PM Modi के 25 साल के सेवा संकल्प के मौके पर अमित चिमनानी ने 2013-14 और 2025-26 के बीच भारत की आर्थिक प्रगति के 30 प्रमुख आंकड़े पेश किए।
वरिष्ठ सीए एवं आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ अमित चिमनानी ने वर्ष 2013-14 और 2025-26 की तुलना करते हुए अर्थव्यवस्था के 30 प्रमुख मापदंडों के आंकड़े पेश किए हैं।
- Published: 17 Sep 2026, 10:19 AM IST
- Last Updated: 17 Sep 2026, 10:19 AM IST
रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर भारत की आर्थिक यात्रा से जुड़े आंकड़े सामने रखे गए हैं। वरिष्ठ सीए एवं आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ अमित चिमनानी ने वर्ष 2013-14 और 2025-26 की तुलना करते हुए अर्थव्यवस्था के 30 प्रमुख मापदंडों के आंकड़े पेश किए हैं। इनमें टैक्स कलेक्शन, GST, बजट, निर्यात, विदेशी मुद्रा भंडार, FDI, DBT, स्टार्टअप, मुद्रा योजना, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, रक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
चिमनानी के प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है। उदाहरण के तौर पर नेट इनकम टैक्स कलेक्शन ₹6.38 लाख करोड़ से बढ़कर ₹23.40 लाख करोड़, बजट ₹16.65 लाख करोड़ से बढ़कर ₹50.65 लाख करोड़ और मोबाइल फैक्ट्रियों की संख्या 2 से बढ़कर 300 बताई गई है।
2013-14 से 2025-26 तक भारत की आर्थिक तस्वीर
अमित चिमनानी द्वारा प्रस्तुत 30 आंकड़ों में टैक्स, बजट, एक्सपोर्ट, विदेशी मुद्रा भंडार, डिजिटल लेनदेन, स्टार्टअप, रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग समेत अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों की तुलना की गई है।

टैक्स, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा बदलाव
प्रस्तुत आंकड़ों में टैक्स कलेक्शन, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े आंकड़े खास तौर पर सामने आते हैं। DPIIT के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2.23 लाख से अधिक हो चुकी थी।
इसी तरह PM MUDRA Yojana के तहत 27 मार्च 2026 तक 57.79 करोड़ ऋण और ₹40.07 लाख करोड़ की राशि का आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध है।
Disclaimer: इस रिपोर्ट में 2013-14 और 2025-26 के तुलनात्मक आंकड़े अमित चिमनानी द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। अलग-अलग आर्थिक संकेतकों की परिभाषा, गणना पद्धति और डेटा अवधि अलग हो सकती है। इसलिए आंकड़ों को संबंधित सरकारी स्रोतों/विभागों के उपलब्ध आंकड़ों के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए। यह रिपोर्ट प्रस्तुत आंकड़ों का विश्लेषण है, किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं।