Sindh River Illegal Sand Mining: मध्यप्रदेश के भिंड और दतिया जिलों से गुजरने वाली सिंध नदी में कथित अवैध रेत खनन के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सेंटल जोन बेंच ने सख्त रुख अपनाया है।
एनजीटी ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित करते हुए छह सप्ताह के अंदर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
गोविंद सिंह द्वारा दायर मूल आवेदन पर न्यायिक सदस्य जस्टिस शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया है।
भिंड के 18 और दतिया के 6 गांवों में अवैध रेत खनन
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि भिंड के 18 और दतिया के 6 गांवों के आसपास सिंध नदी में बिना जरूरी अनुमति और पर्यावरणीय मंजूरी के बड़े पैमाने पर मशीनों और सक्शन ड्रेजिंग उपकरणों से रेत निकाली जा रही है।
साथ ही, खनन से निकाली गई रेत का परिवहन कथित रूप से बिना वैध ट्रांजिट परमिट के किया जा रहा है।
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खनन से जलीय और वन्य जीवों पर पड़ रहा गंभीर असर
याचिका में यह भी कहा गया है कि अवैध खनन से सिंध नदी के पारिस्थितिकी तंत्र, जलीय जीवों और वन्यजीवों पर गंभीर असर पड़ रहा है। नदी में मगरमच्छ, घड़ियाल, भारतीय फ्लैप शेल कछुए और कई प्रवासी प्रक्षियों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
ट्रिब्यूनल ने प्रथम दृष्टया पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं और चार सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा है।
CPCB, MPED, SPCB को बनाया जांच नोडल एजेंसी
साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board), मप्र पर्यावरण विभाग (MP Environment Department) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (State Pollution Control Board) के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति गठित की गई है। समिति को स्थल निरीक्षण कर छह सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट एनजीटी के सामने प्रस्तुत करनी होगी।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस जांच के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
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