Jul 26, 2026 05:27 am ISTलाइव हिन्दुस्तान, ● पंकज कुमार पांडेय, नई दिल्ली।
शुक्रवार सुबह तक केंद्र का रुख सख्त था और उच्च स्तर पर यह माना जा रहा था कि स्थिति पर काबू पाने के लिए उठाए गए कदम ही काफी होंगे। उच्च शिक्षा सचिव को पद से हटाया जा चुका था और एनटीए में 47 लोगों को बर्खास्त किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)
महज 24 घंटे पहले तक जिसकी संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही थी, शनिवार को वो हो गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा सौंप दिया। प्रधान ने कहा कि उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह कदम उठाया है। प्रधान ने अपने सोशल मीडिया बायो से मंत्री पद भी हटा दिया। पर, यह इस्तीफा इतनी आसानी से नहीं आया। इसके पीछे 24 घंटे का वो घटनाक्रम है, जिसने दिल्ली के सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी।
शुक्रवार सुबह तक केंद्र का रुख सख्त था और उच्च स्तर पर यह माना जा रहा था कि स्थिति पर काबू पाने के लिए उठाए गए कदम ही काफी होंगे। उच्च शिक्षा सचिव को पद से हटाया जा चुका था और एनटीए में 47 लोगों को बर्खास्त किया गया था। सरकार को भरोसा था कि नए पेपर लीक कानून के मसौदे पर मुहर लगाने तथा फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन के ऐलान के बाद छात्रों का गुस्सा शांत हो जाएगा। हालांकि, इस बीच सरकार के भीतर मंथन शुरू हो चुका था, जहां बड़ा राजनीतिक जोखिम साफ नजर आ रहा था। तर्क यह था कि विपक्ष इस मुद्दे को ढाल बनाकर केंद्र के खिलाफ छात्र और युवा विरोधी नैरेटिव सेट करता दिख रहा था। ऐसे में सरकार को जल्द इसकी काट तलाशनी थी।
अमित शाह की नजर
अमित शाह पर्दे के पीछे से स्थिति पर नजर बनाए हुए थे, जबकि जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को सरकार का मुख्य वार्ताकार बना मोर्चे पर उतारा गया। प्रधानमंत्री युवाओं का भरोसा जीतने के लिए खुद दो बार सोशल मीडिया पर आए, पर शनिवार दोपहर तक सरकार को अहसास हो चुका था, कि सिर्फ प्रशासनिक फैसलों से बात नहीं बनने वाली। सरकार के सूत्रों का मानना था कि आंदोलन की आड़ में राष्ट्रविरोधी ताकतों के हावी होने की आशंका है, इसे देखते हुए इस्तीफे जैसा बेहद मुश्किल फैसला लिया गया।
PM मोदी ने खुद संभाली कमान
शुक्रवार रात से लेकर शनिवार सुबह के बीच हालात तेजी से बदले। जंतर-मंतर से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन और उग्र होते गए। खुफिया और प्रशासनिक एजेंसियों का फीडबैक सीधे पीएमओ तक पहुंचा, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि स्थिति काबू से बाहर हो रही है। सड़क से संसद तक घिर चुकी सरकार के खिलाफ आंदोलन आने वाले दिनों में और विकराल रूप ले सकता है। इस गंभीर रिपोर्ट के मिलते ही खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्राइसिस मैनेजमेंट की कमान अपने हाथों में ले ली और त्वरित फैसले लिए।
