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नासिक: तिरुपति और शिर्डी से क्यों पीछे है त्र्यंबकेश्वर? रिपोर्ट में सामने आईं बड़ी वजहें| Navbharat Live

August 2, 2026

नासिक: तिरुपति और शिर्डी से क्यों पीछे है त्र्यंबकेश्वर? रिपोर्ट में सामने आईं बड़ी वजहें

  • Written By:

    आलोक उमाकृष्ण

Updated On: Aug 02, 2026 | 06:51 PM IST

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सार

Trimbakeshwar Temple: त्र्यंबकेश्वर देवस्थान आधुनिक सुविधाओं, VIP व्यवस्था और बेहतर प्रबंधन के अभाव में तिरुपति, शिर्डी व पंढरपुर जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों की तुलना में दान-दक्षिणा में पीछे है।

Nashik Trimbakeshwar Temple Lags Donations Due To Lack Of Facilities

त्र्यंबकेश्वर मंदिर (सोर्स: AI)

विस्तार

Trimbakeshwar Temple Lags Donations: तिरुपति बालाजी, पंढरपुर, शिर्डी और अयोध्या राम मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आधुनिक एवं व्यापक सुविधाओं की उपलब्धता के कारण वहां बड़े पैमाने पर दान प्राप्त होता है। इसकी तुलना में त्र्यंबकेश्वर में आधुनिक सुविधाओं का अभाव होने से बड़े दानवीर श्रद्धालु कम संख्या में आते हैं, जिसके परिणामस्वरूप त्र्यंबकेश्वर देवस्थान की आय अन्य प्रसिद्ध तीर्थक्षेत्रों से काफी कम नज़र आ रही है।

हाल के दिनों में पुणे का दगडूशेत हलवाई गणपति मंदिर भी अत्यधिक प्रसिद्ध हुआ है। चौड़ी सड़कें, निकटतम रेलवे एवं हवाई अड्डा तथा विश्वस्तरीय होटल सुविधाओं के कारण देश के सबसे धनी श्रद्धालु इन स्थलों पर पहुंचते हैं और खुलकर दान करते हैं। हाल ही में एक श्रद्धालु ने पंढरपुर में भगवान विट्ठल के चरणों में 56 लाख रुपये की सोने की पादुकाएँ अर्पित कीं, जबकि यात्रा काल के दौरान वहाँ 9.32 लाख रुपये दान मिले।

चढ़या 1 करोड़ रुपये का स्वर्ण मुकुट

शिर्डी साईं बाबा के मंदिर में एक भक्त ने एक करोड़ रुपये का स्वर्ण मुकुट चढ़ाया और गुरु पूर्णिमा के दौरान मंदिर को सात करोड़ रुपये की आय हुई। सुविधाओं की कमी के कारण बड़े दानदाता त्र्यंबकेश्वर का रुख नहीं करते, जिससे यहाँ बड़ी देणगी नहीं मिल पाती। अन्य तीर्थक्षेत्रों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे अति VIP बार-बार जाते हैं, लेकिन प्रशासनिक ब्लू बुक (सुरक्षा व्यवस्था) संबंधी मानक सुविधाओं का अभाव होने से त्र्यंबकेश्वर में बड़े VIP भी नहीं आते हैं।

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इसके अतिरिक्त, अन्य धार्मिक स्थलों पर व्यापक पैमाने पर सामाजिक उपक्रम चलाए जाते हैं, जबकि त्र्यंबकेश्वर में ऐसे आयोजनों का अभाव है। यहाँ आने वाले सामान्य श्रद्धालु केवल अपनी जीवन संबंधी समस्याओं के निवारण की भावना से आते हैं, जबकि अन्य स्थलों पर संपन्न भक्त बड़ा दान करने के उद्देश्य से दर्शन करते हैं।

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सभी धामों से महान है

वास्तव में त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग एक अत्यंत जागृत और स्वयंभू स्थान है। गोदावरी का उद्गम स्थल, संत निवृत्तिनाथ महाराज की समाधि और नागा साधुओं का कुंभ मेला स्थल होने के कारण त्र्यंबकेश्वर का महत्व अद्वितीय है। श्रद्धालुओं के लिए यह समझना आवश्यक है कि आध्यात्मिक दृष्टि से त्र्यंबकेश्वर तीर्थक्षेत्र अन्य सभी धामों से महान है, किंतु बेहतर सुविधाओं और प्रबंधन के लिए आत्मनिरीक्षण की सख्त आवश्यकता है।

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