
स्कूल. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DoE) ने रोहिणी स्थित प्राइवेट ग्लोबल स्कूल के प्रबंधन को औपचारिक रूप से कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए यह स्पष्ट करने को कहा है कि विद्यालय का प्रबंधन प्रशासक (Administrator) के अधीन क्यों न लिया जाए? यह कार्रवाई शिक्षा निदेशालय, राजस्व विभाग तथा दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए गए संयुक्त औचक निरीक्षण (Joint Surprise Inspection) के बाद की गई है.
निरीक्षण के दौरान विद्यालय द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक स्पष्टीकरण का गहन परीक्षण किया गया, जो भ्रामक, असंतोषजनक तथा लगातार नियमों की अवहेलना का संकेत देने वाला पाया गया.
शिक्षा मंत्री ने स्कूल प्रबंधन को चेताया
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि विद्यालय शिक्षा के मंदिर हैं, व्यावसायिक केंद्र नहीं. बच्चों की सुरक्षा, हित और भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा, जो भी स्कूल प्रबंधन कानून की अवहेलना करेगा तथा छात्रों एवं अभिभावकों का शोषण करेगा, उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने आगे कहा कि वित्तीय अनियमितताएं, विद्यालय परिसर का व्यावसायिक उपयोग तथा छात्रों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिल्ली सरकार अभिभावकों एवं बच्चों के अधिकारों की रक्षा तथा शिक्षा व्यवस्था में पूर्ण जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
कारण बताओ नोटिस में क्या-क्या अनियमितताएं एवं उल्लंघन?
- सरकारी कार्य में बाधा: विद्यालय प्रबंधन ने निरीक्षण दल के साथ असहयोगपूर्ण एवं आक्रामक व्यवहार किया, भूमि संबंधी दस्तावेज, भवन एवं सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियां उपलब्ध कराने से इंकार किया तथा अधिकारियों को छात्रों से स्वतंत्र रूप से बातचीत करने से रोका.
- गंभीर अग्नि एवं सुरक्षा संबंधी खामियां: विद्यालय बिना वैध अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र (Fire Safety Certificate) के संचालित पाया गया. अग्निशामक यंत्रों की वैधता समाप्त हो चुकी थी, रसायनशाला में सल्फ्यूरिक अम्ल जैसे खतरनाक रसायन असुरक्षित अवस्था में रखे गए थे तथा प्राथमिक उपचार (First Aid) की सामग्री भी एक्सपायर पाई गई.
- अवैध निर्माण एवं उपयोग परिवर्तन: भूमिगत पार्किंग बेसमेंट का अवैध रूप से 18 कक्षाओं, संगीत एवं नृत्य कक्षाओं, STEM एवं रोबोटिक्स लैब तथा सीबीएसई परीक्षा केंद्र के रूप में उपयोग किया जा रहा था.
- वित्तीय अनियमितताएं: विद्यालय द्वारा ₹15.60 करोड़ से अधिक का संचयी घाटा दर्शाने के बावजूद संदिग्ध एवं अप्रमाणित कंपनियों को भारी भुगतान किए गए, विकास निधि (Development Reserve Fund) से ₹22.23 लाख के लग्जरी मोबाइल फोन खरीदे गए तथा ₹3.25 करोड़ के अप्रमाणित असुरक्षित ऋणों का भुगतान किया गया.
- विद्यालय परिसर का व्यावसायिक दुरुपयोग: बिना आवश्यक अग्नि सुरक्षा स्वीकृति के बाहरी व्यक्तियों के लिए व्यावसायिक स्विमिंग पूल संचालित किया जा रहा था तथा विद्यालय की छत पर आईजीएल पाइप्ड गैस कनेक्शन के साथ अवैध व्यावसायिक रसोई (Commercial Kitchen) चलाई जा रही थी.
- अनधिकृत शुल्क वृद्धि एवं कैपिटेशन फीस: विद्यालय ने बिना अनुमति 15 प्रतिशत शुल्क वृद्धि लागू की तथा 31 मार्च 2025 तक ₹1,98,30,470 की अवैध अग्रिम एवं कैपिटेशन फीस वसूल की.
- कर्मचारियों का शोषण एवं नियुक्ति में अनियमितता: कुल 170 शिक्षकों में से लगभग 80 (करीब 50 प्रतिशत) शिक्षकों को संविदा पर नियुक्त किया गया, जिससे वैधानिक भर्ती नियमों एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया की अवहेलना हुई.
- छात्र सुविधाओं की उपेक्षा: खेल सुविधाएं अत्यंत निम्न स्तर की पाई गईं, पुस्तकालय की स्थिति खराब थी, शौचालय अस्वच्छ थे, पेयजल खारा था तथा दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए आवश्यक सुगम्यता सुविधाओं का पूर्ण अभाव पाया गया.
संबंधित कानूनी प्रावधान क्या-क्या हैं?
- विद्यालय को जारी नोटिस दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम एवं नियम, 1973 (DSEA & Rules, 1973) के निम्नलिखित प्रावधानों के अंतर्गत जारी किया गया है—
- धारा 20(1), दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973: यदि विद्यालय की प्रबंधन समिति अपने वैधानिक दायित्वों की उपेक्षा करती है तथा विद्यालय शिक्षा के हित में आवश्यक हो, तो प्रशासक विद्यालय का प्रबंधन तीन वर्ष तक (आवश्यकता पड़ने पर पांच वर्ष तक) अपने अधीन ले सकता है.
- धारा 24(4), दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973: निदेशक को यह अधिकार प्रदान करती है कि सरकारी निर्देशों का पालन न करने की स्थिति में विद्यालय के विरुद्ध सहायता रोकने, मान्यता समाप्त करने अथवा धारा 20 के अंतर्गत प्रबंधन अपने अधीन लेने जैसी कठोर कार्रवाई की जा सके.
- धारा 10(1) एवं धारा 17(3), दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973: कर्मचारियों के वेतन एवं सेवा शर्तों में समानता सुनिश्चित करने तथा अवैध कैपिटेशन फीस एवं व्यावसायिक लाभ अर्जित करने पर रोक लगाने से संबंधित प्रावधान.
- नियम 50 एवं नियम 50(ix), दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम, 1973: विद्यालय की मान्यता की शर्तों, परिसर के व्यावसायिक उपयोग पर रोक तथा स्वास्थ्य, भवन एवं अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन से संबंधित प्रावधान.
- नियम 96 से 104, दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम, 1973: शिक्षकों एवं प्रशासनिक कर्मचारियों की नियुक्ति हेतु अनिवार्य भर्ती नियम एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया निर्धारित करते हैं.
ये भी पढ़ें- दिल्ली के 36 लाख बच्चों का गार्जियन हूं. शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया सरकार का शिक्षा मॉडल

जीतेन्द्र भाटी
करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉलिटिक्स, क्राइम, सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग. BAG Films की नर्सरी से IBN7, आज़ाद न्यूज़, प्रज्ञा TV, 4 रियल न्यूज, Focus News और न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया होते हुए देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में खबरों के बीच सफर जारी.
Read More