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चीन में हथेली दिखाकर पेमेंट, क्या है Palm Scan Payment? UPI से कितना अलग है ये सिस्टम

September 16, 2026

Explainer: कल्पना कीजिए कि दुकान पर पेमेंट करने के लिए न मोबाइल निकालना पड़े, न कार्ड स्वाइप करना पड़े और न ही QR कोड स्कैन करना पड़े. सिर्फ अपनी हथेली एक स्कैनर के सामने रखिए और भुगतान हो जाए. चीन में इसी तरह की तकनीक यानी Palm Scan Payment ने डिजिटल पेमेंट की दुनिया में काफी ध्यान खींचा है. यह तकनीक हथेली के निशान और नसों के पैटर्न जैसी बायोमेट्रिक जानकारी का इस्तेमाल करके यूजर की पहचान करती है और उससे जुड़े भुगतान खाते से रकम काट देती है.

भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा नाम UPI है. ऐसे में सवाल उठता है कि चीन का Palm Payment आखिर कैसे काम करता है? क्या यह UPI से ज्यादा आधुनिक है? इसमें सुरक्षा कितनी है और क्या भारत में भी भविष्य में ऐसी तकनीक देखने को मिल सकती है? आइए समझते हैं.

क्या है Palm Scan Payment?

Palm Scan Payment एक बायोमेट्रिक पेमेंट सिस्टम है. इसमें व्यक्ति की हथेली को पहचान के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. सिस्टम हथेली के बाहरी पैटर्न के साथ-साथ अंदर मौजूद नसों के पैटर्न को भी पहचान सकता है.

इस तकनीक का इस्तेमाल चीन में Tencent के Weixin Pay के जरिए किया गया है. Tencent के अनुसार, Weixin Palm Scan Payment को सितंबर 2023 में चीन के ग्वांगडोंग प्रांत के 7-Eleven स्टोर्स में लॉन्च किया गया था.

इसका मतलब यह नहीं है कि चीन में हर जगह अब सिर्फ हथेली से भुगतान होता है. यह अभी भी कुछ चुनिंदा स्थानों और सेवाओं में इस्तेमाल होने वाली तकनीक है, जबकि Alipay और Weixin Pay जैसे मोबाइल पेमेंट सिस्टम वहां व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं.

हथेली से पेमेंट कैसे होता है?

Palm Payment का इस्तेमाल करने से पहले यूजर को अपनी हथेली की जानकारी पेमेंट अकाउंट से जोड़नी होती है.

इसके लिए यूजर एक विशेष Palm Scan डिवाइस के सामने हथेली रखता है. इसके बाद स्क्रीन पर दिए गए QR कोड को मोबाइल फोन से स्कैन करके अपने पेमेंट अकाउंट को इस बायोमेट्रिक पहचान से लिंक किया जाता है. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद अगली बार भुगतान के लिए मोबाइल निकालने की जरूरत नहीं रहती.

यूजर सिर्फ स्कैनर के सामने हथेली रखता है. सेंसर हथेली के पैटर्न को पहचानता है और उसे पहले से जुड़े पेमेंट अकाउंट से मैच करता है. पहचान सफल होने पर भुगतान पूरा हो जाता है और मोबाइल पर ट्रांजैक्शन की सूचना मिल सकती है.

इसमें नसों की पहचान क्यों जरूरी है?

सिर्फ हथेली की तस्वीर किसी व्यक्ति की पहचान के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती. इसलिए इस तरह की तकनीक में पाम प्रिंट और वेन पैटर्न जैसी अलग-अलग विशेषताओं का इस्तेमाल किया जाता है.

इन्फ्रारेड सेंसर हथेली के अंदर मौजूद नसों के पैटर्न को पढ़ने में मदद करते हैं. शरीर के अंदर मौजूद इन पैटर्न को कॉपी करना सामान्य फोटो की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होता है. इसी वजह से कंपनियां इसे बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की एक संभावित सुरक्षित तकनीक के तौर पर पेश करती हैं.

हालांकि, किसी भी बायोमेट्रिक सिस्टम को पूरी तरह जोखिम-मुक्त मानना सही नहीं होगा. इसमें डेटा सुरक्षा, पहचान की गलत मिलान और बायोमेट्रिक जानकारी के इस्तेमाल से जुड़े सवाल बने रहते हैं.

UPI से कैसे अलग है Palm Payment?

भारत का UPI और चीन का Palm Payment दोनों डिजिटल भुगतान की सुविधा देते हैं, लेकिन दोनों की बुनियादी तकनीक अलग है.

UPI में बैंक अकाउंट और मोबाइल आधारित डिजिटल पहचान प्रमुख भूमिका निभाती है, जबकि Palm Payment में व्यक्ति की बायोमेट्रिक पहचान भुगतान का माध्यम बनती है.

UPI में आम तौर पर यूजर QR कोड स्कैन करता है, UPI ID का इस्तेमाल करता है या भुगतान का अनुरोध स्वीकार करता है. इसके बाद बैंक खाते से रकम ट्रांसफर होती है.

इसके विपरीत Palm Payment में पहले से रजिस्टर्ड हथेली भुगतान अकाउंट की पहचान बन जाती है. यानी भुगतान के समय मोबाइल फोन या कार्ड की जरूरत कम हो सकती है.

सिर्फ तकनीक के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि Palm Payment UPI से "बेहतर" है. दोनों का उद्देश्य और डिजाइन अलग है.

UPI की सबसे बड़ी ताकत इसका ओपन और इंटरऑपरेबल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसके जरिए अलग-अलग बैंक और ऐप एक ही सिस्टम से जुड़े रह सकते हैं. वहीं Palm Payment भुगतान के अनुभव को और अधिक "कॉन्टैक्टलेस" बनाने पर केंद्रित है.

यानी Palm Payment को UPI का सीधा विकल्प समझना सही नहीं होगा. यह ज्यादा सही तरीके से पेमेंट के लिए एक अलग ऑथेंटिकेशन इंटरफेस के रूप में देखा जा सकता है.

UPI vs PSP
Photograph: (Photo-AI)

Palm Payment के क्या फायदे हैं?

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा सुविधा है. अगर यूजर पहले से रजिस्टर है, तो भुगतान के समय फोन या कार्ड निकालने की जरूरत नहीं पड़ती.

इसके अलावा यह तकनीक उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती है जहां लोग हाथ में सामान लिए हों या फोन निकालना सुविधाजनक न हो. Tencent ने Palm Payment को स्टोर्स के अलावा पावर-बैंक रेंटल जैसी सेवाओं में भी इस्तेमाल किए जाने का उदाहरण दिया है.

भविष्य में इसी तरह की तकनीक मेट्रो, ऑफिस एंट्री, जिम, टिकटिंग और दूसरी पहचान आधारित सेवाओं के साथ भी जोड़ी जा सकती है.

सबसे बड़ा सवाल प्राइवेसी का

Palm Payment जितना सुविधाजनक दिखाई देता है, उतने ही गंभीर सवाल इसके डेटा को लेकर उठते हैं. मोबाइल खो जाए तो उसे बदला जा सकता है और पासवर्ड बदला जा सकता है. लेकिन किसी व्यक्ति की हथेली या बायोमेट्रिक विशेषताएं पासवर्ड की तरह आसानी से बदली नहीं जा सकतीं.

इसलिए ऐसी तकनीक में यह बेहद महत्वपूर्ण है कि बायोमेट्रिक डेटा कहां स्टोर होता है, उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता है, उसे कौन एक्सेस कर सकता है और डेटा लीक होने की स्थिति में यूजर की सुरक्षा कैसे होगी.

क्या भारत में भी आ सकता है ऐसा पेमेंट?

भारत में फिलहाल डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा आधार UPI ही है. हालांकि, भारत और चीन से जुड़ी डिजिटल पेमेंट कनेक्टिविटी को लेकर अलग स्तर पर बातचीत भी हुई है. फरवरी 2026 में Reuters ने रिपोर्ट किया था कि भारत और Ant International के बीच Alipay+ को UPI से जोड़ने को लेकर बातचीत चल रही थी, ताकि भारतीय यूजर्स कुछ विदेशी बाजारों में UPI के जरिए भुगतान कर सकें.

लेकिन यह Palm Payment को भारत में लागू करने के बराबर नहीं है. UPI और Palm Scan दो अलग तकनीकी मॉडल हैं.

भविष्य में कैसा होगा डिजिटल पेमेंट?

डिजिटल पेमेंट का अगला चरण शायद सिर्फ मोबाइल और QR कोड तक सीमित न रहे. चेहरे, आवाज, हथेली और दूसरी बायोमेट्रिक तकनीकें भविष्य में भुगतान और पहचान को और ज्यादा सहज बना सकती हैं.

लेकिन सुविधा के साथ सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ेगी. इसलिए किसी भी नए पेमेंट सिस्टम की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि वह कितनी तेजी से भुगतान करता है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि यूजर का पैसा, पहचान और निजी डेटा कितनी मजबूती से सुरक्षित रखा जाता है.

फिलहाल चीन का Palm Scan Payment डिजिटल भुगतान की दिशा में एक दिलचस्प प्रयोग है, जबकि भारत का UPI बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाला अलग तरह का डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर है. दोनों को एक-दूसरे का सीधा विकल्प मानने के बजाय डिजिटल भुगतान के दो अलग-अलग रास्तों के रूप में समझना ज्यादा उचित होगा.

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