world-news

राजस्थान में राष्ट्रपति को पत्र लिखकर पीड़ित महिलाओं ने मांगी इच्छा मृत्यु, फिर भी भजनलाल सराकार ने साधी चुप्पी

July 28, 2026

राजस्थान में राष्ट्रपति को पत्र लिखकर पीड़ित महिलाओं ने मांगी इच्छा मृत्यु, फिर भी भजनलाल सराकार ने साधी चुप्पी

Kota Maternal Deaths: कोटा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में नकली इंजेक्शन और घोर लापरवाही के कारण पांच गर्भवती महिलाओं की जान चली गई. वहीं पांच अन्य महिलाओं की दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं.

author-image

New Update

Kota Maternal Deaths

Kota Maternal Deaths Photograph: (NN)

Kota Maternal Deaths: राजस्थान के कोटा जिले में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है. अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी वार्ड में भर्ती हुई गर्भवती महिलाओं को नकली और पानी मिले इंजेक्शन लगा दिए गए. इस गंभीर लापरवाही के कारण पांच महिलाओं की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य महिलाओं की दोनों किडनियां पूरी तरह खराब हो चुकी हैं. मई महीने की शुरुआत में डिलीवरी कराने आई ये महिलाएं आज अस्पताल की लापरवाही के कारण जिंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं. अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से पीड़ित परिवार गहरे सदमे में हैं.

नकली इंजेक्शन और पानी मिली दवा ने छीनी खुशियां

कोटा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में मई के पहले हफ्ते में कई गर्भवती महिलाएं डिलीवरी के लिए भर्ती हुई थीं. डॉक्टरों ने ऑपरेशन के दौरान उन्हें ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाया. बाद में हुई जांच में यह बात सामने आई कि यह इंजेक्शन नकली था और उसमें पानी मिला हुआ था. गलत दवा शरीर में पहुंचते ही महिलाओं की सेहत तेजी से बिगड़ने लगी. देखते ही देखते पांच महिलाओं की सांसें थम गईं. जिन महिलाओं की जान जैसे-तैसे बच सकी, उनकी किडनियां पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी हैं.

हर दूसरे दिन डायलिसिस का असहनीय दर्द

अस्पताल की इस भारी चूक का खामियाजा अब पीड़ित महिलाएं रोजाना भुगत रही हैं. उन्हें हर दूसरे या तीसरे दिन डायलिसिस की तकलीफदेह प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. डायलिसिस के दौरान और उसके बाद महिलाओं को तेज बुखार, उल्टी, चक्कर और शरीर में असहनीय दर्द झेलना पड़ता है. पीड़ित महिलाओं का कहना है कि वे इस तरह घिसट-घिसट कर जीने से बेहतर मौत को मानती हैं. लगातार बढ़ते दर्द और परेशानी के कारण कई महिलाओं ने हिम्मत हारकर डायलिसिस कराने से भी साफ मना कर दिया था.

राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांगी इच्छा मृत्यु

जब स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से पीड़ितों को कोई राहत नहीं मिली, तो तंग आकर महिलाओं ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी लिखी. इस पत्र में उन्होंने अपने असहनीय दर्द और आर्थिक तंगी का जिक्र करते हुए इच्छा मृत्यु की मांग की है. महिलाओं का कहना है कि महीनों से चल रहे इलाज ने उनके परिवारों को आर्थिक रूप से तोड़कर रख दिया है. घर के पुरुष अपना काम-धंधा छोड़कर अस्पताल के चक्कर काटने और देखभाल करने में लगे हैं, जिससे अब रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

कागजी आश्वासन और लंबी जांच का खेल

मामला बढ़ता देख अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लीपापोती शुरू कर दी. अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार तीन महीने बीतने के बाद ही किसी मरीज को क्रॉनिक किडनी फेलियर की श्रेणी में रखा जाता है. इसके बाद ही किडनी बदलने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. प्रशासन ने मुफ्त इलाज और किडनी ट्रांसप्लांट का लिखित भरोसा तो दिया है, लेकिन इसके लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है. पीड़ित परिजनों का कहना है कि महीनों का यह लंबा इंतजार उनके मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.

पूरे राजस्थान में फैली लापरवाही की आंच

यह गंभीर मामला सिर्फ कोटा शहर तक ही सीमित नहीं रहा. इसके बाद राज्य के बीकानेर, भीलवाड़ा और जोधपुर जैसे अन्य शहरों से भी ऐसी ही लापरवाहियों की खबरें सामने आने लगीं. पूरे प्रदेश में अब तक 23 प्रसूताओं की मौत की बात सामने आ चुकी है. मीडिया में मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र और राज्य सरकार की टीमों ने जांच शुरू की है. इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और स्वास्थ्य महकमा ठोस जवाब देने से बचता नजर आ रहा है.

इंसाफ और मदद के इंतजार में पीड़ित परिवार

राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था इस पूरे मामले में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है. सरकार और प्रशासन भविष्य में व्यवस्थाएं सुधारने के दावे तो कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान में तड़प रही महिलाओं को तुरंत राहत देने में पूरी तरह असमर्थ दिख रहे हैं. पीड़ित परिवार अब भी उचित मुआवजे, तुरंत इलाज और दोषी डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें सही मायने में इंसाफ मिल सके.

यह भी पढ़ें: वेंटिलेटर पर राजस्थान का हेल्थ सिस्टम: सीजरियन डिलीवरी के बाद 23 प्रसूताओं की मौत, जवाबदेही से भाग रही सरकार