भोपाल, 1 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश सरकार के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमित वेतनमान और उनके 'स्थायी वर्गीकरण' की तिथि को लेकर उपजे भ्रम को दूर करते हुए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने साफ किया है कि कर्मचारियों को नियमित वेतनमान का लाभ किस तिथि से दिया जाना चाहिए, ताकि अनावश्यक न्यायिक विवादों को रोका जा सके।
पात्रता की तिथि और आदेश की तिथि में अंतर स्पष्ट
विभागीय स्पष्टीकरण के अनुसार, कर्मचारी के स्थायी वर्गीकरण के लिए 'पात्र होने की तिथि' (Eligibility Date) और सक्षम प्राधिकारी द्वारा 'आदेश जारी करने की तिथि' (Date of Classification Order) दो अलग-अलग अवधारणाएँ हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल पात्रता की तिथि के आधार पर कर्मचारी नियमित वेतनमान का हकदार नहीं हो जाता, जब तक कि आदेश में इसका स्पष्ट उल्लेख न हो।
वेतनमान निर्धारण के लिए नए दिशानिर्देश:
शासन ने अदालती फैसलों और विभागीय अभिलेखों के परीक्षण के बाद निम्नलिखित बिंदु तय किए हैं:
स्पष्ट तिथि का उल्लेख होने पर: यदि स्थायी वर्गीकरण के आदेश में किसी विशेष तिथि (प्रभावशील तिथि) का उल्लेख किया गया है, तो कर्मचारी को उसी तिथि से बिना वार्षिक वेतनवृद्धि के समकक्ष वेतनमान का लाभ मिलेगा।
तिथि का उल्लेख न होने पर: यदि आदेश में किसी विशेष प्रभावशील तिथि का ज़िक्र नहीं है, तो जिस दिन सक्षम प्राधिकारी ने 'स्थायी वर्गीकरण' का आदेश जारी किया है, उसी दिन से वेतनमान का लाभ देय होगा।
पात्रता अवधि का आधार नहीं: किसी भी कर्मचारी की पात्रता अवधि या केवल पात्र हो जाने की तिथि को तब तक वेतनमान का आधार नहीं माना जाएगा, जब तक कि आदेश में इसे स्पष्ट रूप से न लिखा गया हो।
माननीय न्यायालयों के निर्णयों का हवाला
यह स्पष्टीकरण माननीय उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न मामलों (जैसे सुल्तान सिंह नरवरिया बनाम म.प्र. शासन और राम नरेश रावत बनाम म.प्र. शासन) में दिए गए निर्णयों के आलोक में जारी किया गया है। न्यायालयों ने पूर्व में यह सिद्धांत स्थापित किया है कि 'स्थायी कर्मचारी' (Permanent Employee) ग्रेड-पे के साथ वेतन पाने का हकदार तो है, लेकिन उसे वेतनमान का केवल न्यूनतम ही प्राप्त होगा, न कि वेतनवृद्धि (increments)। वेतनवृद्धि का लाभ केवल सेवा के 'नियमितीकरण' (Regularisation) के उपरांत ही प्राप्त होता है।
आदेश का पालन अनिवार्य
अपर सचिव, मध्य प्रदेश शासन द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश में विभाग के समस्त कार्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे भविष्य में वेतनमान संबंधी सभी प्रकरणों का निराकरण इसी विधिक स्थिति के अनुसार सुनिश्चित करें। इस कदम से प्रदेश के उन हजारों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट हो गई है जिन्हें समय-समय पर स्थायी वर्गीकृत किया गया है। रिपोर्ट: शोएब सिद्दीकी।
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