बरेली सीएमओ कार्यालय पर जुटे संविदा स्वास्थ्यकर्मियों और आशा बहुओं ने मानदेय वृद्धि को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
उत्तर प्रदेश के बरेली में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत संविदा स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई शुरू कर दी है। शुक्रवार को जिले भर के संविदा स्वास्थ्यकर्मियों और आशा बहुओं ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्या
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कर्मचारियों ने 8, 9 और 10 अक्टूबर तक तीन दिवसीय शांतिपूर्ण कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है। कर्मचारियों का दो-टूक कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो 12 अक्टूबर को प्रदेश भर के एक लाख से अधिक संविदा कर्मी लखनऊ कूच कर अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। प्रदर्शन के दौरान आशा वर्करों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कहा— "2000 में दम नहीं, 26000 से कम नहीं"।
कर्मचारियों के बयान: "2000 तो आने-जाने में खर्च हो जाते हैं, क्या इतने में परिवार पलेगा?" संध्या प्रजापति (आशा कार्यकर्ता): "सरकार से पूछना चाहते हैं कि क्या ₹2000 में परिवार चल सकता है? इतने में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी? ₹2000 तो केवल आने-जाने के किराये में निकल जाते हैं। हमें न मानदेय सही मिलता है, न प्रोत्साहन राशि।
हमारी मांग है कि वेतन सीधे ₹26,000 किया जाए, इससे कम में कोई समझौता नहीं होगा। सेंटर का सारा काम हम करते हैं, लेकिन सरकार को केवल आंगनबाड़ी दिखती है, आशा वर्कर नहीं।"
प्रियंका शर्मा (स्वास्थ्यकर्मी): "हमसे सारा काम कराया जाता है, लेकिन मानदेय केवल ₹2,000 दिया जा रहा है। हमें सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलना चाहिए। सरकार ने जो मोबाइल फोन दिए थे, वे पूरी तरह डेड (खराब) हो चुके हैं। अब हमें अपनी जेब से किस्तों (EMI) पर मोबाइल खरीदकर ई-कवच पोर्टल का ऑनलाइन काम करना पड़ रहा है। काम पूरा ऑनलाइन चाहिए लेकिन मानदेय शून्य।"
पुष्पेंद्र यादव (जिलाध्यक्ष, बरेली): "छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और हरियाणा में 10 वर्ष से अधिक सेवा पूरी करने वाले संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार से भी हमारा अनुरोध है कि 15-18 वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को तत्काल नियमित किया जाए।"
मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, ये हैं मुख्य मांगें संगठन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन उचित माध्यम से प्रेषित करते हुए 2 प्रमुख और 6 सूत्रीय अंतरिम मांगें रखी हैं: 2 प्रमुख मांगें:
- नियमितीकरण: 15-18 वर्षों से लगातार काम कर रहे समस्त एनएचएम संविदाकर्मियों का नियमितीकरण हो।
- समान कार्य-समान वेतन: नियमितीकरण होने तक संविदाकर्मियों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जाए और स्वास्थ्य विभाग में खाली पदों का सृजन हो।
6 सूत्रीय अन्य मांगें:
- कैशलेस इलाज: संविदा कर्मियों और उनके परिवारों को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस मिले।
- भत्ते व सामाजिक सुरक्षा: महंगाई भत्ता (DA), ईपीएफ (EPF), मकान किराया भत्ता (HRA) और ग्रेच्युटी का लाभ लागू हो।
- पारदर्शी ट्रांसफर नीति: रिक्त पदों, म्यूचुअल और आपसी सहमति पर गृह जनपद/गैर-जनपद तबादला नीति बहाल हो।
- अनुकंपा नियुक्ति: सेवाकाल के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर आश्रित को योग्यतानुसार नौकरी मिले।
- आउटसोर्स का समायोजन: MCTS/IDSP/HMIS डेटा ऑपरेटर और कोविड कर्मियों को जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित किया जाए।
- भर्तियों में 25% कोटा: स्वास्थ्य विभाग की नियमित भर्ती परीक्षाओं में एनएचएम संविदाकर्मियों के लिए 25 फीसदी सीटें आरक्षित की जाएं।
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी: 12 अक्टूबर से ठप हो सकती हैं स्वास्थ्य सेवाएं स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि 24 सितंबर को ज्ञापन देने के बाद 3 अक्टूबर तक सरकार के रुख का इंतजार किया गया। इसके बाद 5 से 7 अक्टूबर तक काला फीता बांधकर विरोध दर्ज कराया गया। अब 8 से 10 अक्टूबर तक तीन दिन कार्य बहिष्कार रहेगा।
इसके बावजूद यदि शासन स्तर पर वार्ता नहीं हुई, तो 12 अक्टूबर को प्रदेश भर से कर्मचारी लखनऊ पहुंचेंगे। इस दौरान अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।