेकर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। इसी मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। महुआ की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन पेश हुए। उन्होंने अदालत से अपील की कि सांसद को पुलिस के सामने व्यक्तिगत रूप से जाने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति दी जाए।
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महुआ के वकील ने अदालत को बताया कि पिछली बार जब वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस स्टेशन गई थीं, तब उन पर अंडे फेंके गए थे। ऐसे में उन्हें दोबारा वहां जाने पर भीड़ द्वारा निशाना बनाए जाने की आशंका है। इसी दलील पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सवाल किया कि राजनीति में आने के बाद उन्हें अंडों से डर क्यों लगता है। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने स्वतंत्रता सेनानियों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने सीने पर गोलियां तक खाई थीं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से राहत नहीं मिलने के बाद महुआ मोइत्रा की ओर से याचिका वापस ले ली गई। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने साधा निशाना
अदालत की इस टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट के जज चाहते हैं कि महुआ मोइत्रा गोलियां खाएं? सौरव दास ने अपने पोस्ट में न्यायिक जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक अदालत के जजों से इस तरह के न्यायिक रवैये की उम्मीद नहीं की जाती। उन्होंने न्यायपालिका में जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत बताई।
'कुछ हुआ तो बेंच जिम्मेदार होगी'
सौरव दास ने आगे कहा कि बंगाल के मौजूदा हालात को देखते हुए यह टिप्पणी निंदनीय है। उन्होंने कहा कि अगर महुआ मोइत्रा के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो जस्टिस दीपांकर दत्ता के नेतृत्व वाली बेंच जिम्मेदार होगी। सौरभ ने आगे कहा, "उन्हें अपने बर्ताव पर शर्म आनी चाहिए। किसी भी काम करने वाले लोकतंत्र में, ऐसे जजों को इस्तीफा देने या महाभियोग का सामना करने के लिए मजबूर किया जाता!"
अभिजीत दीपके ने भी जताई आपत्ति
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट अब चाहता है कि हर कोई गोलियां खाए। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के जज विपक्षी नेताओं को लेकर इस तरह की टिप्पणी करते हैं तो आम लोगों के लिए न्याय व्यवस्था से क्या उम्मीद बचती है।
हाई कोर्ट से मिल चुकी है अंतरिम राहत
इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 21 जुलाई को महुआ मोइत्रा को अंतरिम राहत दी थी। अदालत ने नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े मामले में उन्हें 5 अक्टूबर तक हर तरह की दंडात्मक कार्रवाई से राहत दी थी। महुआ मोइत्रा का कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में वर्चुअली पेश होने की उनकी मांग खारिज होने के बाद मामले में व्यक्तिगत रूप से जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश प्रभावी रहेगा।
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