सिरसा महिला पुलिस थाने पर हमले के पांचों आरोपी और पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी, जिसकी जांच एनआईए कर रही।
सिरसा जिले में महिला पुलिस थाने पर ग्रेनेड हमला मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जांच के लिए अंबाला जेल पहुंची। यहां जेल में बंद आरोपी गुरजंट सिंह से एनआईए ने प्रिट्रायल इंटरवेंशन प्रोग्राम (PIP) पर लिया और इसी मामले से जुड़ी जानकारी मांगी है। जे
.
अंबाला जेल प्रशासन के अनुसार, विजयंत सहगल की कोर्ट के आदेशानुसार एनआईए से डीएसपी रोहन गुप्ता और उनकी चार सदस्यीय टीम आई थी। 31 अगस्त को दोपहर को दो घंटे का पीआईपी का समय था। आरोपी गुरजंट सिंह पंजाब के अमृतसर का रहने वाला है और उसके खिलाफ मोहाली में एक और अन्य केस भी दर्ज है।
एनआईए ने आरोपी गुरजंट से क्या जानकारी ली है, वो सब गुप्त रखा गया है। पीआईपी के तहत, यह एक ऐसी अदालती प्रक्रिया है, जिसमें आरोपी को जेल जाने या उसके अपराधिक रिकॉर्ड खराब होने से बचाती है। इस दौरान आरोपी पक्ष से उसकी पैरवी करने वाले वकील भी बुलाया जाता है।

महिला थाने के बाहर से विस्फोटक सामग्री फेंकते हुए खारिया निवासी युवक।
गुरजंट ने सिरसा के धीरज को ग्रेनेड मुहैया करवाया था
पंजाब के गुरजंट सिंह ने सिरसा के रहने वाले धीरज और संदीप को ग्रेनेड मुहैया करवाया था और इसके बाद धीरज ने साथियों के साथ महिला थाने पर विस्फोटक सामग्री फेंकी थी। गुरजंट का पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी के साथ लिंक सामने आया था। गुरजंट पिछले काफी दिनों से अंबाला जेल में बंद है। अब इसकी जांच एनआईए कर रही है।
NIA ने पंचकूला कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी। इस हमले का साजिशकर्ता पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी को बताया था। चार्जशीट में 9 नाम हैं, जिनमें से 2 पाकिस्तानी हैं। 5 आरोपी सिरसा और 2 पंजाब के रहने वाले हैं।
कोर्ट में दायर चार्जशीट में पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी, सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलूच को मुख्य साजिशकर्ता बताया है। केस में सिरसा के धीरज उर्फ धीरू, विकास उर्फ विक्की, संदीप उर्फ दैमर, विकास, सुशील उर्फ सिल्लू, मोहम्मद सिजान उर्फ सिजान उर्फ गाजी और गुरजंत सिंह अरेस्ट हैं। वहीं, एक नाबालिग अपराची है।

महिला थाने के बाहर वह जगह, जहां पर विस्फोटक फेंका गया और विस्फोटक सामग्री, जो पुलिस ने बरामद की।
अब जानिये…NIA चार्जशीट में बड़े खुलासे
सोशल मीडिया के जरिये गुर्गे तैयार किए
एनआईए की जांच के अनुसार, शहजाद और सोहेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और गुप्त संचार चैनलों के माध्यम से हमलावर चुने और उन्हें कट्टरपंथी बनाया। भारत में ऑपरेशनल मॉड्यूल स्थापित किए थे। उसके बाद स्थानीय गुर्गों को पुलिस प्रतिष्ठानों पर ग्रेनेड हमले करने का काम सौंपा था।
धीरज उनके इस मॉड्यूल का भारत गुर्ग था, जो स्थानीय मॉड्यूल के साथ हमलों के समन्वय के लिए जिम्मेदार था।
रैकी के बाद महिला थाना चुना
एनआईए की जांच में आगे पता चला कि संभावित लक्ष्यों की रेकी के बाद आरोपियों ने हमले के लिए सिरसा स्थित महिला पुलिस स्टेशन को चुना था। हमले में इस्तेमाल देसी ग्रेनेड पंजाब के अमृतसर से लाए थे। ग्रेनेड का इंतजाम गुरजंत सिंह ने किया।
प्रचार के लिए हमले का वीडियो बनाया
25 नवंबर 2025 की रात थाने के बाहर विस्फोट किया गया। इस घटना का वीडियो मोबाइल में रिकॉर्ड भी किया गया, ताकि इसे प्रसारित और प्रचारित किया जा सके। जिस वक्त हमला हुआ, उस वक्त रात थी और तब लोगों ने इसे पर ज्यादा गौर नहीं किया। अगले दिन वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया।