झीरम घाटी कांड को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने एनआईए कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताते हुए हाई कोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है। समाज ने 25 मई 2013 को हुई झीरम घाटी की घटना की कथित व्यापक साजिश की दोबारा जांच कराने और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को सामने
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शुक्रवार को परपा स्थित कोया समाज भवन में बस्तर संभाग के छह जिलों के प्रतिनिधियों और सजा पाए आरोपितों के परिजनों की करीब तीन घंटे बैठक हुई। बैठक में झीरम मामले की जांच, एनआईए कोर्ट के फैसले और आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को मिल रहे पुनर्वास लाभों समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव और बस्तर जिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
संगठन ने कहा कि वह फैसले से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा कर अपील की तैयारी करेगा। कानूनी खर्च के लिए बस्तर संभाग के प्रत्येक आदिवासी परिवार से 20-20 रुपये सहयोग जुटाने का निर्णय लिया गया। सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने बताया कि जिन 10 ग्रामीणों को मामले में आरोपी बनाया गया है, उनके परिजनों ने बैठक में दावा किया कि उनके परिवार के सदस्य घटना में शामिल नहीं थे और उन्हें गलत तरीके से मामले में फंसाया गया।
समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि अदालत के फैसले में दोषी ठहराए गए लोगों के संबंध में न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाएगा, लेकिन संगठन का मानना है कि झीरम घाटी घटना के पीछे की पूरी साजिश की जांच भी आवश्यक है। समाज ने घटना में कथित रूप से प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बैठक में आत्मसमर्पण कर चुके कुछ नक्सलियों को दिए जा रहे पुनर्वास लाभों का मुद्दा भी उठा। सर्व आदिवासी समाज ने मांग की कि झीरम मामले से कथित रूप से जुड़े रहे आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिली आर्थिक सहायता, सरकारी सुविधाओं और पुनर्वास लाभों की पात्रता का साक्ष्य-आधारित एवं पारदर्शी ऑडिट कराया जाए।
संगठन का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की झीरम मामले से संबंधित भूमिका के विश्वसनीय साक्ष्य सामने आते हैं, तो उसकी भूमिका की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जानी चाहिए। समाज ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी निर्दोष व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि झीरम घाटी कांड से जुड़े सभी सवालों का निष्पक्ष और तथ्यात्मक तरीके से समाधान तथा घटना की पूरी सच्चाई सामने लाना है।
बैठक में ये प्रमुख बातें उठीं
बैठक में लिए गए फैसलों में झीरम मामले की साजिश और संदिग्धों की भूमिका का अध्ययन, सरकार और जांच एजेंसियों के सामने पुनः जांच की मांग, आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिले लाभों का पुनर्मूल्यांकन, और जेलों में बंद बताए गए निर्दोष आदिवासियों के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने जैसे कदम शामिल हैं। संगठन ने कहा कि वह कथित रूप से जुड़े आत्मसमर्पित नक्सलियों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को दर्ज कराने का प्रयास भी करेगा।
बैज की अध्यक्षता में जुटेंगे दिग्गज
झीरम मामले पर कांग्रेस की रणनीति आज बनेगी
झीरम मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस की अहम बैठक शनिवार को राजीव भवन में होगी। बैठक दोपहर 12.30 बजे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की अध्यक्षता में आयोजित की गई है। इसमें नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू, प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गेंदु के साथ झीरम के शहीदों के परिजन, घायल और विधि विशेषज्ञ शामिल होंगे।
बैठक ऐसे समय हो रही है, जब झीरम मामले में एनआईए की विशेष अदालत का फैसला हाल ही में आया है। ऐसे में बैठक में मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। शहीद परिवारों और घायलों का पक्ष भी बैठक में रखा जाएगा। कांग्रेस नेताओं के साथ विधि विशेषज्ञों की मौजूदगी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक में झीरम से जुड़े अलग-अलग मामलों की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध कानूनी विकल्प और आगे किन मुद्दों को उठाया जाना चाहिए, इस पर राय ली जा सकती है। हालांकि, बैठक से पहले कांग्रेस ने चर्चा के एजेंडे या किसी प्रस्तावित फैसले को सार्वजनिक नहीं किया है।
13 साल बाद भी साजिश का सवाल
25 मई 2013 को दरभा घाटी में कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा काफिले पर हुए नक्सली हमले में प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन कई बड़े नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। घटना की जांच के लिए एनआईए के अलावा न्यायिक जांच आयोग भी गठित किया गया था। झीरम मामले से जुड़े विभिन्न जांच और कानूनी पहलू समय-समय पर राजनीतिक बहस का विषय रहे हैं। कल की बैठक में इन पहलुओं को लेकर कांग्रेस की अगली रणनीति स्पष्ट होने की संभावना है।