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सिद्धार्थनगर में हवन हुआ न फेरे, हो गई शादी:सामूहिक विवाह में दुल्हन बोली- सिर्फ सिंदूर लगवाया, किसी को लगवाया एक फेरा
रोहित सिंह | सिद्धार्थनगर26 मिनट पहले
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सिद्धार्थनगर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत हुए 95 हिंदू जोड़ों के विवाह की रस्मों पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि शादी में सात फेरे और हवन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, जिससे कई नवविवाहित जोड़ों ने असंतोष व्यक्त किया है।
यह आयोजन शनिवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बगल स्थित मैदान में हुआ, जिसमें कुल 151 जोड़ों का विवाह कराया गया। मंच पर सांसद, विधायक, नेता प्रतिपक्ष, जिलाधिकारी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। नवविवाहित जोड़ों को उपहार दिए गए और वधुओं के खातों में 64-64 हजार रुपये डीबीटी से भेजने की जानकारी दी गई।
आयोजन में शामिल कुछ वर-वधुओं ने बताया कि विवाह के दौरान सात फेरे नहीं कराए गए। कुछ ने फेरे न होने की बात कही, तो कहीं महज एक फेरा कराकर रस्म पूरी कर दी गई। आयोजन स्थल पर हवन कुंड बनाए गए थे, लेकिन कई जोड़ों के सामने न तो अग्नि जलाई गई और न ही अग्नि के चारों ओर सात फेरे कराए गए।

सामूहिक विवाह में शामिल वधू विद्या ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, "मंत्र पढ़ाए गए, सिंदूर लगाया गया और जयमाल कराई गई, लेकिन फेरे नहीं हुए। शादी में सात फेरे होने चाहिए और हवन कुंड जलना चाहिए, ऐसा कुछ नहीं हुआ।"
शोहरतगढ़ क्षेत्र के वर नरेंद्र कुमार ने भी बताया कि सिंदूरदान तो हुआ, लेकिन सात फेरे नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में विवाह की प्रक्रिया तेजी से पूरी की गई और फेरे की रस्म छोड़ दी गई।
वहीं, समारोह में शामिल एक अन्य वधू ने बताया कि जयमाल और सिंदूरदान की रस्म हुई, लेकिन जिस तरह से सामान्य विवाह में हवन के बाद सात फेरे कराए जाते हैं, वैसी प्रक्रिया यहां नहीं हुई। एक अन्य वर ने भी दावा किया कि विवाह की रस्में बहुत कम समय में पूरी करा दी गईं और सात फेरे नहीं कराए गए।
151 जोड़ों की शादी, इनमें 95 हिंदू
जिला प्रशासन के मुताबिक मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कुल 151 जोड़े विवाह कार्यक्रम में शामिल हुए। इनमें हिंदू समुदाय के 95, बौद्ध धर्म के 36 और मुस्लिम समुदाय के 20 जोड़े थे। मुस्लिम जोड़ों का निकाह मौलाना ने पढ़ाया, जबकि बौद्ध जोड़ों का विवाह उनके धर्म के अनुसार कराया गया। हिंदू जोड़ों का विवाह पंडितों के माध्यम से हिंदू रीति-रिवाज से कराने की व्यवस्था की गई थी।
अब कुछ हिंदू वर-वधू के बयानों के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर 95 हिंदू जोड़ों में कितने जोड़ों के विधिवत सात फेरे कराए गए? यदि हवन कुंड बनाए गए थे तो उनमें अग्नि प्रज्ज्वलित कर विवाह की रस्म पूरी क्यों नहीं कराई गई?

मंच पर सांसद, नेता प्रतिपक्ष और चार विधायक रहे मौजूद
कार्यक्रम का शुभारंभ सांसद जगदम्बिका पाल, नेता प्रतिपक्ष एवं इटवा विधायक माता प्रसाद पाण्डेय, बांसी विधायक जय प्रताप सिंह, कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही, शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह और जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
समारोह में मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह समेत जिला स्तरीय अधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। आयोजन के लिए अलग-अलग पंक्तियों में प्रभारी अधिकारियों की तैनाती भी की गई थी।
151 विवाह पर 1.51 करोड़ रुपये का प्रावधान
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने बताया कि प्रत्येक जोड़े पर कुल एक लाख रुपये का प्रावधान है। इसमें 64 हजार रुपये वधू के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से दिए जा रहे हैं। 21 हजार रुपये की सामग्री दी गई, जबकि 15 हजार रुपये बारातियों के स्वागत और आयोजन पर खर्च किए गए।
इस हिसाब से 151 जोड़ों पर कुल 1 करोड़ 51 लाख रुपये का प्रावधान बनता है। इनमें 96 लाख 64 हजार रुपये वधुओं के बैंक खातों में, 31 लाख 71 हजार रुपये की सामग्री और 22 लाख 65 हजार रुपये स्वागत एवं आयोजन पर खर्च का प्रावधान है।

पांच साड़ियां, पंखा, गद्दे और घरेलू सामान दिया
नवविवाहित जोड़ों को पांच साड़ी-ब्लाउज, पांच पेटीकोट, कढ़ाईयुक्त चुनरी, पैंट और शर्ट का कपड़ा, गमछा, स्टेनलेस स्टील डिनर सेट, पांच लीटर का कुकर, ट्रॉली बैग, दीवार घड़ी, कड़ाही, वैनिटी किट, सीलिंग फैन, 10 लीटर का कूल केज, प्रेस, डबल बेड चादर, तकिया कवर, दो कंबल, दो गद्दे और दो तकिए दिए गए।
इसके अलावा सिंहोरा, दो दर्जन चूड़ियां, चार कंगन, पांच किलो लड्डू, 500 ग्राम बादाम, 250 ग्राम अखरोट, 250 ग्राम मखाना, 500 ग्राम किशमिश और सूखा नारियल भी दिए जाने की जानकारी प्रशासन ने दी।
सांसद ने नौकरी-प्लेसमेंट दिलाने की घोषणा की
सांसद जगदम्बिका पाल ने समारोह में नवविवाहित जोड़ों को जिला प्रशासन के माध्यम से नौकरी या प्लेसमेंट दिलाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह योजना से गरीब परिवारों की बेटियों की शादी की चिंता दूर हुई है।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने नवविवाहित वर-वधू को आशीर्वाद दिया। बांसी विधायक जय प्रताप सिंह, कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही, शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा, पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने भी योजना की सराहना करते हुए नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया।
दुलहन बोली- फेरे कराए ही नहीं
वधू विद्या का स्पष्ट कहना है कि मंत्र पढ़े गए, सिंदूर लगाया गया और जयमाल कराई गई, लेकिन सात फेरे नहीं हुए। उनके मुताबिक हवन कुंड जलना चाहिए था और सात फेरे होने चाहिए थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। नरेंद्र कुमार ने भी फेरे नहीं कराए जाने की बात कही है।
ऐसे में सवाल है कि जब हिंदू जोड़ों के विवाह के लिए हवन कुंड बनाए गए थे तो क्या वे सिर्फ दिखावे के लिए थे? क्या सभी 95 हिंदू जोड़ों के विवाह में सात फेरों की रस्म पूरी कराई गई? अगर नहीं, तो विवाह की प्रक्रिया इतनी जल्दबाजी में क्यों पूरी की गई?
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