Published: Friday, September 18, 2026, 21:04 [IST]
NEET UG 2026 पेपर लीक और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर अहम बात कही है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर NTA के स्थायी दफ्तर का खुद दौरा कर सकता है। इसका मकसद यह देखना होगा कि परीक्षा व्यवस्था में किए गए सुधार सिर्फ रिपोर्ट और कागजों तक सीमित हैं या उन्हें वास्तव में लागू भी किया गया है।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सिस्टम, स्टाफ और दूसरी व्यवस्थाओं को जमीन पर देखने की बात कही। कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी की सिफारिशों पर भी अपडेट मांगा है और संबंधित जॉइंट सेक्रेटरी को अब तक हुई प्रगति की जानकारी हलफनामे के जरिए देने को कहा है।
NTA के दफ्तर जाकर सिस्टम देख सकता है कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह NTA के स्थायी कार्यालय जाकर वहां की व्यवस्था देख सकता है। कोर्ट यह जांचना चाहता है कि परीक्षा से जुड़ा सिस्टम वास्तव में तैयार है या नहीं और वह ठीक तरह से काम कर रहा है या नहीं।
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इसके अलावा दफ्तर में कितने कर्मचारी हैं, किस तरह की व्यवस्था की गई है और परीक्षा संचालन से जुड़ी दूसरी जरूरी चीजें किस स्थिति में हैं, इसे भी देखा जा सकता है। NTA का नया स्थायी दफ्तर नई दिल्ली के मिंटो रोड इलाके में बताया गया है।
सिर्फ रिपोर्ट में सुधार लिखना काफी नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार का मतलब केवल रिपोर्ट तैयार करना नहीं है। कमेटियों ने जो सुझाव दिए हैं, उनका जमीन पर लागू होना भी जरूरी है। कोर्ट का जोर इस बात पर है कि सुधारों का असर NTA के रोजमर्रा के कामकाज में दिखाई दे। यानी कागजों पर व्यवस्था बदलने की जानकारी देने के बजाय यह भी दिखना चाहिए कि नई व्यवस्था कैसे काम कर रही है। पीठ ने इस मामले में संस्थागत व्यवस्था और सुधारों को स्थायी रूप से लागू करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
हाई-पावर्ड कमेटी की प्रगति पर मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान NTA में परीक्षा सुधारों को लेकर बनी हाई-पावर्ड कमेटी के काम की भी जानकारी सामने आई। केंद्र की ओर से बताया गया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अलग-अलग पक्षों से विस्तार से बातचीत की है। कमेटी ने पहले की के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली कमेटी के सदस्यों के साथ भी चर्चा की है। केंद्र के मुताबिक, कमेटी की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है।
दो हफ्ते में देना होगा हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी के साथ तालमेल कर रहे कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के जॉइंट सेक्रेटरी को अब तक हुई प्रगति की जानकारी देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हलफनामे में यह बताना होगा कि कमेटी की सिफारिशों पर अब तक क्या काम हुआ है और सुधारों को लागू करने की स्थिति क्या है। कोर्ट ने इसके लिए दो हफ्ते का समय दिया है। मामले को तीन हफ्ते बाद फिर सूचीबद्ध करने की बात कही गई है।
NTA के सुधारों पर कोर्ट की सीधी नजर
NEET-UG 2026 से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट पहले भी NTA की व्यवस्था, जवाबदेही और परीक्षा संचालन में स्थायी बदलाव की जरूरत पर जोर दे चुका है। अब ताजा सुनवाई में कोर्ट ने यह देखने की बात कही है कि किए गए सुधार वास्तव में किस तरह काम कर रहे हैं।
इस सुनवाई से यह भी साफ है कि अदालत केवल नई सिफारिशें सुनने के बजाय उनके लागू होने और NTA की वास्तविक व्यवस्था की स्थिति को भी देखना चाहती है।
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