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Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये महंगा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत ने बढ़ाया जेब पर बोझ

October 3, 2026

Time Published: Saturday, October 3, 2026, 16:34 [IST]

Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर शनिवार (03 अक्टूबर) को बड़ा अपडेट आया है। नायरा एनर्जी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया है। नए रेट 3 अक्टूबर की सुबह से कंपनी के देशभर में मौजूद 7,108 फ्यूल स्टेशनों पर लागू हो गई हैं। यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें काफी ऊपर चल रही हैं।

नायरा एनर्जी का यह फैसला सीधे तौर पर बढ़ती लागत से जुड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है। इसके साथ रिफाइंड फ्यूल की कीमतें भी बढ़ी हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल को पुराने दाम पर बेचने से निजी फ्यूल रिटेलर के मार्जिन पर दबाव बढ़ता है।

Petrol Diesel Price Hike

नायरा ने इससे पहले भी इसी साल कीमतों में बड़ा बदलाव किया था। 26 मार्च को कंपनी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा किया था। उस समय ईरान से जुड़े तनाव के कारण ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ा था। तब नायरा के पंपों पर पेट्रोल 100।71 रुपये और डीजल 91।31 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था।

इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव कुछ कम हुआ और कच्चे तेल की कीमतें नीचे आईं। नतीजा यह हुआ कि 1 जुलाई को नायरा ने मार्च की पूरी बढ़ोतरी वापस ले ली। पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये सस्ता किया गया। अब अक्टूबर में कंपनी ने फिर वही बढ़ोतरी लागू कर दी है।

सरकारी पंपों पर अभी वही रेट, नायरा से क्यों अलग है कीमत?

यहां सबसे अहम बात यह है कि अभी सिर्फ नायरा एनर्जी ने कीमतें बढ़ाई हैं। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसे सरकारी तेल विक्रेताओं ने इस बढ़ोतरी के साथ अपने खुदरा दाम नहीं बदले हैं। भारत में सरकारी तेल कंपनियों की पकड़ बहुत बड़ी है।

देश के 1,04,137 से ज्यादा फ्यूल आउटलेट में इन कंपनियों का हिस्सा 90 फीसदी से अधिक है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल भी देश के रिटेल आउटलेट का आधिकारिक आंकड़ा जारी करता है। इसका मतलब यह हुआ कि फिलहाल नायरा के पंप पर जाने वाले ग्राहकों को सरकारी तेल कंपनियों के पंपों की तुलना में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।

पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगी थी सीमा, फिर सरकार ने क्या कहा?

कीमत बढ़ाने से पहले फ्यूल रिटेल सेक्टर में एक और बड़ा घटनाक्रम हुआ था। नायरा और जियो-बीपी के कुछ पंपों पर पेट्रोल-डीजल की बिक्री सीमित किए जाने की खबर सामने आई थी। वजह थी खुदरा और थोक डीजल की कीमत में बड़ा अंतर।

सस्ता खुदरा डीजल लेने के लिए कुछ औद्योगिक ग्राहक पेट्रोल पंपों से ज्यादा खरीद करने लगे थे। इससे कुछ जगहों पर सप्लाई पर दबाव आया। 1 अक्टूबर को पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने निजी कंपनियों को बिक्री सीमित नहीं करने को कहा था। उनका रुख था कि पंपों पर ईंधन की बिक्री रोकना या सीमित करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अब आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?

नायरा के दाम बढ़ने से तुरंत पूरे देश में पेट्रोल-डीजल महंगा नहीं हुआ है। असर फिलहाल उसके नेटवर्क तक सीमित है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं और दूसरे रिटेलर भी लागत का असर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, तो तस्वीर बदल सकती है।

डीजल महंगा होने का असर सिर्फ गाड़ी चलाने तक सीमित नहीं रहता। माल ढुलाई, ट्रांसपोर्ट और कारोबार की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर दूसरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

वहीं, दूसरी तरफ कीमतें बाजार की लागत के मुकाबले कम रखने से तेल कंपनियों पर नुकसान का दबाव बढ़ता है। आईसीआरए के सितंबर के आकलन में पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर करीब 9 रुपये प्रति लीटर निगेटिव मार्केटिंग मार्जिन का अनुमान लगाया गया था। एजेंसी ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को मिलाकर करीब 530 करोड़ रुपये रोजाना के नुकसान का अनुमान दिया था।

नायरा गुजरात के वडीनार में सालाना 20 मिलियन टन क्षमता वाली रिफाइनरी चलाती है और देश में 7,000 से ज्यादा फ्यूल स्टेशन संचालित करती है। अब देखने वाली बात होगी कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें कितने समय तक बनी रहती हैं और बाकी फ्यूल कंपनियां आगे क्या रुख अपनाती हैं।