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Patna-Purnia Expressway : 120 की रफ्तार से दौड़ेगा पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे, 282 किमी का सफर होगा आसान; 21 पुल और 322 अंडरपास से बदलेगी कनेक्टिविटी

September 21, 2026

Patna-Purnia Expressway : बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना पर लोगों की नजरें टिकी हैं। करीब 282 किलोमीटर लंबे और छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे को तेज रफ्तार यातायात के लिहाज से डिजाइन किया जा रहा है। इसकी डिजाइन स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखी गई है। हालांकि एक्सप्रेसवे पर वाहनों की वास्तविक गति ट्रैफिक, मौसम और लागू यातायात नियमों पर निर्भर करेगी।

इस परियोजना के पूरा होने के बाद पटना से पूर्णिया तक सड़क मार्ग से सफर का समय काफी कम होने की उम्मीद है। परियोजना का लक्ष्य 2028 तक निर्माण पूरा करना बताया गया है। लक्ष्य पूरा होने पर दोनों शहरों के बीच यात्रा करीब 3 से 4 घंटे में पूरी होने की संभावना जताई जा रही है।

मीरनगर से हंसदह तक बनेगा लंबा कॉरिडोर

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का प्रस्तावित कॉरिडोर हाजीपुर के मीरनगर से शुरू होकर बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरेगा। इसका रास्ता समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा और मधेपुरा होते हुए पूर्णिया जिले के डगरूआ यानी हंसदह तक पहुंचेगा।

ग्रीनफील्ड परियोजना होने के कारण इसका उद्देश्य नए कॉरिडोर के जरिए उन क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना है, जहां मौजूदा मार्गों पर यातायात का दबाव रहता है। इससे उत्तर और उत्तर-पूर्वी बिहार के कई इलाकों को तेज कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

21 बड़े पुल, 140 छोटे पुल और 11 ROB

यह परियोजना सिर्फ छह लेन की सड़क बनाने तक सीमित नहीं है। एक्सप्रेसवे के पूरे कॉरिडोर पर बड़े स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाना है। प्रस्ताव के मुताबिक करीब 21 बड़े पुल और 140 छोटे पुल बनाए जाएंगे। इसके अलावा रेलवे लाइनों को पार करने के लिए 11 रेलवे ओवरब्रिज (ROB) प्रस्तावित हैं। स्थानीय सड़कों और अन्य मार्गों के लिए एक्सप्रेसवे पर 322 अंडरपास बनाए जाने की योजना है। वहीं पूरे कॉरिडोर में करीब 21 इंटरचेंज प्रस्तावित हैं। इन संरचनाओं का मकसद यह है कि एक्सप्रेसवे पर तेज गति से चलने वाले वाहनों को बार-बार स्थानीय यातायात या रेलवे क्रॉसिंग का सामना न करना पड़े।

वैशाली में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्शन

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे की एक अहम खासियत इसका दूसरे बड़े एक्सप्रेसवे से जुड़ना भी है। वैशाली में इसे आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है। इस कनेक्शन के बाद बिहार के अलग-अलग हिस्सों के बीच एक्सप्रेसवे नेटवर्क और मजबूत हो सकता है।इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहनों को वैकल्पिक और तेज रूट मिलने की संभावना है। माल ढुलाई करने वाले ट्रकों और कारोबार से जुड़े वाहनों के लिए भी यह कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पूर्णिया में 8 इंटरचेंज, एयरपोर्ट से भी कनेक्शन

परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूर्णिया जिले में है। यहां अकेले 8 इंटरचेंज प्रस्तावित हैं। इसके अलावा पूर्णिया एयरपोर्ट को एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना भी है। एयरपोर्ट तक बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने से पूर्णिया के अलावा आसपास के जिलों के यात्रियों को भी फायदा हो सकता है। कारोबार, पर्यटन और हवाई यात्रा करने वाले लोगों के लिए एयरपोर्ट तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

छह जिलों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया

एक्सप्रेसवे के निर्माण से पहले सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक जमीन अधिग्रहण है। परियोजना के लिए छह जिलों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जमीन उपलब्ध होने के बाद निर्माण कार्य को अलग-अलग पैकेज में तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है।

बिहार के सड़क नेटवर्क में जुड़ेंगे नए रास्ते

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद इसका असर सिर्फ पटना और पूर्णिया के बीच यात्रा तक सीमित नहीं रहने वाला है। रास्ते में आने वाले जिलों और कस्बों को भी बड़े सड़क नेटवर्क से जुड़ने का फायदा मिल सकता है। एक तरफ पटना जैसे बड़े शहरी केंद्र से कनेक्टिविटी मजबूत होगी, तो दूसरी ओर पूर्णिया के जरिए सीमांचल और उत्तर-पूर्वी बिहार तक पहुंच आसान हो सकती है। कारोबार, कृषि उत्पादों की ढुलाई और लंबी दूरी के यातायात के लिए भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

अगर परियोजना निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक 2028 तक पूरी होती है, तो बिहार के सड़क नेटवर्क में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। छह लेन का करीब 282 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर, 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की डिजाइन स्पीड, दर्जनों पुल, ROB, इंटरचेंज और सैकड़ों अंडरपास—ये सभी मिलकर पटना से पूर्णिया के बीच सड़क यात्रा का तरीका बदल सकते हैं।