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सुबह से बीजेपी समर्थक बना रहे थे लड्डू, लेकिन बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने दिखाया दम

August 3, 2026

सुबह से बीजेपी समर्थक बना रहे थे लड्डू, लेकिन बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने दिखाया दम

लड्डू बनाते बीजेपी समर्थक और प्रशांत किशोर.

जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सोमवार को कई राउंड की काउंटिंग के बाद बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा पर अपनी बड़ी बढ़त मजबूत कर ली है और जीत की ओर बढ़ रहे हैं. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद यह सीट रिक्त हुई थी और पहली बार प्रशांत किशोर चुनाव मैदान में हैं.

बांकीपुर सीट नितिन नवीन की पारंपरिक सीट मानी जाती रही है, लेकिन इस सीट से भाजपा हार की ओर बढ़ रही है. आइए जानें क्या वजह है, जिसके कारण भाजपा अपनी पारंपरिक सीट हारने की कगार पर है.

#WATCH | Bihar | BJP workers in Patna are preparing several kilograms of Ladoos, anticipating the victory of Neeraj Sinha, the party’s Bankipur bypoll candidate pic.twitter.com/Q7nXtrvgyK

— ANI (@ANI) August 3, 2026

कम वोटिंग प्रतिशत से हो गया खेला

बांकीपुर उपचुनाव में सबसे कम 34.30 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. वोटिंग के कम प्रतिशत से यह अटकलें लगाई जा रही थी कि भाजपा के कार्यकर्ता चुनाव मैदान में नहीं उतरे हैं और उसका प्रभाव परिणाम पर दिख सकता है और चुनावी परिणाम के रिजल्ट इस ओर ही इशारा कर रहे हैं.

एक फैक्टर खुद चुनाव रणनीतिकार से राजनीतिज्ञ बने प्रशांत किशोर हैं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों के उलट, जब उनकी नई जनसुराज राज्य की 243 सीटों में से 238 पर चुनाव लड़ने के बावजूद अपना खाता नहीं खोल पाई थी, तो प्रशांत किशोर ने इस बार पटना की बांकीपुर सीट से किसी और पार्टी लीडर को चुनाव लड़ाने के बजाय खुद चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया.

नीरज कुमार सिन्हा पर भारी पड़े प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी भाजपा के हल्के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के मुकाबले भारी पड़ी, जिन्हें पार्टी ने उस सीट पर उतारा था, जो उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने खाली की थी, जिन्होंने 2006 से 2026 तक पांच बार बांकीपुर का प्रतिनिधित्व किया था.

दूसरी बात जो प्रशांत किशोर के पक्ष में गई है, वह है भाजपा के गढ़ में बदलाव के लिए लोगों का माना जा रहा मूड, जिसमें कई लोग जनसुराग के प्रमुख प्रशांत किशोर को बेहतर विकल्प माना. प्रशांत किशोर ने इस चुनाव को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर एक रेफरेंडम कहा और बांकीपुर को अपना “गढ़” कहने के लिए भाजपा के “घमंड” पर हमला किया.

पीके के पक्ष में गई कास्ट केमिस्ट्री

प्रशांत किशोर की बढ़त का एक बड़ा कारण भाजपा और मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी, दोनों के सपोर्ट बेस में आई बड़ी दरारें हो सकती हैं. जहां सिर्फ ऊंची जाति कायस्थ समुदाय भाजपा के साथ एकजुट हुआ, वहीं दूसरी ऊंची जाति और ओबीसी वोटर ग्रुप के कुछ हिस्से प्रशांत किशोर की तरफ झुक गए.

आरजेडी के मुस्लिम-यादव वोटरों का एक बड़ा हिस्सा भी किशोर की तरफ जाता दिखा. मुसलमानों का एक हिस्सा प्रशांत किशोर के लिए आरजेडी छोड़कर चला गया, क्योंकि उन्हें भाजपा के खिलाफ प्रशांत किशोर में जीतने की क्षमता दिखी.

Pk की रणनीति के सामने मात खा गई भाजपा

अपने चुनाव अभियान के दौरान,प्रशांत किशोर ने जाति और धर्म के पुराने मुद्दों से ऊपर उठकर शिक्षा, नौकरी और सिविल मामलों जैसे अपने मुख्य मुद्दों पर ही टिके रहे. अपने चुनाव प्रचार में, नितिन नवीन ने बांकीपुर के लोगों के साथ अपने इमोशनल जुड़ाव को दिखाया, न कि इस हाई-प्रोफाइल चुनाव क्षेत्र के लिए भाजपा का रोडमैप बताया.

प्रशांत किशोर ने अपने विरोधियों के मुकाबले बेहतर पोल स्ट्रैटेजी बनाई. अपने चुनाव प्रचार में, उन्होंने बड़े इलाकों में मोहल्ला मीटिंग और पब्लिक इंटरेक्शन पर ज्यादा फोकस किया. इस तरह वह भाजपा के सोशल कॉम्बिनेशन को तोड़ने में कामयाब रहे, साथ ही सत्तारूढ़ पार्टी की लोकल यूनिट के अंदर कुछ मतभेद और झगड़ों का भी फायदा उठाया.

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अजय विद्यार्थी

अजय विद्यार्थी

कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैजुएशन. प्रभात खबर में बतौर सीनियर न्यूज़ एडिटर काम किया. ग्राउंड रिपोर्टिंग और एडिटिंग में करीब 20 सालों से ज्यादा का अनुभव. राजस्थान पत्रिका में चीफ रिपोर्टर रहने के दौरान कई ऐसी स्टोरी की, जिन्हें सराहा गया.

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