
जो रूट बने टेस्ट कप्तान? (PC-PTI)
इंग्लैंड के नए टेस्ट कप्तान और नए टेस्ट हेड कोच के नाम का ऐलान हो गया है. ईसीबी ने स्टीफन फ्लेमिंग को टेस्ट टीम का हेड कोच बनाया, जिन्होंने ब्रैंडन मैक्कलम की जगह ली. वहीं जो रूट को दोबारा इंग्लैंड का टेस्ट कप्तान बनाया गया है. वो पहले भी इंग्लैंड के कप्तान रह चुके हैं और उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने 27 टेस्ट मैच जीते हैं जो कि रिकॉर्ड है. ईसीबी ने गुरुवार को नए कप्तान और हेड कोच का ऐलान किया. न्यूजीलैंड के लिए 111 टेस्ट मैच खेलने के अलावा फ्लेमिंग ने चेन्नई सुपरकिंग्स की 18 सालों तक कोचिंग की है, उनका अनुभव कमाल का है. अब उनका यही अनुभव इंग्लैंड के काम आएगा.
टेस्ट कोच बनकर क्या बोले फ्लेमिंग?
स्टीफन फ्लेमिंग ने इंग्लैंड की टेस्ट टीम का हेड कोच बनने के बाद कहा, ‘इंग्लैंड से जुड़कर मैं बेहद उत्साहित हूं. ये वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित कोचिंग पदों में से एक है और मुझे ये पद हासिल करने पर गर्व हो रहा है.’मैं खिलाड़ियों के साथ काम करने और मैक्कलम और स्टोक्स की ओर से हासिल की गई उपलब्धियों को टीम में शामिल करने के लिए उत्सुक हूं. हमारा लक्ष्य जीत हासिल करना तो है ही लेकिन साथ ही ये सुनिश्चित करना भी उतना ही अहम है कि टीम अपना भविष्य भी बनाए.’ फ्लेमिंग ने आगे कहा कि वो बतौर हेड कोच जो रूट के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं. जो रूट कमाल का टैलेंट हैं, उन्होंने काफी कुछ हासिल किया है लेकिन वो अभी भी बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं.
4 साल बाद फिर कप्तान बने रूट
जो रूट भी 4 साल बाद दोबारा टेस्ट कप्तान बन गए हैं. इस खिलाड़ी ने इंग्लैंड को 65 टेस्ट में लीड किया है, जिसमें वो 27 मैच जीते हैं. रूट ने साल 2017 से 2022 तक इंग्लैंड की टेस्ट टीम की अगुवाई की थी. अब एक बार फिर कमान उनके हाथों में आ गई है. जो रूट ने कहा: ‘इंग्लैंड का टेस्ट कप्तान बनने का मौका मिलना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान और सौभाग्य की बात है. टेस्ट कप्तानी एक मुश्किल लेकिन गजब का काम है, मैं इसके लिए तैयार हूं.’
रूट ही कप्तान क्यों बने?
सवाल ये है कि इंग्लैंड ने जो रूट को ही कप्तान क्यों बनाया गया? हैरी ब्रूक भी टीम में थे जो कप्तानी के बड़े दावेदार थे. दरअसल ब्रूक पहले से ही वनडे और टी20 टीम के कप्तान हैं. टेस्ट कप्तान बनने के बाद उनपर और ज्यादा लोड बढ़ जाता. यही नहीं वो कुछ विवादों में भी फंसे हैं मुमकिन है कि इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा हो. दूसरी ओर जो रूट इस भूमिका को समझते हैं. उनको कप्तानी का अच्छा अनुभव है. इंग्लैंड की टेस्ट ने तीनों वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में निराशाजनक प्रदर्शन किया है और ईसीबी के पास रूट से बेहतर दूसरा विकल्प शायद ही कोई और था.

अनूप देव सिंह
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले का रहने वाला हूं. बचपन से ही खेलों से बेहद प्यार है. खासतौर पर क्रिकेट से जो इस देश का धर्म भी कहा जाता है. स्कूली पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई. साल 2006 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की और उसके बाद मीडिया के मैदान में उतर गए और खेल की खबरों को ही अपना कर्म भी बना लिया. करियर की पहली नौकरी नेटवर्क 18 ग्रुप में मिली. शुरुआत IBN7 न्यूज चैनल से हुई जहां मैंने पांच सालों की लंबी पारी खेली. इसके बाद इंडिया टीवी, न्यूज नेशन जैसे बड़े नेशनल चैनल्स के साथ काम किया. 2016 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा और ये मौका जी नेटवर्क ने दिया. एक साल तक क्रिकेट कंट्री के साथ काम किया और फिर हुई नेटवर्क 18 में वापसी. न्यूज 18 हिंदी की वेबसाइट में 4 सालों तक स्पोर्ट्स की हर खबर पाठकों तक पहुंचाई. अब टीवी9 के साथ हूं. क्रिकेट ही नहीं खेल की हर खबर आपतक एक नए अंदाज और नए कलेवर में पहुंचाता हूं.
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